भीलवाड़ा का रहस्यमयी धार्मिक स्थल, जहां 400 साल से लगातार जल रही है गुलाब बाबा की धूणी

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में स्थित गुलाबपुरा कस्बा अपनी एक अनोखी और प्राचीन परंपरा के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। यहां 400 वर्षों से संत गुलाब बाबा की धूणी अखंड रूप से जल रही है, जिसे देखने और मन्नत मांगने के लिए दूर-दराज से हजारों श्रद्धालु आते हैं।

भीलवाड़ा की पहचान और गुलाब बाबा की महिमा

राजस्थान का भीलवाड़ा जिला अपनी टेक्सटाइल सिटी के रूप में तो विश्व विख्यात है ही, साथ ही इसे मेवाड़ के प्रवेश द्वार के रूप में भी जाना जाता है। लेकिन इस जिले के भीतर एक ऐसा स्थान भी है जो औद्योगिक पहचान से इतर गहरी आस्था और चमत्कारी इतिहास के लिए जाना जाता है। हम बात कर रहे हैं गुलाबपुरा की। इस कस्बे का नाम एक महान तपस्वी संत गुलाब बाबा के नाम पर पड़ा है। इस स्थान की सबसे बड़ी विशेषता यहां की 400 वर्ष पुरानी धूणी है, जो आज भी निरंतर प्रज्वलित है। यह धूणी केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि सदियों पुराने विश्वास और त्याग का प्रतीक बन चुकी है।

गुलाब बाबा के संत बनने की प्रेरक कहानी

स्थानीय निवासी केडी मिश्रा के अनुसार, संत गुलाब बाबा का प्रारंभिक जीवन एक सामान्य ब्राह्मण परिवार में व्यतीत हुआ था। वे बचपन में गुलाबपुरा के निकट स्थित भिनाय गांव के निवासी थे। उनके संत बनने के पीछे एक छोटी सी घटना का बड़ा महत्व माना जाता है। एक बार वे गाय चराने के लिए बाहर जा रहे थे और उन्होंने अपनी भाभी से अपने लिए भोजन बांधने को कहा। उस समय भाभी किसी घरेलू कार्य में व्यस्त थीं, जिस कारण भोजन तैयार करने में थोड़ी देरी हुई। भोजन न मिलने पर गुलाब बाबा को गुस्सा आ गया और वे जिद पर अड़ गए। तब भाभी ने हंसी-मजाक में उनसे कहा कि यदि तुम साधु बन जाओगे, तो तुम्हें भोजन के लिए किसी का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और वह अपने आप मिल जाएगा।

घर का त्याग और कठिन तपस्या

भाभी के ये शब्द गुलाब बाबा के हृदय में गहराई तक उतर गए और उन्होंने वैराग्य धारण करने का मन बना लिया। उन्होंने अपने एक मित्र के साथ घर का त्याग कर दिया और मसूदा के एक ज्ञानी संत के पास पहुंचे। उन्होंने उस संत से अपना शिष्य बनाने का आग्रह किया। प्रारंभ में गुरु ने उन्हें बालक समझकर उपदेश दिया और वापस जाने को कहा, लेकिन उनकी अटूट जिद और दृढ़ संकल्प देखकर उन्होंने उन्हें साधना की अनुमति दे दी। गुलाब बाबा ने लगभग 12 वर्षों तक अत्यंत कठोर तपस्या की। अंत में, उनके गुरु उनकी साधना से प्रसन्न हुए और उन्हें वापस अपने गांव लौटकर एक धूणी स्थापित करने का आशीर्वाद दिया। गुरु के निर्देशानुसार, वे वापस भिनाय आए और वहां धूणी जलाई। यही स्थान आगे चलकर गुलाब बाबा की नगरी, यानी गुलाबपुरा के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

400 साल से प्रज्वलित धूणी का चमत्कार

लोगों का अटूट विश्वास है कि गुलाब बाबा की धूणी पिछले 400 वर्षों से बिना किसी व्यवधान के लगातार जल रही है। बाबा के तप और सिद्धियों के किस्से समय के साथ चारों ओर फैल गए। श्रद्धालुओं का मानना है कि जो भी भक्त सच्चे मन से यहां अपनी अर्जी लेकर आता है, बाबा उसे निराश नहीं करते हैं। प्रतिदिन सुबह से लेकर देर शाम तक यहां दर्शनार्थियों का तांता लगा रहता है। लोग अपनी व्यक्तिगत परेशानियों के निवारण, व्यापार में प्रगति और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के लिए यहां आते हैं। भक्त यहां धूणी के समक्ष मत्था टेककर बाबा का आशीर्वाद लेते हैं और अपनी मन्नत पूरी होने के लिए प्रार्थना करते हैं।

श्रद्धा का बड़ा केंद्र और भव्य मेला

गुलाबपुरा अब केवल एक कस्बे तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो गया है। विशेष रूप से अमावस्या, पूर्णिमा और विभिन्न धार्मिक पर्वों पर यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं। यहां साल में एक बार भव्य मेले का आयोजन किया जाता है, जो आस्था का अद्भुत समागम होता है। इस मेले में राजस्थान के अतिरिक्त मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग सम्मिलित होते हैं। इस आयोजन के दौरान भजन-कीर्तन, धार्मिक अनुष्ठान और भंडारों का क्रम चलता रहता है। यह मेला स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे वहां के बाजारों में रौनक बढ़ जाती है और व्यापारियों को भी आर्थिक संबल मिलता है।

धार्मिक परंपराओं का अनूठा मेल

गुलाब बाबा की धूणी पर आने वाले श्रद्धालु जब दर्शन कर लेते हैं, तो वे प्रसाद चढ़ाकर बाबा के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। आज गुलाबपुरा की पहचान एक औद्योगिक क्षेत्र होने के साथ-साथ एक ऐसे पावन स्थल की है, जहां की मिट्टी में संतों की तपस्या की गंध बसी है। यहां आने वाला व्यक्ति केवल पर्यटन के लिए नहीं आता, बल्कि वह अपनी संस्कृति और परंपराओं से पुनः जुड़ने के उद्देश्य से पहुंचता है। आज भी जब लोग गुलाबपुरा का नाम सुनते हैं, तो सबसे पहले उनके मन में गुलाब बाबा की 400 साल पुरानी धूणी का ध्यान आता है, जो भक्तों की हर मनोकामना को पूरा करने का सामर्थ्य रखती है। इस क्षेत्र ने गुलाब बाबा के आशीर्वाद से ही आज देशभर में अपनी एक विशेष और गौरवशाली पहचान बनाई है।

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