मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का सोठी आश्रम दौरा
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हाल ही में छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के सोठी में स्थित भारतीय कुष्ठ निवारक संघ आश्रम का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने आश्रम की ओर से कुष्ठ रोगियों के लिए किए जा रहे स्वास्थ्य सुधार और पुनर्वास कार्यों की सराहना करते हुए इसे मानवता का प्रतीक बताया। मुख्यमंत्री ने वहां की व्यवस्थाओं को नजदीक से देखा और संस्था द्वारा चलाए जा रहे सामाजिक सरोकार के कार्यों की जानकारी ली।
कुष्ठ रोगियों के लिए आशा की किरण बना सोठी आश्रम
भारत में कुष्ठ रोग के मामलों में समय के साथ गिरावट जरूर आई है, लेकिन इस बीमारी से जुड़ा सामाजिक कलंक और प्रभावित लोगों के पुनर्वास की चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। बीमारी ठीक होने के बाद भी कई लोग समाज में उपेक्षा और दूरी का सामना करते हैं। ऐसी स्थिति में जांजगीर-चांपा जिले का सोठी स्थित भारतीय कुष्ठ निवारक संघ आश्रम एक प्रेरणादायक मॉडल के तौर पर उभरकर सामने आया है। यह स्थान न केवल मरीजों का इलाज करता है, बल्कि उन्हें एक गरिमापूर्ण और आत्मनिर्भर जीवन जीने का अवसर भी प्रदान करता है।
आश्रम का छह दशक पुराना गौरवशाली इतिहास
यह संस्था लगभग 60 साल से अधिक पुरानी है। इसकी स्थापना 5 अप्रैल 1962 को समाजसेवी स्वर्गीय सदाशिव गोविंद कात्रे द्वारा की गई थी, जो स्वयं कुष्ठ रोग से प्रभावित थे। उनके जीवन का उद्देश्य ऐसे लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना था जो बीमारी के कारण बहिष्कृत महसूस करते थे। आज यह आश्रम केवल एक उपचार केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक पुनर्वास का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है, जहां सहानुभूति से ऊपर उठकर रोगियों के सम्मान पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।
अस्पताल और मरीजों के लिए सुविधाएं
आश्रम परिसर में एक 20 बिस्तरों वाला अस्पताल संचालित है, जहाँ कुष्ठ रोगियों और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को पूरी तरह से मुफ्त उपचार दिया जाता है। यहां न केवल दवाएं और ड्रेसिंग की सुविधा उपलब्ध है, बल्कि भोजन, कपड़े और आवास का भी पूरा ख्याल रखा जाता है। इसके अलावा मरीजों की जांच के लिए लैब और एक्स-रे जैसी आधुनिक सुविधाएं भी मौजूद हैं। यदि किसी मरीज को गंभीर उपचार की आवश्यकता होती है, तो उन्हें बड़े अस्पतालों में रेफर किया जाता है। वर्तमान में इस आश्रम में 75 मरीज निवासरत हैं, जिनकी देखभाल के लिए करीब 120 समर्पित कार्यकर्ता जुटे हुए हैं।
आत्मनिर्भरता की दिशा में विशेष कौशल प्रशिक्षण
यह संस्था मरीजों को इलाज के बाद अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए विशेष कौशल प्रशिक्षण भी देती है। यहां के निवासियों को विभिन्न तरह के काम सिखाए जाते हैं, ताकि वे अपनी आजीविका कमा सकें। इसमें प्रमुख रूप से खेती, बागवानी, चॉक बनाना, कालीन निर्माण, रस्सी निर्माण, सिलाई और वेल्डिंग जैसे कार्य शामिल हैं। इसके अलावा मरीजों को कंप्यूटर चलाने का प्रशिक्षण और ड्राइविंग का हुनर भी सिखाया जा रहा है। आश्रम प्रशासन मरीजों के बच्चों की शिक्षा पर भी पूरा ध्यान देता है।
स्वास्थ्य शिविर और मोतियाबिंद ऑपरेशन
संस्थान द्वारा समय-समय पर स्वास्थ्य और नेत्र जांच शिविरों का आयोजन किया जाता है। अब तक यहां 10,000 से अधिक मोतियाबिंद के ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं। हाल ही में आयोजित एक स्वास्थ्य शिविर में 300 से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई। इस दौरान कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के प्रति लोगों को जागरूक करने का कार्य भी किया गया।
मुख्यमंत्री के विचार और मानवीय विकास का मॉडल
आश्रम परिसर में स्थित संत गुरु घासीदास चिकित्सालय का निरीक्षण करने के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि कुष्ठ रोग केवल एक शारीरिक बीमारी नहीं है, बल्कि यह भेदभाव का कारण भी बनती है। उन्होंने आश्रम को मानवता, सेवा और करुणा का वास्तविक तीर्थ करार दिया। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि किसी भी व्यक्ति को आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने योग्य बनाना समाज का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है। सोठी का यह आश्रम न केवल छत्तीसगढ़ के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक ऐसा मॉडल है जहां स्वास्थ्य सेवाएं और सामाजिक न्याय एक साथ चलते हैं। यह साबित करता है कि समाज की सच्ची प्रगति तब होती है जब उसके सबसे वंचित और उपेक्षित लोगों को संबल और आत्मनिर्भरता प्रदान की जाती है।
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