सागर में डॉक्टरों का फूटा गुस्सा
मध्य प्रदेश के सागर जिले स्थित बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां अस्पताल में अपनी ड्यूटी कर रही एक महिला जूनियर डॉक्टर के साथ न केवल अभद्रता की गई, बल्कि छेड़छाड़ और उन्हें जान से मारने की धमकी देने का भी गंभीर आरोप लगा है। यह घटना गुरुवार रात की है, जिसके बाद अस्पताल परिसर में तनाव का माहौल बन गया। घटना के विरोध में जूनियर डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य चिकित्सा कर्मियों ने अपना काम ठप कर दिया और जोरदार प्रदर्शन किया।
क्या था पूरा विवाद
मिली जानकारी के अनुसार, गुरुवार देर रात भाजपा नेता अनिल पीपरा अपने कुछ सहयोगियों के साथ एक मरीज को इलाज के लिए बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे थे। इसी दौरान इलाज की प्रक्रिया को लेकर उनकी वहां ड्यूटी पर तैनात महिला जूनियर डॉक्टर के साथ तीखी बहस हो गई। आरोप है कि बहस के दौरान स्थिति बिगड़ गई और डॉक्टर के साथ छेड़छाड़ की गई। महिला डॉक्टर का यह भी कहना है कि जब उन्होंने इसका विरोध किया, तो आरोपी ने बड़े राजनीतिक रसूख का रौब दिखाते हुए उन्हें धमकाया। इतना ही नहीं, आरोपी ने सरेआम डॉक्टर को गोली मारने की धमकी तक दे डाली। इस घटना के बाद से अस्पताल के स्वास्थ्य कर्मियों में भारी आक्रोश फैल गया।
सड़कों पर उतरे स्वास्थ्य कर्मी
शुक्रवार सुबह होते ही विरोध प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया। जूनियर डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ समेत अस्पताल के तमाम कर्मचारियों ने काम बंद कर दिया। प्रदर्शनकारी डॉक्टर अस्पताल परिसर से बाहर निकल आए और उन्होंने सड़क पर बैठकर चक्काजाम कर दिया। उनकी मुख्य मांग थी कि आरोपी को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि अस्पताल में जान बचाने वाले डॉक्टर और नर्स ही सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो वे मरीजों का उपचार कैसे करेंगे। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग दोहराई।
पुलिस की कार्रवाई और आश्वासन
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आया। गोपालगंज थाने में भाजपा नेता अनिल पीपरा और उनके एक साथी के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। इस मामले पर जानकारी देते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नरेंद्र सोलंकी ने बताया कि शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और मामले की जांच के लिए एक विशेष टीम का गठन किया गया है।
पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी डॉक्टरों से मुलाकात की और उन्हें निष्पक्ष जांच तथा आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी का ठोस आश्वासन दिया। पुलिस की समझाइश और कार्रवाई के भरोसे के बाद स्वास्थ्य कर्मियों ने अपना धरना और हड़ताल खत्म की। फिलहाल पुलिस का दावा है कि आरोपियों को पकड़ने के लिए तलाशी जारी है और जल्द ही उन्हें पुलिस हिरासत में ले लिया जाएगा। अस्पताल में अभी स्थिति सामान्य बनी हुई है और स्वास्थ्य सेवाएं बहाल कर दी गई हैं, लेकिन इस घटना ने चिकित्सा क्षेत्र की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
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