बेंजामिन नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत, अमेरिका में मुलाकात की योजना

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फोन पर चर्चा की है, जिसमें दोनों नेता जल्द ही अमेरिका में एक आमने-सामने की बैठक करने पर सहमत हुए हैं।

ट्रंप और नेतन्याहू के बीच फोन कॉल

इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने जानकारी दी है कि शुक्रवार के दिन इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच एक महत्वपूर्ण फोन पर बातचीत हुई है। इस चर्चा के दौरान दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई है कि वे बहुत जल्द अमेरिका में एक-दूसरे से मुलाकात करेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, इस दौरान नेतन्याहू ने ट्रंप को अमेरिका की स्थापना की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर शुभकामनाएं दीं। इस बातचीत में नेतन्याहू ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका वैश्विक स्तर पर स्वतंत्रता और लोकतंत्र का आधार है, और इजरायल अपने और अमेरिका के बीच मौजूद गहरे और मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को बेहद महत्व देता है। हालांकि, दोनों नेताओं की मुलाकात के लिए अभी तक किसी विशिष्ट तिथि या स्थान की घोषणा नहीं की गई है।

लेबनान और ईरान से जुड़ी चुनौतियां

यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब हाल ही के दिनों में डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक मंचों से इजरायल की नीतियों की आलोचना की थी। ट्रंप की नाराजगी की मुख्य वजह लेबनान में हिज्बुल्लाह के साथ चल रहा इजरायल का संघर्ष है, जिससे ईरान के साथ शांति वार्ता की संभावनाएं प्रभावित हो सकती थीं। ईरान के साथ होने वाली 14-पॉइंट वाले MoU यानी सहमति पत्र को लेकर ताजा घटनाक्रम यह है कि 1 जुलाई को कतर की राजधानी दोहा में एक बैठक हुई। इस बैठक में कतर और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों ने अमेरिका तथा ईरान के वार्ताकारों के साथ अलग-अलग संवाद किया। कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पुष्टि की है कि इस 14-पॉइंट वाले MoU पर चर्चा के दौरान सकारात्मक प्रगति दर्ज की गई है। सभी संबंधित पक्ष भविष्य में भी बातचीत का सिलसिला कायम रखने के लिए राजी हैं, और अगली बैठक ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता के अंतिम संस्कार के तुरंत बाद आयोजित की जाएगी।

हिज्बुल्लाह के खिलाफ इजरायल का कड़ा रुख

दूसरी ओर, इजरायल ने अपना सैन्य रुख स्पष्ट रखा है। 1 जुलाई को ही देश ने घोषणा की थी कि लेबनान के साथ किसी भी युद्धविराम समझौते के बावजूद, हिज्बुल्लाह के विरुद्ध सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी। इजरायल की उप-विदेश मंत्री शेर्रेन हैस्केल ने इस तर्क को मजबूती से रखा कि ईरान द्वारा समर्थित यह समूह देश की सुरक्षा के लिए एक गंभीर और प्रत्यक्ष खतरा है। उन्होंने कहा कि जब तक हिज्बुल्लाह के हथियारों का जखीरा पूरी तरह से नष्ट नहीं किया जाता, लेबनान की सीमा पर स्थायी शांति की उम्मीद करना व्यर्थ है। हैस्केल ने अपने एक साक्षात्कार में जोर देकर कहा कि इजरायल की जमीन पर होने वाले हमलों को रोकने के लिए सैन्य अभियान आवश्यक हैं, और हिज्बुल्लाह की सैन्य ताकत को पूरी तरह खत्म करना इजरायल और लेबनान दोनों की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।

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