अयोध्या में प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कार्रवाई
उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले से एक बड़ी प्रशासनिक खबर सामने आई है, जहां जिला प्रशासन ने सरकारी खजाने के दुरुपयोग और वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों के बीच एक ग्राम प्रधान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। इस फैसले के तहत अयोध्या के जिलाधिकारी ने ग्राम पंचायत गरेली के ग्राम प्रधान राज नारायण को उनके पद से हटा दिया है। प्रशासन का यह कदम न केवल पंचायत स्तर पर हड़कंप मचाने वाला है, बल्कि जिले के अन्य जनप्रतिनिधियों के लिए भी एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।
अनियमितताओं का क्या है पूरा मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत गरेली में विकास कार्यों के लिए आवंटित सरकारी धनराशि का कथित तौर पर गलत उपयोग करने और वित्तीय नियमों की अनदेखी किए जाने की शिकायतें जिला मुख्यालय तक पहुंची थीं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने मामले की प्रारंभिक जांच के निर्देश दिए थे। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और साक्ष्यों ने प्रथम दृष्टया आरोपों को पुष्ट किया, जिसके बाद जिला प्रशासन ने त्वरित निर्णय लेते हुए संबंधित प्रधान को प्रशासक के पद से मुक्त कर दिया।
प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों पर रोक
जिलाधिकारी द्वारा जारी किए गए आदेश के तहत राज नारायण के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसका अर्थ यह है कि अब संबंधित प्रधान पंचायत के किसी भी सरकारी बैंक खाते का संचालन करने, चेक पर हस्ताक्षर करने या किसी भी तरह के प्रशासनिक नीतिगत निर्णय लेने में सक्षम नहीं होंगे। उन्हें पंचायत के कामकाज से पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया है ताकि जांच प्रक्रिया प्रभावित न हो सके।
एडीओ पंचायत को मिली कमान
प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया है कि ग्राम पंचायत के विकास कार्य और जनहित की योजनाएं प्रभावित न हों। इसके लिए एडीओ पंचायत, पूरा बाजार को अब उस पंचायत का प्रशासक नियुक्त किया गया है। अब से पंचायत के सभी विकास कार्यों का निष्पादन, सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन और अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियां एडीओ पंचायत की सीधी निगरानी में संपन्न की जाएंगी। इस कदम का उद्देश्य आम ग्रामीणों को होने वाली समस्याओं से बचाना और सरकारी कामकाज को पारदर्शी बनाना है।
भविष्य की जांच और कार्रवाई
प्रशासनिक अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि वर्तमान में की गई यह कार्रवाई एक प्रारंभिक जांच पर आधारित है। फिलहाल विस्तृत जांच की प्रक्रिया जारी है। यदि अंतिम जांच रिपोर्ट में ग्राम प्रधान के खिलाफ लगे आरोप सिद्ध होते हैं, तो प्रशासन उनके विरुद्ध कानूनी और अन्य दंडात्मक कार्रवाई करने में भी संकोच नहीं करेगा। वहीं, यदि जांच के बाद वे निर्दोष पाए जाते हैं, तो नियमों के दायरे में रहकर ही आगे का फैसला लिया जाएगा।
पंचायतों में पारदर्शिता की प्राथमिकता
जिला प्रशासन ने साफ शब्दों में कहा है कि पंचायतों में सरकारी धन का एक एक रुपया पूरी पारदर्शिता के साथ खर्च होना चाहिए। सरकार की प्राथमिकता यह है कि आम जनता के कल्याण के लिए भेजा गया बजट सही हाथों में पहुंचे और सही जगह इस्तेमाल हो। यदि जिले की किसी भी अन्य ग्राम पंचायत से ऐसी वित्तीय अनियमितताओं या सरकारी धन के दुरुपयोग की शिकायत मिलती है, तो प्रशासन इसी तरह की सख्त प्रशासनिक सख्ती अपनाएगा। इस घटना के बाद से ही जिले की अन्य पंचायतों के जनप्रतिनिधियों में चर्चाएं तेज हो गई हैं कि प्रशासन अब भ्रष्टाचार के मामलों में शून्य सहनशीलता की नीति अपना रहा है।
https://hindi.news18.com/news/uttar-pradesh/ayodhya-ayodhya-dm-action-gram-pradhan-removed-administrator-post-local18-10625842.html