जौनपुर के डॉ. राजेश कुमार बने दिव्यांगों की उम्मीद, पिछले 10 वर्षों से संवार रहे हैं जिंदगियां

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. राजेश कुमार पिछले एक दशक से दिव्यांगजनों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान के लिए समर्पित होकर समाज में बदलाव की नई अलख जगा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में मानवता की सेवा की एक अनूठी मिसाल देखने को मिल रही है। यहां के डॉ. राजेश कुमार पिछले लगभग एक दशक से समाज के वंचित और दिव्यांग वर्ग के जीवन में उजियारा फैलाने का काम कर रहे हैं। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत डॉ. राजेश कुमार अध्यापन के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों से भी गहराई से जुड़े हुए हैं। उनके इस निस्वार्थ सेवा भाव ने उन्हें क्षेत्र के लोगों के बीच एक वास्तविक नायक के रूप में स्थापित कर दिया है।

वर्ष 2016 में लिया था सेवा का अटूट संकल्प

डॉ. राजेश कुमार के इस सेवा अभियान की शुरुआत आज से करीब दस साल पहले हुई थी। उन्होंने वर्ष 2016 में औपचारिक रूप से दिव्यांगजनों की मदद करने का संकल्प लिया था। शुरुआत में यह प्रयास बेहद छोटे स्तर पर था, जहां उन्होंने कुछ जरूरतमंद दिव्यांग बच्चों और वयस्कों की निजी तौर पर सहायता करनी शुरू की थी। लेकिन समय के साथ उनके इस नेक प्रयास ने एक बड़े और व्यवस्थित अभियान का रूप अख्तियार कर लिया है।

मौजूदा समय में डॉ. राजेश कुमार लगभग 25 दिव्यांगजनों की नियमित रूप से जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इस सहायता कार्यक्रम के तहत वे इन लोगों की शिक्षा से लेकर उनके स्वास्थ्य और दैनिक जीवन की अन्य जरूरतों को पूरा करने में सहयोग प्रदान करते हैं।

शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वावलंबन पर विशेष जोर

डॉ. राजेश कुमार का यह सेवा कार्य केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है। वे दिव्यांगजनों के सर्वांगीण विकास के लिए बहुआयामी प्रयास कर रहे हैं। उनके इस अभियान में निम्नलिखित महत्वपूर्ण पहलू शामिल हैं:

  • शिक्षा की व्यवस्था: दिव्यांग बच्चों को स्कूलों और कॉलेजों में दाखिला दिलाने से लेकर उनकी पढ़ाई का खर्च उठाना और उन्हें शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराना।
  • स्वास्थ्य और चिकित्सा: बीमार दिव्यांगों के लिए मुफ्त दवाइयों का प्रबंध करना और आवश्यकतानुसार डॉक्टरों से उनका इलाज करवाना।
  • सहायक उपकरण: चलने-फिरने या दैनिक कार्यों में असमर्थ दिव्यांगों के लिए व्हीलचेयर, बैसाखी और अन्य आवश्यक उपकरण उपलब्ध करवाना।
  • सामाजिक सम्मान: समाज में दिव्यांगजनों के प्रति दृष्टिकोण में बदलाव लाना और उन्हें मुख्यधारा का हिस्सा महसूस कराना।

व्यस्त दिनचर्या के बावजूद निभा रहे हैं अपनी जिम्मेदारी

पूर्वांचल विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर जैसी महत्वपूर्ण और व्यस्त जिम्मेदारी संभालने के बावजूद डॉ. राजेश कुमार कभी भी अपने इस सामाजिक दायित्व से पीछे नहीं हटते। वे अपने शैक्षणिक कार्यों से समय निकालकर नियमित रूप से इन दिव्यांगजनों के पास जाते हैं, उनसे सीधे संवाद करते हैं और उनकी व्यक्तिगत समस्याओं को विस्तार से सुनते हैं।

उनका दृढ़ विश्वास है कि दिव्यांगजन समाज का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और अभिन्न अंग हैं। उन्हें केवल सहानुभूति की नहीं, बल्कि समान अवसरों और सम्मान की आवश्यकता है। डॉ. राजेश कुमार का मानना है कि हर सक्षम नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह समाज के इस वर्ग को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें मुख्यधारा में जोड़ने के लिए आगे आए।

समाज को दे रहे हैं प्रेरणादायक संदेश

डॉ. राजेश कुमार अकेले ही इस पथ पर नहीं चल रहे हैं, बल्कि उनकी इस पहल से प्रेरित होकर समाज के कई अन्य लोग भी इस पुनीत कार्य से जुड़ने लगे हैं। वे लोगों को इस अभियान से जोड़कर जरूरतमंदों तक सीधे मदद पहुंचाने का माध्यम बन रहे हैं। उनके इस निस्वार्थ भाव और निरंतर प्रयासों की वजह से पूरे जौनपुर जिले में उनकी जमकर सराहना की जा रही है।

स्थानीय लोग उन्हें सिर्फ एक शिक्षक नहीं, बल्कि समाज का एक असली नायक मानते हैं। डॉ. राजेश कुमार की यह कहानी हमें यह सीख देती है कि यदि समाज का हर व्यक्ति अपने व्यस्त जीवन से थोड़ा सा समय निकालकर दूसरों की मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाए, तो हम एक बेहद संवेदनशील और प्रगतिशील समाज का निर्माण कर सकते हैं।

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