राजस्थान की कोचिंग सिटी और औद्योगिक केंद्र के रूप में प्रसिद्ध कोटा शहर के निवासियों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। यदि आप भी अपने मकान का पट्टा बनवाने, संपत्ति का नाम ट्रांसफर यानी नाम हस्तांतरण कराने या फिर भू-उपयोग परिवर्तन (लैंड यूज चेंज) जैसे आवश्यक कार्यों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं, तो अब आपको इस परेशानी से हमेशा के लिए मुक्ति मिलने वाली है। कोटा विकास प्राधिकरण (केडीए) ने नागरिकों की इन तमाम समस्याओं का एक ही छत के नीचे समाधान करने के लिए एक विशेष पहल शुरू की है।
कोटा विकास प्राधिकरण परिसर में इन दिनों एक विशेष शहरी सेवा शिविर का आयोजन किया जा रहा है। इस शिविर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ आने वाले आम नागरिकों के सभी महत्वपूर्ण कार्य बेहद सुगमता और तेजी के साथ पूरे किए जा रहे हैं। इस पूरे लोकहितकारी अभियान की कमान कोटा विकास प्राधिकरण के आयुक्त और अतिरिक्त नोडल अधिकारी हर्षित वर्मा स्वयं संभाल रहे हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि इस विशेष अभियान का एकमात्र और मुख्य उद्देश्य आम लोगों को बिना किसी लालफीताशाही या परेशानी के तुरंत राहत पहुंचाना है। इस पारदर्शी व्यवस्था के लागू होने से केडीए परिसर में सक्रिय रहने वाले बिचौलियों और दलालों की भूमिका पूरी तरह से समाप्त हो गई है, जिससे सीधे तौर पर आम जनता के समय और धन दोनों की बचत हो रही है।
केडीए परिसर बना वन-स्टॉप सॉल्यूशन, ई-मित्र केंद्र से मिली राहत
कोटा विकास प्राधिकरण ने आम जनता की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए अपने परिसर को एक वन-स्टॉप सॉल्यूशन के रूप में विकसित किया है। इससे पहले स्थिति यह थी कि लोगों को आवेदन करने के लिए स्टांप पेपर खरीदने किसी अन्य स्थान पर जाना पड़ता था, नोटरी के काम के लिए अलग दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे और फिर ऑनलाइन फॉर्म भरवाने के लिए साइबर कैफे या ई-मित्र केंद्रों की खोज करनी पड़ती थी। इन सब अलग-अलग प्रक्रियाओं में लोगों का न केवल बहुत सारा समय बर्बाद होता था, बल्कि उन्हें अतिरिक्त आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता था।
नागरिकों की इसी पीड़ा को समझते हुए प्रशासन ने अब कोटा विकास प्राधिकरण परिसर के भीतर ही अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस नए ई-मित्र केंद्र स्थापित कर दिए हैं। इसके साथ ही परिसर के अंदर ही अधिकृत स्टांप वेंडरों को भी बैठाया गया है। अब कोई भी आवेदक सीधे परिसर में आकर स्टांप पेपर खरीदने से लेकर नोटरी कराने और ई-मित्र के माध्यम से अपना ऑनलाइन फॉर्म जमा करने तक का सारा काम एक ही स्थान पर बेहद आसानी से पूरा कर सकता है। इस समन्वित प्रयास से पूरी प्रक्रिया बेहद सरल और पारदर्शी बन गई है।
पट्टा बनवाने के लिए नियमों में मिली भारी ढील, पुराने दस्तावेजों की जरूरत नहीं
सरकारी प्रक्रियाओं में अक्सर देखा जाता है कि लोग दशकों पुराने दस्तावेज जुटाने में ही परेशान रहते हैं। लेकिन इस बार कोटा विकास प्राधिकरण ने नियमों को बेहद लचीला और जन-अनुकूल बनाया है। अब पट्टे के आवेदन के लिए नागरिकों को सालों पुराने कागजात ढूंढने की कोई आवश्यकता नहीं है। यदि आपके पास निम्नलिखित में से कोई भी एक वैध दस्तावेज उपलब्ध है, तो आप आसानी से पट्टे के लिए अपनी पात्रता साबित कर सकते हैं और आवेदन कर सकते हैं:
