भोजपुर में तस्करों के लिए सिरदर्द बनी पूजा
बिहार में लागू शराबबंदी कानून को पूरी तरह सफल बनाने के लिए प्रशासन लगातार नई तकनीक और हथकंडों का इस्तेमाल कर रहा है। इसी कड़ी में भोजपुर जिले के उत्पाद विभाग के पास एक ऐसी साथी मौजूद है, जो तस्करों के मंसूबों को मिट्टी में मिला रही है। यह साथी कोई इंसान नहीं, बल्कि विभाग की प्रशिक्षित खोजी डॉग 'पूजा' है। पूजा की मौजूदगी मात्र से ही शराब माफियाओं में खौफ का माहौल रहता है, क्योंकि उनकी तमाम चालाकियां इस डॉग की सूंघने की अद्भुत क्षमता के आगे फीकी पड़ जाती हैं।
जमीन के नीचे भी नहीं मिलती पनाह
शराब तस्करी करने वाले अपराधी समय के साथ और अधिक शातिर होते जा रहे हैं। वे कानून की पकड़ से बचने के लिए शराब को बेहद सुरक्षित और गुप्त स्थानों पर छिपाते हैं। तस्करों के नए तौर-तरीकों में खेतों में गहरे गड्ढे खोदकर शराब दबाना, घरों के आंगन में तहखाने बनाना, बगीचों की मिट्टी के नीचे बोतलें छिपाना या फिर सुनसान इलाकों में झाड़ियों के बीच शराब का जखीरा छिपाना शामिल है। सामान्य तौर पर पुलिस या अधिकारियों के लिए इन जगहों तक पहुंचना और छिपी हुई शराब को ढूंढ निकालना बेहद मुश्किल होता है, लेकिन 'पूजा' इस काम को बहुत सहजता से पूरा करती है। विभाग के अधिकारी बताते हैं कि कई ऐसे छापे रहे, जहां सामान्य तलाशी में कुछ भी हाथ नहीं लगा, लेकिन पूजा ने अपनी सूंघने की शक्ति से अधिकारियों को सटीक स्थान पर पहुंचने का इशारा किया और खुदाई करने पर अवैध शराब का बड़ा जखीरा बरामद हुआ।
विभाग की सबसे भरोसेमंद सदस्य
भोजपुर के सहायक उत्पाद अधीक्षक पुरषोतम कुमार का कहना है कि आज के समय में पूजा महज एक डॉग नहीं, बल्कि उत्पाद विभाग की सबसे विश्वसनीय और महत्वपूर्ण साथी बन गई है। किसी भी बड़े और महत्वपूर्ण अभियान पर निकलते समय पूजा को साथ ले जाना अब अनिवार्य हो गया है। उसे विशेष प्रशिक्षण दिया गया है ताकि वह शराब की विशिष्ट गंध को लंबी दूरी से भी भांप सके। विभाग द्वारा पूजा की सेहत, उसके नियमित खान-पान और कड़े अभ्यास का पूरा ख्याल रखा जाता है ताकि वह हर वक्त सतर्क और सक्रिय रहे। एक ट्रेंड हैंडलर की निगरानी में वह हर छापे के दौरान अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाती है।
सफलता का नया रिकॉर्ड
पूजा के टीम में शामिल होने के बाद से विभाग की कार्यक्षमता में काफी उछाल आया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले 6 महीना के भीतर विभाग ने पूजा की मदद से 10 हजार लीटर से भी अधिक अवैध शराब बरामद की है। यह सफलता केवल शराब की जब्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि पूजा की मदद से विभाग उन तस्करों के नेटवर्क को तोड़ने में भी कामयाब रहा है जो लंबे समय से पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहे थे। तस्कर चाहे कितनी भी चतुराई क्यों न दिखा लें, पूजा की मौजूदगी में उनकी हर चाल नाकाम हो रही है। यही वजह है कि आज भोजपुर के तस्करों के बीच पूजा का नाम एक बड़े खतरे के रूप में देखा जा रहा है और विभाग के लिए वह आधुनिक तकनीक से कहीं ज्यादा प्रभावी साबित हो रही है।
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