36 साल पुरानी परंपरा पर लगा विराम
बिहार की राजधानी पटना से एक बड़ा प्रशासनिक और सामाजिक बदलाव सामने आया है। पटना के ऐतिहासिक कोतवाली थाना परिसर में पिछले करीब 36 वर्षों से चली आ रही जुमे की नमाज की परंपरा अब हमेशा के लिए समाप्त हो गई है। पुलिस प्रशासन और स्थानीय मस्जिद प्रबंधन समिति के बीच हुई एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद यह ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। आपसी सहमति से लिए गए इस फैसले के बाद अब थाना परिसर के भीतर जुमे के दिन नमाज अदा नहीं की जाएगी। इस नए नियम का असर भी बीते शुक्रवार को साफ तौर पर देखने को मिला, जब लंबे समय के बाद पहली बार कोतवाली थाना परिसर में शुक्रवार की नमाज का आयोजन नहीं किया गया।
इस वजह से लिया गया फैसला
इस पूरे मामले की शुरुआत बिहार सरकार के लोक शिकायत निवारण प्रणाली यानी RTMS पोर्टल पर दर्ज कराई गई एक ऑनलाइन शिकायत से हुई थी। पटना के ही रहने वाले एक जागरूक नागरिक ने इस पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का कहना था कि हर हफ्ते जुमे यानी शुक्रवार के दिन कोतवाली थाना परिसर में नमाज का आयोजन किया जाता है, जिसके कारण बड़ी संख्या में लोग वहां एकत्रित होते हैं। इस वजह से पुलिस के दैनिक और नियमित कामकाज में बाधा उत्पन्न होती है। इसके साथ ही थाने की प्रशासनिक गतिविधियों पर भी इसका सीधा असर पड़ता है। शिकायत में यह भी कहा गया था कि सुरक्षा और प्रशासनिक दृष्टिकोण से पुलिस थाने के परिसर में इस तरह के धार्मिक आयोजन नियमित रूप से नहीं होने चाहिए।
पुलिस प्रशासन और मस्जिद कमेटी के बीच हुई बैठक
शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई और वरिष्ठ अधिकारियों ने इस पूरे मामले की नए सिरे से समीक्षा की। समीक्षा के बाद मामले को संवेदनशीलता से सुलझाने के लिए एक बैठक बुलाई गई। इस बैठक में पुलिस विभाग की ओर से ASP (लॉ एंड ऑर्डर) और कोतवाली थाना के प्रभारी यानी SHO शामिल हुए। दूसरी तरफ, कोतवाली मस्जिद प्रबंधन समिति के तमाम वरिष्ठ पदाधिकारियों को भी इस बैठक में आमंत्रित किया गया था। बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने स्थिति की गंभीरता और थाने की सुरक्षा व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की। दोनों पक्षों ने माना कि पुलिस थाने की सुरक्षा और वहां आने वाले आम लोगों की सुविधा सर्वोपरि है। काफी विचार-विमर्श के बाद दोनों पक्षों के बीच यह आपसी सहमति बनी कि कानून-व्यवस्था और पुलिस के सुचारू कामकाज को बनाए रखने के लिए अब से थाना परिसर के अंदर जुमे की नमाज का आयोजन नहीं किया जाएगा।
स्थानीय लोगों और मस्जिद कमेटी की प्रतिक्रिया
स्थानीय सूत्रों और पुराने निवासियों के मुताबिक, कोतवाली थाना परिसर में स्थित मस्जिद में लगभग 36 सालों से लगातार जुमे की नमाज अदा की जा रही थी। यह एक ऐसी व्यवस्था बन चुकी थी जो दशकों से बिना किसी बाधा के चली आ रही थी। हर शुक्रवार को आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में नमाजी यहां पहुंचते थे। अचानक इस व्यवस्था में हुए बदलाव को लेकर मस्जिद कमेटी ने बेहद परिपक्व और सकारात्मक रुख अपनाया है।
कोतवाली मस्जिद कमेटी के सक्रिय सदस्य अरमान अजीज ने इस पूरे फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पुलिस प्रशासन के साथ हुई बैठक में बहुत ही सौहार्दपूर्ण माहौल में बातचीत हुई। उन्होंने स्पष्ट किया कि समिति प्रशासन के इस निर्णय का पूरी तरह से सम्मान करती है। अरमान अजीज ने कहा कि उनका उद्देश्य हमेशा से समाज में शांति और भाईचारा बनाए रखना रहा है, इसलिए वे भविष्य में भी कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ रखने में प्रशासन का पूरा सहयोग करेंगे।
वर्तमान स्थिति और प्रशासनिक रुख
हालांकि इस पूरे मामले पर अभी तक पुलिस प्रशासन की ओर से कोई लंबा आधिकारिक या लिखित बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन धरातल पर इस फैसले को पूरी तरह लागू कर दिया गया है। थाना परिसर में जुमे की नमाज पर लगी यह रोक अब स्थाई रूप से लागू रहेगी और आने वाले समय में भी इसी नई व्यवस्था के बने रहने की पूरी संभावना है। प्रशासन का मानना है कि इस कदम से जहां एक ओर थाने की सुरक्षा मजबूत होगी, वहीं दूसरी ओर पुलिसकर्मियों को बिना किसी व्यवधान के अपनी ड्यूटी करने में मदद मिलेगी।
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