छत्तीसगढ़ का 'नागलोक': मानसून आते ही जशपुर में बढ़ा सांपों का खौफ, झाड़-फूंक का अंधविश्वास ले रहा लोगों की जान

छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में बारिश का मौसम शुरू होते ही जहरीले सांपों का खतरा बढ़ गया है, जहां अस्पतालों में इलाज के बजाय झाड़-फूंक के अंधविश्वास में लोग अपनी जान गंवा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ का जशपुर जिला इन दिनों एक बार फिर चर्चा में है। मानसून की दस्तक के साथ ही इस पूरे इलाके में डर और दहशत का माहौल बनने लगा है। इस क्षेत्र को पूरे देश में 'नागलोक' के नाम से जाना जाता है। जैसे ही आसमान से पानी की बूंदें बरसती हैं, वैसे ही यहां के घने जंगलों और झाड़ियों से जहरीले सांप बाहर आने लगते हैं। इसके बाद शुरू होता है सर्पदंश का एक बेहद चिंताजनक सिलसिला। लेकिन यहां सांपों के डंक से ज्यादा खतरनाक लोगों के दिलों में पैठा अंधविश्वास साबित हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की तमाम कोशिशों के बावजूद लोग सांप के काटने पर अस्पताल जाने के बजाय झाड़-फूंक करने वाले ओझा-गुनियों के चक्कर में फंस रहे हैं, जिससे समय पर इलाज न मिलने के कारण कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है।

क्यों कहलाता है यह इलाका 'नागलोक'?

जशपुर जिले का विशेष भौगोलिक वातावरण सांपों के अनुकूल माना जाता है। खासकर यहां के फरसाबहार और तपकरा क्षेत्र जहरीले सांपों के सबसे बड़े गढ़ माने जाते हैं। यहां के घने और विशाल जंगल, पलाश की घनी झाड़ियां और यहां का ठंडा मौसम सांपों के पनपने और रहने के लिए सबसे उत्तम वातावरण तैयार करते हैं।

जशपुर के जाने-माने सर्प विशेषज्ञ अजय शर्मा के मुताबिक, इस क्षेत्र में सांपों की कई ऐसी प्रजातियां पाई जाती हैं जो बेहद जहरीली और जानलेवा होती हैं। इनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रजातियां शामिल हैं:

  • कोबरा (नाग)
  • कॉमन करैत
  • बैंडेड करैत (अहिराज)
  • बंबू पिट वाइपर
  • रसेल वाइपर

बारिश के दिनों में जब इन सांपों के बिलों में पानी भर जाता है, तो ये सुरक्षित स्थानों की तलाश में बाहर निकलते हैं और अक्सर इंसानी बस्तियों, खेतों तथा घरों तक पहुंच जाते हैं। यही कारण है कि बरसात के महीनों में सर्पदंश के मामले अचानक बहुत तेजी से बढ़ जाते हैं।

अंधविश्वास का जानलेवा जाल और अस्पताल से दूरी

जशपुर जिले में सांपों के जहर से भी ज्यादा जानलेवा यहां का पुराना अंधविश्वास साबित हो रहा है। यहां के ग्रामीण इलाकों में आज भी सर्पदंश के बाद लोग वैज्ञानिक और चिकित्सीय परामर्श लेने के स्थान पर अंधविश्वास की शरण में चले जाते हैं। स्थानीय निवासी रामप्रसाद नाग ने हाल ही में इसी अज्ञानता के कारण अपनी एक बेहद करीबी रिश्तेदार को खो दिया।

