उदयपुर: सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में 22 नन्हे घड़ियालों की हुई 'किलकारी', सुरक्षा के लिए बनाया खास कवच

उदयपुर के सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में 22 घड़ियालों का जन्म हुआ है। पिछले वर्षों में बच्चों की मृत्यु दर को देखते हुए वन विभाग ने इस बार सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम और एक नया एक्शन प्लान तैयार किया है।

सज्जनगढ़ पार्क में 22 नन्हे मेहमानों का आगमन

उदयपुर के सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क से वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बेहद सुखद खबर सामने आई है। मानसून के आगमन से ठीक पहले, पार्क में घड़ियालों की ब्रीडिंग पूरी तरह सफल रही है, जिससे घड़ियाल परिवार में 22 नन्हे सदस्यों का स्वागत हुआ है। अंडों से निकले ये घड़ियाल अभी अंगूठे के आकार के हैं और लगभग तीन से चार दिन पहले ही दुनिया में आए हैं। ये नन्हे जीव अब पार्क में आने वाले पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।

पिछले अनुभवों से ली सीख

सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में घड़ियालों की सफल ब्रीडिंग का यह लगातार तीसरा वर्ष है। हालांकि, पिछले दो वर्षों का अनुभव थोड़ा निराशाजनक रहा था, क्योंकि जन्म लेने वाले अधिकांश घड़ियाल बच्चों को बचाया नहीं जा सका था। उच्च मृत्यु दर के कारण पिछले वर्षों में वन्यजीव विशेषज्ञों और वन विभाग को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। इस बार विभाग ने बीते वर्षों की गलतियों और अनुभवों से सीख लेते हुए सुरक्षा के तमाम पहलुओं पर विशेष सावधानी बरती है। अधिकारियों का मानना है कि इस बार अपनाए गए नए तौर-तरीकों के चलते बच्चों के जीवित रहने की संभावना काफी प्रबल है।

शिकारी पक्षियों से सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम

नन्हे घड़ियालों की जान को सबसे बड़ा खतरा चील, कौवों और अन्य शिकारी पक्षियों से होता है। इसी खतरे को भांपते हुए वन विभाग ने उनके एनक्लोजर को एक विशेष सुरक्षा मैट से पूरी तरह कवर कर दिया है। यह सुरक्षा कवच किसी भी बाहरी शिकारी को बच्चों तक पहुँचने से रोकता है। इसके अलावा, पार्क के कर्मचारी अब चौबीसों घंटे इनकी निगरानी कर रहे हैं ताकि किसी भी प्रकार का संकट पैदा न हो। फिलहाल, इन बच्चों को डिस्प्ले एरिया में सुरक्षित रखा गया है जहाँ पर्यटक इन्हें देख सकते हैं।

विशेष एक्शन प्लान और परवरिश

सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क के डीएफओ यादवेंद्र सिंह चुंडावत ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इन नन्हे जीवों के संरक्षण के लिए एक विस्तृत एक्शन प्लान तैयार किया गया है। योजना के अनुसार, जन्म के 15 दिन बीत जाने के बाद, इन सभी बच्चों को अलग-अलग सुरक्षित टबों में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य हर एक घड़ियाल की व्यक्तिगत निगरानी करना और उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर बारीकी से नजर रखना है। इनके भोजन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शुरुआती विकास के लिए इन्हें ‘गंगूजा’ नाम की छोटी मछलियां आहार के रूप में दी जा रही हैं। साथ ही, पार्क परिसर के भीतर एक अलग छोटा तालाब बनाया जा रहा है, जहाँ इन्हें पूरी तरह नियंत्रित और सुरक्षित माहौल में बड़ा किया जाएगा।

घड़ियाल संरक्षण की उम्मीदें

बायोलॉजिकल पार्क में वर्तमान में दो मादा और एक नर घड़ियाल हैं, जो बीते करीब 10 वर्षों से यहाँ का मुख्य आकर्षण बने हुए हैं। पिछले साल भी ब्रीडिंग सफल रही थी, लेकिन सुरक्षा और देखभाल में कमी के चलते बच्चे जीवित नहीं बच पाए थे। इस बार वन विभाग ने सुरक्षा, पोषण और निरंतर निगरानी पर अपना पूरा जोर दिया है। वन विभाग के अधिकारियों को पूर्ण विश्वास है कि इस बार अपनाई गई वैज्ञानिक प्रक्रियाएं और अतिरिक्त सावधानियां इन 22 घड़ियालों के जीवन को बचाने में सफल होंगी। यह प्रयास भविष्य में घड़ियाल संरक्षण की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है।

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