बच्चा है दुबला-पतला? डॉक्टर के इस 10 रुपये वाले देसी नुस्खे से घर पर ही बनाएं महा-पौष्टिक प्रोटीन पाउडर

अगर आपका बच्चा शारीरिक रूप से कमजोर है और वह अंडा या मछली जैसी चीजें नहीं खाता, तो महंगे बाजारू सप्लीमेंट्स के बजाय रामपुर के डॉक्टर के इस बेहद सस्ते और असरदार घरेलू नुस्खे को आजमाएं।

कमजोर बच्चों के लिए वरदान है यह देसी नुस्खा

अक्सर माता-पिता अपने बच्चों के शारीरिक विकास और उनके दुबले-पतले शरीर को लेकर चिंतित रहते हैं। कई बार बच्चे खाने-पीने में बहुत आनाकानी करते हैं, जिससे उनके शरीर को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते। यदि बच्चा शाकाहारी है और मछली या अंडा जैसी चीजें नहीं खाता, तो माता-पिता परेशान होकर बाजार में मिलने वाले महंगे सप्लीमेंट्स की तरफ भागते हैं। लेकिन अब आपको इन डिब्बाबंद उत्पादों पर अपनी गाढ़ी कमाई खर्च करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉ. मोहम्मद इकबाल ने एक ऐसा आसान और बेहद सस्ता उपाय साझा किया है, जिससे आप मात्र 10 रुपये के खर्च में घर की रसोई में मौजूद चीजों से ही एक बेहतरीन प्रोटीन पाउडर तैयार कर सकते हैं। यह 'देसी प्रोटीन पाउडर' न केवल बच्चों की सेहत में सुधार लाएगा, बल्कि उनके कुपोषण को दूर करने में भी बेहद मददगार साबित होगा।

घर पर देसी प्रोटीन पाउडर बनाने की आसान विधि

डॉक्टर मोहम्मद इकबाल के अनुसार, इस पौष्टिक मिश्रण को बनाने के लिए आपको बाजार से कोई महंगी सामग्री खरीदने की जरूरत नहीं है। आपकी रसोई में उपलब्ध केवल चार साधारण चीजों की मदद से इसे आसानी से तैयार किया जा सकता है। इसे बनाने की विधि बेहद सरल है:

  • सबसे पहले भुना चना, दलिया और मूंगफली को समान मात्रा में ले लें।
  • इन तीनों सामग्रियों को एक कड़ाही में डालकर हल्का सा भून (रोस्ट) लें ताकि उनकी नमी पूरी तरह से समाप्त हो जाए।
  • भूनने के बाद इन्हें पूरी तरह से ठंडा होने दें और फिर मिक्सी में पीसकर एक बारीक पाउडर तैयार कर लें।
  • इस तैयार पाउडर में स्वाद और अतिरिक्त पोषण के लिए बारीक पिसा हुआ गुड़ मिला दें।
  • इस पूरे मिश्रण को अच्छी तरह मिलाकर एक साफ और सूखे एयरटाइट डिब्बे में सुरक्षित रख लें ताकि यह लंबे समय तक खराब न हो।

जानिए बच्चों को इसे खिलाने का सही तरीका

इस घरेलू प्रोटीन सप्लीमेंट को बच्चों के आहार में शामिल करना बेहद आसान है। डॉ. इकबाल बताते हैं कि बच्चों को उनकी उम्र और शारीरिक आवश्यकता के अनुसार ही इसकी मात्रा दी जानी चाहिए। इस पाउडर को आप निम्नलिखित तरीकों से बच्चों को खिला सकते हैं:

  • इसे हल्के गर्म दूध में मिलाकर बच्चे को पीने के लिए दिया जा सकता है।
  • दलिया, सूजी की खीर या किसी अन्य मीठे व्यंजन में ऊपर से मिलाकर खिलाया जा सकता है।
  • रोटी बनाते समय आटे में भी इस पाउडर को थोड़ी मात्रा में गूंथा जा सकता है।
  • इसे हल्के नाश्ते के रूप में सीधे भी चम्मच से खिलाया जा सकता है।

हालांकि, डॉक्टर ने यह भी स्पष्ट किया है कि बच्चे को इसकी कितनी मात्रा देनी है, यह उसकी उम्र और शारीरिक जरूरत पर निर्भर करता है, इसलिए मात्रा का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

रसोई की इन चार चीजों में छिपा है सेहत का राज

आखिर यह देसी पाउडर इतना असरदार क्यों है? विशेषज्ञ बताते हैं कि इस मिश्रण में शामिल चारों सामग्रियों के अपने विशेष चमत्कारी गुण और स्वास्थ्य लाभ हैं:

