आज के दौर में देश के युवाओं की सोच में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले के समय में युवा पढ़ाई पूरी करने के बाद किसी बड़ी कंपनी में सुरक्षित नौकरी पाने को ही अपने जीवन का एकमात्र लक्ष्य मानते थे। लेकिन आज की नई पीढ़ी नौकरी करने से ज्यादा अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। स्वरोजगार की इसी राह पर चलते हुए झारखंड के जमशेदपुर की रहने वाली 25 वर्षीय मोनिका ने भी अपनी एक अलग पहचान बनाई है। मोनिका ने दूसरों के अधीन काम करने की बजाय खुद का सपना पूरा करने का फैसला किया और आज उनका यह फैसला बेहद सफल साबित हो रहा है।
कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ चुना अपनी पसंद का रास्ता
अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद मोनिका ने भी आम युवाओं की तरह एक कॉर्पोरेट राह चुनी थी। उन्होंने एक नामी इंश्योरेंस कंपनी में कुछ वर्षों तक नौकरी की। हालांकि, इस नौकरी के दौरान उन्हें जल्द ही महसूस हो गया कि वहां काम का दबाव बहुत अधिक था, जबकि उस मेहनत के बदले मिलने वाली आमदनी और मानसिक संतुष्टि बेहद कम थी। काम के भारी तनाव और नाममात्र की सैलरी ने मोनिका को कुछ नया और खुद का काम करने के लिए सोचने पर मजबूर कर दिया। आखिरकार, उन्होंने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया और अपनी मेहनत तथा रचनात्मकता को अपने खुद के बिजनेस में लगाने का दृढ़ संकल्प लिया।
सुबह 6 बजे सज जाता है सेहत का यह अनोखा स्टॉल
नौकरी छोड़ने के बाद मोनिका ने लोगों की सेहत को ध्यान में रखते हुए हेल्दी फूड और ड्रिंक्स का एक छोटा लेकिन बेहद अनूठा स्टार्टअप शुरू किया। उनका यह बिजनेस पूरी तरह से लोगों की सेहत और पोषण पर केंद्रित है। मोनिका रोजाना सुबह ठीक 6 बजे जमशेदपुर के प्रसिद्ध एग्रीको ट्रांसपोर्ट मैदान के पास अपना फूड कार्ट लगा लेती हैं। उनके इस स्टॉल पर आने वाले ग्राहकों को सेहतमंद विकल्पों की एक लंबी सूची मिलती है। सुबह की सैर और कसरत करने आने वाले लोगों के लिए मोनिका का यह स्टॉल किसी वरदान से कम नहीं है।
मोनिका के स्टॉल पर मिलने वाले मुख्य उत्पादों में शामिल हैं:
- ताजा और पौष्टिक कोकोनट मिल्क
- ताजे और मौसमी फलों से तैयार किए गए स्वादिष्ट फ्रूट शेक्स
- शरीर को डिटॉक्स करने वाला इन्फ्यूज्ड वाटर
- एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर सेहतमंद जामुन शॉट्स
- अलग-अलग प्रकार के ताजे कटे हुए फल
आजकल लोग अपनी सेहत और खानपान को लेकर काफी जागरूक हो गए हैं, यही वजह है कि मोनिका के इस पौष्टिक और अनूठे कॉन्सेप्ट को स्थानीय लोग हाथों-हाथ ले रहे हैं।
स्कूटी से सफर और मात्र 1 घंटे में सारा सामान साफ
इस पूरे स्टार्टअप की सबसे प्रेरणादायक बात यह है कि मोनिका अपने इस बिजनेस को पूरी तरह से अकेले ही संभालती हैं। वह किसी अन्य कर्मचारी पर निर्भर नहीं हैं। सुबह जल्दी उठकर ताजे फल काटना, शेक्स तैयार करना और सारा सामान अपनी स्कूटी पर लादकर स्टॉल तक पहुंचाना, यह सारा काम वह खुद ही करती हैं। वह खुद ही स्कूटी चलाकर एग्रीको मैदान पहुंचती हैं और वहां अपना स्टॉल सजाती हैं।
उनकी कड़ी मेहनत और परोसे जाने वाले खाद्य पदार्थों की बेहतरीन गुणवत्ता का ही असर है कि स्टॉल लगाने के मात्र 1 घंटे के भीतर उनका सारा सामान पूरी तरह बिक जाता है। मोनिका रोजाना सुबह-सुबह ही 100 से अधिक शेक्स और कटे हुए फ्रूट्स के पैकेट बेच देती हैं। इस तरह दिन की शुरुआत होते ही महज एक घंटे में उनकी बंपर बिक्री हो जाती है और वह मुस्कुराते हुए घर लौटती हैं।
मजेदार स्लोगन और अनोखी मार्केटिंग शैली
आज के समय में किसी भी बिजनेस को सफल बनाने के लिए केवल अच्छी गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि बेहतरीन मार्केटिंग की भी जरूरत होती है। मोनिका ने इस बात को बखूबी समझा है। उनके स्टॉल पर लिखा एक मजेदार कैप्शन लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लेता है। मोनिका के स्टॉल पर लिखा है, ‘धोखा खाने से अच्छा, मेरे यहां फ्रूट्स खा लो।’
यह अनूठा और मजाकिया स्लोगन वहां से गुजरने वाले हर व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान ला देता है। युवा वर्ग को यह लाइन विशेष रूप से आकर्षित करती है, जिससे उनके स्टॉल को एक बेहतरीन ब्रांडिंग मिल गई है। सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर भी लोग इस अनोखे स्लोगन की काफी चर्चा करते हैं।
मोनिका की यह कहानी साफ तौर पर यह साबित करती है कि अगर आपके पास एक नई और रचनात्मक सोच है, और आप मेहनत करने से पीछे नहीं हटते, तो एक छोटे से आइडिया से भी बड़ी सफलता पाई जा सकती है। आज वह जमशेदपुर के सैकड़ों युवाओं के लिए एक मिसाल बन चुकी हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि सफलता केवल बड़ी कंपनियों में नौकरी करने में नहीं है, बल्कि अपने सपनों को सच करने और खुद का रास्ता बनाने में है।
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