प्रसव पीड़ा ने बदली दिशा, खंडवा की डॉ. प्रीति गुर्जर आज बनीं निमाड़ की बड़ी स्त्री रोग विशेषज्ञ

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले की डॉ. प्रीति गुर्जर ने बचपन में महिलाओं की प्रसव संबंधी परेशानियां और मौतें देखीं, जिसके बाद उन्होंने डॉक्टर बनने का पक्का इरादा किया। आज वे अपनी मेहनत और लगन से हजारों महिलाओं के जीवन में उम्मीद की नई किरण बनी हुई हैं।

बचपन के दर्द से उपजा संकल्प

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के निशानियां गांव की एक साधारण सी लड़की की कहानी आज कई लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है। यह कहानी है डॉ. प्रीति गुर्जर की, जिन्होंने न केवल अपने सपनों को साकार किया, बल्कि हजारों महिलाओं के लिए स्वास्थ्य का एक मजबूत स्तंभ भी बनीं। डॉ. प्रीति के डॉक्टर बनने का सफर किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है। बचपन में उन्होंने अपने गांव और आसपास के क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं को प्रसव पीड़ा के दौरान होने वाली समस्याओं से जूझते देखा था। उस दौर में चिकित्सा सुविधाओं का अभाव था, और समय पर सही इलाज न मिलने के कारण कई महिलाओं की स्थिति काफी गंभीर हो जाती थी। अत्यधिक रक्तस्राव यानी ब्लीडिंग के कारण कई महिलाओं की तो जान भी चली जाती थी। इन मार्मिक दृश्यों ने नन्ही प्रीति के कोमल मन पर एक गहरा और अमिट प्रभाव डाला। उन्होंने उसी समय ठान लिया था कि वे बड़ी होकर डॉक्टर बनेंगी ताकि महिलाओं को इस तरह की लाचारी और दर्द से बचाया जा सके।

शिक्षा की राह और चुनौतियों का सामना

डॉ. प्रीति का शुरुआती जीवन काफी चुनौतीपूर्ण रहा। उनके गांव में पढ़ाई की सुविधा केवल 8वीं कक्षा तक ही सीमित थी। उस समय गांव में लड़कियों की पढ़ाई को लेकर समाज का दृष्टिकोण आज जैसा नहीं था और शिक्षा को बहुत अधिक प्राथमिकता नहीं दी जाती थी। वे बताती हैं कि उनके पूरे स्कूल में सिर्फ दो ही लड़कियां पढ़ने जाती थीं, जिनमें से एक वे खुद थीं और दूसरी उनकी सहेली। बावजूद इसके, उनके पिता ने समाज की परवाह किए बिना उनका पूरा साथ दिया। सीमित आर्थिक संसाधनों और प्रतिकूल परिस्थितियों के बाद भी उनके पिता ने बेटियों की शिक्षा जारी रखी और उन्हें निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहे।

स्कॉलरशिप से मिली नई उड़ान

उनकी प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 8वीं कक्षा में उन्होंने ब्लॉक स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया। इस उपलब्धि के बाद उन्हें ग्रामीण प्रतिभा खोज योजना के तहत स्कॉलरशिप का लाभ मिला, जिसने उनके जीवन की दिशा पूरी तरह बदल दी। इस स्कॉलरशिप की मदद से उन्हें इंदौर के अहिल्या आश्रम स्कूल में दाखिला मिला, जहाँ उन्होंने अपनी 9वीं से 12वीं तक की स्कूली पढ़ाई पूरी की।

व्यक्तिगत त्रासदी ने किया और मजबूत

डॉ. प्रीति के इरादों को तब और अधिक मजबूती मिली, जब उन्होंने अपने परिवार में ही प्रसव की विभीषिका को करीब से देखा। एक बार उनकी मां की डिलीवरी के दौरान अत्यधिक ब्लीडिंग की समस्या हो गई थी और बड़ी मुश्किल से उनकी जान बचाई जा सकी थी। इस घटना ने उनके डॉक्टर बनने के जुनून को एक नई दिशा और गहराई दी। उन्होंने मेहनत की पराकाष्ठा पार की और साल 1998 में रायपुर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज से अपनी MBBS की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने इंदौर के MGM कॉलेज से स्त्री रोग विशेषज्ञ के रूप में MS की पढ़ाई पूरी की। अपनी कड़ी मेहनत का परिचय देते हुए उन्होंने प्री-पीजी परीक्षा में पूरे मध्य प्रदेश में जनरल कैटेगरी में 5वीं रैंक हासिल की थी।

आज निमाड़ की जानी-मानी डॉक्टर

आज डॉ. प्रीति गुर्जर खंडवा में अपना स्वयं का गुर्जर हॉस्पिटल चला रही हैं। वे निमाड़ अंचल की सबसे प्रतिष्ठित और प्रमुख स्त्री रोग विशेषज्ञों में गिनी जाती हैं। अपने अस्पताल के माध्यम से वे समय पर इलाज और उचित मार्गदर्शन प्रदान कर रही हैं, जिससे सैकड़ों नहीं बल्कि हजारों महिलाओं का जीवन सुरक्षित हुआ है। छह बहनों के बीच पली-बढ़ी डॉ. प्रीति ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि आपके इरादे बुलंद हों और परिवार का साथ मिले, तो कोई भी सपना बड़ा नहीं होता। उनका स्पष्ट मानना है कि लड़कियों का शिक्षित और आत्मनिर्भर होना समाज के विकास के लिए बेहद जरूरी है। उनका कहना है कि जब महिलाएं पढ़-लिखकर आगे बढ़ती हैं, तो इससे न केवल उनका अपना परिवार बल्कि पूरा समाज सशक्त होता है। आज उनकी यह संघर्षपूर्ण यात्रा उन सभी युवाओं के लिए एक मिसाल है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं और उन्हें हकीकत में बदलने की हिम्मत रखते हैं।

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