केदारनाथ धाम में तीर्थयात्रियों से बदसलूकी पर प्रशासन सख्त, घोड़ा-खच्चर संचालकों को दी गई कड़ी चेतावनी

उत्तराखंड के केदारनाथ धाम में आने वाले श्रद्धालुओं के साथ दुर्व्यवहार की घटनाओं को प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। रुद्रप्रयाग के डीएम ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों के साथ गलत व्यवहार करने वाले घोड़ा और खच्चर संचालकों के खिलाफ अब कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

केदारनाथ में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन अलर्ट

उत्तराखंड की प्रसिद्ध केदारनाथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के साथ हो रही बदसलूकी के मामलों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में सामने आई शिकायतों के बाद रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए घोड़ा और खच्चर संचालकों के साथ साथ कुलियों को सख्त चेतावनी जारी की है। रुद्रप्रयाग के जिला मजिस्ट्रेट विशाल मिश्रा ने शुक्रवार को इस संबंध में दिशा निर्देश जारी किए। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि तीर्थयात्रियों के साथ किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार या बदतमीजी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों पर कठोर कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य केदारनाथ आने वाले हर श्रद्धालु को एक सुरक्षित, सम्मानजनक और सुखद अनुभव प्रदान करना है।

सुचारू यात्रा में बाधा बनने वालों पर नज़र

जिला मजिस्ट्रेट ने बताया कि केदारनाथ धाम की यात्रा वर्तमान में काफी सुचारू रूप से आगे बढ़ रही है, लेकिन कुछ छिटपुट घटनाओं ने व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। यात्रा के शुरुआती दिनों में ही कुछ घोड़ा और खच्चर संचालकों तथा कुलियों द्वारा तीर्थयात्रियों के प्रति अशोभनीय व्यवहार की शिकायतें प्रशासन तक पहुंची थीं। इस स्थिति को देखते हुए, विशाल मिश्रा ने आदेश दिया है कि सभी संचालकों और कुलियों को अपना अनिवार्य पुलिस सत्यापन करवाना होगा। साथ ही, जिला पंचायत के साथ आधिकारिक पंजीकरण कराना भी अब जरूरी है। यदि कोई भी व्यक्ति इन नियमों का पालन करने में विफल रहता है, तो उसके विरुद्ध तत्काल प्रभाव से कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

नियमों का उल्लंघन करने पर होगी सख्त कार्यवाही

प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट कर दिया गया है कि भविष्य में तीर्थयात्रियों के साथ किसी भी प्रकार की बदसलूकी की शिकायत को गंभीरता से लिया जाएगा। जिला अधिकारी ने जोर देकर कहा कि केदारनाथ मार्ग पर यात्रा करने वाले अधिकांश श्रद्धालु अपनी सुविधा के लिए घोड़ों, खच्चरों और पालकियों का सहारा लेते हैं। ऐसे में इन सेवा प्रदाताओं की यह नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी बनती है कि वे यात्रियों के साथ शालीनता और गरिमा के साथ पेश आएं। पहले भी कई दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है और यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी ताकि यात्रा मार्ग की पवित्रता और सुरक्षा बरकरार रहे।

पंजीकरण और जवाबदेही पर जोर

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक कुली का जिला पंचायत के पास पंजीकरण अनिवार्य है। बिना किसी वैध पंजीकरण के यदि कोई भी व्यक्ति यात्रा मार्ग पर सेवा देते हुए पकड़ा जाता है, तो उसे तत्काल प्रभाव से ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा। साथ ही, ऐसे व्यक्तियों पर भारी आर्थिक जुर्माना लगाने के अलावा अन्य कड़ी कानूनी कार्यवाही भी की जाएगी।

मालिकों की भी बढ़ेगी जिम्मेदारी

जिला मजिस्ट्रेट ने एक महत्वपूर्ण निर्देश में कहा कि यदि कोई पंजीकृत संचालक या फेरीवाला तीर्थयात्रियों के साथ दुर्व्यवहार करता है, तो इसका खामियाजा केवल उसी को नहीं बल्कि उस संबंधित मालिक को भी भुगतना होगा जिसके अधीन वह कार्यरत है। उन्होंने सभी हितधारकों से अपील की है कि वे केदारनाथ यात्रा की गरिमा बनाए रखने में अपना सहयोग दें और यह सुनिश्चित करें कि प्रत्येक श्रद्धालु को यात्रा के हर पड़ाव पर सुरक्षित और सम्मानजनक सेवा मिले।

https://www.indiatv.in/india/national/misbehavior-with-kedarnath-dham-devotees-will-not-be-tolerated-administration-warns-horse-and-mule-operators-2026-07-03-1229011