- वर्ष 2021 का बिजली बिल या पानी का बिल
- भारत सरकार या राज्य सरकार द्वारा जारी कोई भी वैध पहचान पत्र, जैसे आधार कार्ड
- मतदाता पहचान पत्र (वोटर आईडी कार्ड)
इन सरल और न्यूनतम दस्तावेजों के आधार पर ही प्राधिकरण द्वारा पट्टे जारी करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। इस ऐतिहासिक सरलीकरण से उन हजारों परिवारों को सीधा लाभ मिल रहा है जो सालों से अपने आशियाने के मालिकाना हक यानी पट्टे के लिए परेशान थे।
हर सप्ताह सोमवार से शुक्रवार तक आयोजित हो रहा है विशेष शिविर
आम जनता की सुविधा और बढ़ती मांग को देखते हुए यह विशेष सेवा शिविर किसी एक या दो दिनों की अल्पावधि के लिए नहीं रखा गया है। कोटा विकास प्राधिकरण द्वारा इस विशेष शिविर का आयोजन प्रत्येक सप्ताह सोमवार से शुक्रवार तक नियमित रूप से किया जा रहा है। इस नियमितता का सबसे बड़ा फायदा यह है कि लोगों को किसी खास दिन की भीड़भाड़ का सामना नहीं करना पड़ता और वे अपनी सुविधानुसार कार्यदिवसों में यहाँ पहुँच सकते हैं। इसके अलावा, राज्य सरकार की ओर से विभिन्न शुल्कों और लीज डीड पर दी जा रही भारी छूट का लाभ उठाने के लिए हर दिन सैकड़ों की संख्या में लोग इस शिविर का रुख कर रहे हैं।
आंकड़ों की जुबानी: योजना की शानदार सफलता और भारी राजस्व प्राप्ति
कोटा विकास प्राधिकरण की इस नई, पारदर्शी और अत्यंत सरल व्यवस्था का सकारात्मक असर अब जमीनी स्तर पर भी साफ नजर आने लगा है। इस शिविर की शुरुआत से लेकर अब तक के आंकड़े इसकी बड़ी सफलता की कहानी खुद बयां कर रहे हैं:
- शिविर के प्रारंभ होने से लेकर अब तक विभिन्न नागरिक सेवाओं के लिए 2,700 से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं।
- इन प्राप्त आवेदनों में सबसे बड़ी संख्या मकानों के पट्टे बनवाने वाले आवेदकों की है, जिसके लिए लगभग 1,200 से अधिक आवेदन दर्ज किए गए हैं।
- प्राधिकरण ने तत्परता दिखाते हुए इनमें से 1,000 से अधिक पट्टे तैयार करके सीधे उनके असली मालिकों को सौंप भी दिए हैं, जबकि बचे हुए अन्य आवेदनों के दस्तावेजों का सत्यापन कार्य युद्ध स्तर पर जारी है।
- राज्य सरकार द्वारा लीज डीड और बकाया करों में दी जा रही विशेष छूट के कारण लोग बढ़-चढ़कर इस योजना में अपनी भागीदारी दर्ज करा रहे हैं।
- इस भारी जनभागीदारी के परिणामस्वरूप कोटा विकास प्राधिकरण को अब तक कुल 5 करोड़ रुपये का शानदार राजस्व प्राप्त हो चुका है।
प्राधिकरण अधिकारियों का कहना है कि शिविर के जरिए प्राप्त इस भारी-भगकम राजस्व राशि का उपयोग आने वाले समय में कोटा शहर के विकास कार्यों, सड़कों के सुदृढ़ीकरण और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को मजबूत बनाने में किया जाएगा। यदि आपका भी पट्टा बनवाने, नाम ट्रांसफर कराने या लैंड यूज चेंज से संबंधित कोई भी कार्य लंबे समय से अटका हुआ है, तो बिना किसी देरी के आप भी किसी भी कार्यदिवस में कोटा विकास प्राधिकरण कार्यालय पहुंचकर सरकार की इस कल्याणकारी योजना और दी जा रही छूट का भरपूर लाभ उठा सकते हैं।
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