रामप्रसाद बताते हैं कि उनकी रिश्तेदार रात के समय जमीन पर सो रही थीं, तभी एक जहरीले सांप ने उन्हें काट लिया। जैसे ही परिजनों को इस बात की भनक लगी, वे घबरा गए। उन्होंने मरीज को तुरंत अस्पताल ले जाने के बजाय घर पर ही झाड़-फूंक शुरू करवा दी और स्थानीय ओझा को बुला लिया। इस अंधविश्वास के खेल में कीमती समय बर्बाद हो गया। जब तक मरीज की हालत बहुत ज्यादा बिगड़ने पर उसे अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया गया, तब तक काफी देर हो चुकी थी। मरीज ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया। इस दर्दनाक घटना से टूटे रामप्रसाद अब लोगों से लगातार यह अपील कर रहे हैं कि वे ऐसी गलती न दोहराएं और सांप के काटने पर किसी भी तरह की झाड़-फूंक या घरेलू नुस्खों के जाल में न फंसे।

समय पर इलाज से बची रमेशवर की जान

अंधविश्वास की इन दर्दनाक कहानियों के बीच कुछ ऐसी भी कहानियां हैं जो यह साबित करती हैं कि जागरूकता और समय पर लिया गया सही निर्णय जिंदगी बचा सकता है। क्षेत्र के ही रहने वाले रमेशवर नाग इसकी एक जीती-जागती मिसाल हैं।

रमेशवर जब अपने खेत में कृषि कार्य कर रहे थे, तभी अचानक एक जहरीले सांप ने उन्हें काट लिया। लेकिन रमेशवर ने बिना कोई समय गंवाए और बिना किसी झाड़-फूंक के चक्कर में पड़े, सीधे पत्थलगांव सिविल अस्पताल जाने का साहसिक निर्णय लिया। अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने बिना किसी देरी के उन्हें एंटी स्नेक वेनम (ASV) का इंजेक्शन दिया। डॉक्टरों की त्वरित कार्रवाई और सही समय पर मिली दवा की बदौलत रमेशवर की जान पूरी तरह बच गई। रमेशवर अब दूसरों को समझाते हैं कि सांप काटने के बाद का हर एक मिनट बहुत कीमती होता है, और उस समय की गई थोड़ी सी भी देरी मौत का कारण बन सकती है।

क्या कहते हैं स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े?

जशपुर जिले में सर्पदंश की गंभीरता का अंदाजा जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जीएस जात्रा द्वारा साझा किए गए आंकड़ों से आसानी से लगाया जा सकता है। ये आंकड़े सचमुच चौंकाने वाले और डराने वाले हैं:

  • पिछले वर्ष जशपुर जिले में सर्पदंश के कुल 642 मामले दर्ज किए गए थे।
  • इन मामलों में समय पर सही इलाज न मिल पाने या देरी होने के कारण 12 लोगों की मौत हो गई थी।
  • इस चालू वर्ष में, केवल अप्रैल महीने से लेकर अब तक सर्पदंश के 119 नए मामले सामने आ चुके हैं।
  • इस साल अब तक कुल 5 लोग इस जहरीले दंश के कारण अपनी जान गंवा चुके हैं।

स्वास्थ्य विभाग की तैयारी और जनता से विशेष अपील

इन लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग भी पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जीएस जात्रा ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि जिले के अंतर्गत आने वाले सभी छोटे-बड़े स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम (ASV) पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध करा दिया गया है। विभाग ने सभी डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं कि जैसे ही कोई सर्पदंश का मरीज अस्पताल पहुंचे, बिना किसी औपचारिकता के उसका इलाज तुरंत शुरू किया जाए।

इसके साथ ही, स्वास्थ्य विभाग ने आम जनता से यह पुरजोर अपील की है कि:

  • सांप काटने की स्थिति में बिल्कुल भी न घबराएं और शांत रहें।
  • पीड़ित व्यक्ति को ज्यादा हिलने-डुलने न दें, ताकि शरीर में जहर का फैलाव धीमा रहे।
  • किसी भी तरह के घरेलू नुस्खे, जड़ी-बूटी या झाड़-फूंक के चक्कर में पड़कर बहुमूल्य समय को नष्ट न करें।
  • पीड़ित को जल्द से जल्द पास के सरकारी अस्पताल या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में लेकर जाएं, क्योंकि सही समय पर एंटी स्नेक वेनम मिलना ही जान बचाने का एकमात्र वैज्ञानिक और सुरक्षित तरीका है।

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