राम मंदिर चंदा चोरी और VVIP दर्शन का काला सच: जांच में सामने आए हैरान करने वाले खुलासे

राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और दर्शन प्रबंधन में बड़े पैमाने पर धांधली का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि टिन्नू यादव और गोपाल राव ने होटल संचालकों के साथ मिलकर श्रद्धालुओं से दर्शन के नाम पर अवैध वसूली का रैकेट चलाया था।

राम मंदिर प्रबंधन में बड़े पैमाने पर धांधली

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले की जांच जैसे जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे वैसे मंदिर परिसर की व्यवस्था को लेकर चौंकाने वाले सच सामने आ रहे हैं। इस जांच में न केवल चढ़ावे में की गई हेराफेरी का पता चला है, बल्कि यह भी खुलासा हुआ है कि रामलला के दर्शन के नाम पर श्रद्धालुओं से अवैध वसूली का एक बड़ा संगठित गिरोह काम कर रहा था। मुख्य आरोपी टिन्नू यादव और गोपाल राव ने मिलकर भक्तों को वीवीआईपी दर्शन दिलाने के नाम पर 25 हजार रुपये तक वसूले। यह पूरा अवैध धंधा स्थानीय होटल मालिकों के साथ मिलकर संचालित किया जा रहा था।

कैसे काम करता था वीवीआईपी दर्शन का अवैध पैकेज

मंदिर की व्यवस्था के तहत प्रतिदिन 300 वीवीआईपी दर्शन पास जारी किए जाते हैं, जिनके लिए कोई भी आधिकारिक शुल्क नहीं लिया जाता। हालांकि, मंदिर परिसर के भीतर टिन्नू यादव की पकड़ इतनी मजबूत थी कि वह अपनी मर्जी से पास जारी करवाता था। उसने अयोध्या के कई होटल संचालकों के साथ सांठगांठ कर रखी थी। जो श्रद्धालु इन होटलों में रुकते थे, उन्हें होटल प्रबंधन की ओर से 25 हजार रुपये का एक विशेष पैकेज ऑफर किया जाता था। इस पैकेज में रामलला के वीवीआईपी दर्शन और मंदिर में आरती कराने की गारंटी दी जाती थी। जो भक्त इस रकम को देने के लिए तैयार हो जाते थे, उनकी सूची सीधे टिन्नू यादव के पास पहुंचती थी और वह वीआईपी गेट से उनकी एंट्री का इंतजाम कर देता था।

दर्शन के नाम पर वसूली का खेल

गोपाल राव, जो उस समय मंदिर के व्यवस्थापक थे, वे इन लोगों के दर्शन की पूरी प्रक्रिया को मैनेज करते थे। ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा होने के बावजूद, आम लोगों को इसकी जानकारी कम थी, जिसका फायदा उठाकर इन लोगों ने मुनाफाखोरी की। खासकर राम नवमी, दीपावली और नए साल जैसे अवसरों पर जब भीड़ अत्यधिक होती थी, तब होटल संचालकों के साथ मिलकर ये लोग वीवीआईपी और सुगम दर्शन के नाम पर लाखों का खेल करते थे।

होटलों के साथ डील और वॉकी-टॉकी का इस्तेमाल

जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि टिन्नू यादव के पास हमेशा एक वॉकी-टॉकी रहता था और उसके पास वीवीआईपी पास जारी करने का पूरा अधिकार था। मंदिर के पहले तल पर जब राम दरबार सजाया गया था, तब आम श्रद्धालुओं को वहां जाने की अनुमति नहीं थी, लेकिन वीवीआईपी दर्शन वाले वहां तक आसानी से पहुंच सकते थे। इसके अलावा, रोजाना 600 सुगम दर्शन पास भी जारी होते थे। इन सभी दर्शनों का उपयोग टिन्नू और गोपाल राव ने होटल मालिकों के साथ मिलकर एक रैकेट की तरह किया। होटल के स्पेशल पैकेज में ठहरने और भोजन के साथ ही मंदिर में विशेष दर्शन का प्रलोभन शामिल होता था, जिसका कमीशन टिन्नू और गोपाल के पास पहुंचता था।

चंपत राय पर गंभीर आरोप और विवाद

इस घोटाले के सामने आने के बाद कई दानदाता रामभक्त भी अब खुलकर सामने आ रहे हैं और मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के व्यवहार पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं। पूर्व गृह सचिव एस. लक्ष्मीनारायण ने चंपत राय पर अहंकार का आरोप लगाया है। लक्ष्मीनारायण ने बताया कि जब उन्होंने चंपत राय से राम मंदिर में अर्पित की गई सोने की रामचरित मानस के बारे में पूछा, तो चंपत राय ने स्पष्ट जवाब देने के बजाय कहा कि मंदिर में केवल उन्हीं की मर्जी चलेगी और जिसे जो शिकायत करनी हो, वह कर सकता है।

सोने की रामचरित मानस का रहस्य

एस. लक्ष्मीनारायण ने 8 अप्रैल 2024 को अपने पुश्तैनी गहनों को पिघलाकर सोने से मढ़ी रामचरित मानस रामलला को भेंट की थी। शुरुआत में यह प्रतिमा के पास ही रखी गई थी, लेकिन कुछ दिनों बाद इसे हटा दिया गया। जब लक्ष्मीनारायण इस बारे में जानकारी लेने अयोध्या पहुंचे, तो उन्हें 9 घंटे तक इंतजार कराया गया। बाद में चंपत राय ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि करोड़ों लोगों ने भेंट चढ़ाई है और वह हर किसी का हिसाब नहीं रख सकते।

कीमती आभूषणों के गायब होने का डर

जांच में यह भी पाया गया कि रामलला को अर्पित किए गए सोने-चांदी के आभूषणों को संभालने की जिम्मेदारी चंपत राय ने टिन्नू यादव को दी थी। टिन्नू यादव किसी भी श्रद्धालु को वीवीआईपी दर्शन कराकर उसके सामने ही चढ़ावा रामलला के पास रखवा देता था, लेकिन इसकी कोई रसीद नहीं दी जाती थी। थोड़ी देर बाद ही उन कीमती वस्तुओं को वहां से हटा दिया जाता था। इस पूरे खेल का कोई लेखा-जोखा न होने के कारण उन दानदाताओं में भारी आक्रोश है जिन्होंने रामलला के लिए कीमती गहने दान किए थे।

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