हिंसा का रास्ता छोड़कर विकास की राह पर मड़कम भीमा, सुकमा में बन गए बदलाव की मिसाल

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के मड़कम भीमा ने बंदूक छोड़कर मुख्यधारा को अपनाया है, और अब सरकारी योजनाओं की बदौलत वह एक सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं।

बदलाव की एक नई इबारत

छत्तीसगढ़ का बस्तर इलाका आज एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। यह बदलाव केवल नीतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन लोगों की जिंदगी में भी दिख रहा है जिन्होंने हिंसा का रास्ता त्यागकर समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का फैसला किया है। सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड स्थित पोलमपल्ली गांव के निवासी मड़कम भीमा की जीवन यात्रा इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। कभी भय और बंदूकों के साये में जीने वाले मड़कम भीमा आज विकास और शांतिपूर्ण जीवन का प्रतीक बन चुके हैं।

प्रशासन का सहयोग और पुनर्वास

मड़कम भीमा के इस बदलाव के पीछे जिला प्रशासन, सुरक्षा बलों और राज्य सरकार की समन्वित रणनीति का बड़ा हाथ है। हिंसा का रास्ता छोड़ने के बाद, उन्हें समाज में सम्मान के साथ पुनर्स्थापित करने के लिए प्रशासन ने पूरी मदद की। सरकार की पुनर्वास नीति ने न केवल उन्हें एक नई पहचान दी, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने के अवसर भी प्रदान किए। प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि भीमा का यह सफर यह साबित करता है कि अगर सही दिशा और सहयोग मिले, तो कोई भी व्यक्ति मुख्यधारा में वापस लौटकर अपनी किस्मत बदल सकता है।

सरकारी योजनाओं से मिला संबल

मुख्यधारा में लौटने के बाद मड़कम भीमा को सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिला है। उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति सुधारने के लिए प्रशासन ने उन्हें कई स्तरों पर सहयोग दिया:

  • प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण): इस योजना के तहत मड़कम भीमा को पक्का घर बनाने के लिए सरकारी सहायता मिली। अब उनका अपना सुरक्षित मकान तैयार हो चुका है, जिसने उनके पूरे परिवार को स्थिरता और सम्मानजनक जीवन जीने का आधार दिया है।
  • मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम): आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए उन्हें मनरेगा के कार्यों से जोड़ा गया। वे अपने ही गांव में चल रहे विकास कार्यों में मेहनत करते हैं और उनकी मजदूरी की राशि सीधे उनके बैंक खाते में पहुंच जाती है।

आत्मनिर्भरता का नया सफर

प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, यह बदलाव केवल एक घर या मजदूरी तक सीमित नहीं है। मड़कम भीमा की कहानी से उनके पूरे परिवार में भविष्य के प्रति एक नई उम्मीद जगी है। मजदूरी और सरकारी योजनाओं के लाभ से उनकी आर्थिक तंगी दूर हुई है और उनमें आत्मविश्वास बढ़ा है। जिला प्रशासन अब इस प्रयास को जिले के अन्य युवाओं के लिए एक प्रेरणा के रूप में देख रहा है। यह उदाहरण स्पष्ट करता है कि हिंसा से दूर रहकर शिक्षा, विकास और आत्मनिर्भरता का रास्ता ही एक बेहतर और सुखद कल की गारंटी है। शासन का मुख्य उद्देश्य यही है कि योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और मुख्यधारा से जुड़ने वाले हर नागरिक को एक गौरवपूर्ण जीवन जीने का मौका मिले।

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