  • भुना चना: चने को प्रोटीन का एक बहुत बड़ा और सुलभ स्रोत माना जाता है। यह बच्चों की मांसपेशियों के विकास में सीधे सहायता करता है।
  • मूंगफली: मूंगफली में प्रोटीन के साथ-साथ 'हेल्दी फैट्स' यानी स्वस्थ वसा भरपूर मात्रा में पाई जाती है। यह बच्चों को दिनभर सक्रिय रखने के लिए आवश्यक ऊर्जा प्रदान करती है।
  • दलिया: दलिया फाइबर और कार्बोहाइड्रेट का एक उत्कृष्ट जरिया है। इससे बच्चों का पाचन तंत्र तंदुरुस्त रहता है और उन्हें लंबे समय तक ऊर्जा मिलती रहती है।
  • गुड़: गुड़ न केवल इस पाउडर का स्वाद बढ़ाता है, बल्कि इसमें आयरन और कई अन्य खनिज तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो बच्चों में खून की कमी को दूर करने में मदद करते हैं।

कुपोषण के इन लक्षणों को कभी न करें नजरअंदाज

शारीरिक कमजोरी या कुपोषण केवल वजन कम होने तक ही सीमित नहीं है। डॉ. इकबाल का कहना है कि माता-पिता को बच्चों के व्यवहार और शारीरिक बदलावों पर पैनी नजर रखनी चाहिए। कुपोषण के कुछ मुख्य लक्षण इस प्रकार हो सकते हैं:

  • बच्चे का बार-बार बीमार पड़ना या बार-बार संक्रमण की चपेट में आना।
  • उम्र के हिसाब से बच्चे की लंबाई और वजन का न बढ़ना।
  • बच्चे में हमेशा सुस्ती, थकान या ऊर्जा की भारी कमी दिखाई देना।
  • बच्चे का हमेशा सुस्त रहना और खेलकूद में रुचि न लेना।

डॉक्टर के मुताबिक, केवल कोई एक चीज खिलाने से कुपोषण का समाधान नहीं हो सकता। बच्चों के समग्र विकास के लिए उन्हें हमेशा एक संतुलित आहार देना चाहिए। इसके साथ ही घर और आसपास की साफ-सफाई, समय पर आवश्यक टीकाकरण और आवश्यकता पड़ने पर योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना भी बेहद जरूरी है।

गंभीर स्थितियों में चिकित्सीय सलाह है अनिवार्य

यद्यपि यह देसी प्रोटीन पाउडर बच्चों की सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है, लेकिन डॉ. इकबाल ने एक महत्वपूर्ण चेतावनी भी दी है। उनका कहना है कि जिन बच्चों का वजन सामान्य से बहुत ज्यादा कम है या जिनमें कुपोषण के गंभीर लक्षण दिखाई दे रहे हैं, उन्हें केवल घरेलू नुस्खों के भरोसे नहीं रखा जाना चाहिए।

ऐसे बच्चों को तुरंत अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या सरकारी पोषण पुनर्वास केंद्र में ले जाना चाहिए। वहां डॉक्टरों की देखरेख में बच्चे की उचित जांच की जाती है और उन्हें आवश्यक चिकित्सा उपचार व विशेष पोषण प्रदान किया जाता है ताकि उनकी स्थिति में तेजी से सुधार हो सके।

महंगे सप्लीमेंट्स का एक बेहतरीन और सुरक्षित विकल्प

आज के समय में बाजार में उपलब्ध डिब्बाबंद प्रोटीन सप्लीमेंट्स न केवल बहुत महंगे होते हैं, बल्कि उनमें कई तरह के प्रिजर्वेटिव्स और कृत्रिम मिठास भी मिली होती है, जो बच्चों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसे में, यदि आपका बच्चा अंडा, मछली या मांस का सेवन नहीं करता है, तो यह घर का बना देसी प्रोटीन पाउडर एक बेहतरीन, सुरक्षित और प्राकृतिक विकल्प साबित हो सकता है।

कम लागत, आसानी से तैयार होने की प्रक्रिया और घर की रसोई में हमेशा उपलब्ध रहने वाली सामग्रियों से बनने के कारण यह उपाय गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकता है। हालांकि, ध्यान रखें कि यह पाउडर किसी दवा का विकल्प नहीं है, बल्कि इसे बच्चों के नियमित संतुलित खानपान के एक पूरक हिस्से के रूप में ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

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