CAG की नौकरी छोड़ बनीं IPS, अब लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश कर चर्चा में आईं किरन यादव; जानें पूरी कहानी

चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की नौकरी छोड़कर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में शामिल होने वाली किरन यादव ने लखनऊ में एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पुलिस ने हाल ही में साइबर ठगी के एक बड़े अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसके तार देश से लेकर विदेशों तक जुड़े हुए हैं। गोमती नगर स्थित चर्चित समिट बिल्डिंग में चल रहे एक अवैध और फर्जी कॉल सेंटर पर क्राइम ब्रांच और कई थानों की संयुक्त पुलिस टीम ने देर रात बड़ी छापेमारी की। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से कुल 119 लोगों को हिरासत में लिया है, जिनमें 92 युवक और 27 युवतियां शामिल हैं।

इस पूरी कार्रवाई का नेतृत्व लखनऊ की अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (ADCP) अपराध, आईपीएस किरन यादव ने किया। इस बड़ी सफलता के बाद से ही वह पूरे प्रदेश की पुलिसिंग और मीडिया में चर्चा का मुख्य विषय बनी हुई हैं। पुलिस की इस छापेमारी के दौरान बरामद की गई सामग्री की सूची इस प्रकार है:

  • 100 लैपटॉप और कई पर्सनल कंप्यूटर
  • 178 मोबाइल फोन और कई सिम कार्ड
  • अनेक हार्ड डिस्क और अन्य डिजिटल उपकरण

कौन हैं आईपीएस किरन यादव?

किरन यादव भारतीय पुलिस सेवा (IPS) की 2021 बैच की उत्तर प्रदेश कैडर की अधिकारी हैं। वर्तमान में वह लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट में अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (ADCP) अपराध के रूप में तैनात हैं। वह अपराधियों और विशेष रूप से साइबर ठगों के खिलाफ अपनी कड़ी और त्वरित कार्रवाइयों के लिए जानी जाती हैं। लखनऊ के इस अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर मामले को राज्य में हाल के वर्षों की सबसे बड़ी साइबर अपराध विरोधी कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है।

सफलता की शैक्षणिक और व्यावसायिक यात्रा

किरन यादव की शैक्षणिक पृष्ठभूमि बेहद मजबूत रही है, जिसने उन्हें जीवन के हर पड़ाव पर अव्वल बनाए रखा। उनकी शैक्षणिक और व्यावसायिक योग्यता की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  • उन्होंने बी.कॉम (ऑनर्स) की डिग्री हासिल की और इसके साथ ही ई-कॉमर्स विषय में भी शिक्षा प्राप्त की।
  • उन्होंने कठिन मानी जाने वाली चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) की परीक्षा पास की और एक सीए के रूप में खुद को स्थापित किया।
  • सिविल सेवा में आने से पहले वह पंजाब में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) कार्यालय में ऑडिटर के पद पर कार्यरत थीं।
  • प्रशासनिक सेवा के अपने सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने नौकरी के साथ तैयारी की और वर्ष 2020 की UPSC परीक्षा में पूरे देश में 392वीं रैंक हासिल की।

UPSC में सफलता प्राप्त करने के बाद उन्हें भारतीय पुलिस सेवा (IPS) आवंटित की गई। उन्होंने 5 दिसंबर 2021 को आधिकारिक तौर पर सेवा जॉइन की और हैदराबाद की सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में अपना प्रशिक्षण पूरा किया।

पारिवारिक पृष्ठभूमि और सुल्तानपुर से जुड़ाव

किरन यादव का जन्म 3 मई 1987 को हुआ था। वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के मोतिगरपुर क्षेत्र की निवासी हैं। हालांकि, उनके पिता की नौकरी चंडीगढ़ में होने के कारण उनका परिवार लंबे समय तक पंजाब के एसएएस नगर मोहाली में रहा। उनके परिवार ने उनकी सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है:

  • पिता शत्रुघ्न सिंह यादव: वह एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर के रूप में कार्यरत रहे और हमेशा अपनी बेटी की शिक्षा और सपनों का समर्थन किया।
  • मां मंजू यादव: वह एक कुशल गृहिणी हैं, जिन्होंने बच्चों को अनुशासित और संस्कारवान बनाने में योगदान दिया।
  • भाई सूरज यादव: वह कनाडा की एक प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय कंपनी में नैनो साइंस में उच्च शिक्षा प्राप्त कर इंजीनियर के रूप में कार्यरत हैं।

करियर और विभिन्न पदों पर तैनाती

हैदराबाद से प्रशिक्षण पूरा होने के बाद किरन यादव को उत्तर प्रदेश कैडर मिला। उनकी शुरुआती तैनाती लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट में सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) के पद पर हुई थी। इस दौरान उन्होंने कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा और स्थानीय स्तर के अपराधों पर नियंत्रण स्थापित कर अपनी प्रशासनिक क्षमता का परिचय दिया। उनकी शानदार कार्यशैली को देखते हुए सरकार ने उन्हें पदोन्नत कर अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (ADCP) अपराध की जिम्मेदारी दी। वह 19 मार्च 2025 से इस महत्वपूर्ण पद पर कार्य कर रही हैं और इससे पहले 1 जनवरी 2025 को उन्हें पुलिस विभाग का वरिष्ठ वेतनमान (Senior Scale) भी प्राप्त हो चुका है।

कैसे किया अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी का खुलासा?

लखनऊ पुलिस को इनपुट मिला था कि समिट बिल्डिंग में एक अवैध कॉल सेंटर चलाया जा रहा है जो विदेशों में रहने वाले लोगों को तकनीकी और बैंकिंग समस्याओं का डर दिखाकर उनसे पैसे वसूल रहा है। इस सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए एडीजीपी अपराध किरन यादव ने पुलिस टीम के साथ वहां छापेमारी की।

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि यह गिरोह मुख्य रूप से अमेरिकी नागरिकों को अपना शिकार बनाता था। गिरोह के सदस्य खुद को तकनीकी सहायता एजेंट, बैंक अधिकारी और प्रसिद्ध कंपनियों के कस्टमर केयर प्रतिनिधि बताकर लोगों से संपर्क करते थे। इसके बाद वे विभिन्न बहानों से नागरिकों को विश्वास में लेकर उनके बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट से पैसे उड़ा लेते थे।

शुरुआती पुलिस जांच से संकेत मिले हैं कि यह बेहद संगठित नेटवर्क रोजाना करीब 35 से 40 लाख रुपये की साइबर ठगी को अंजाम देता था। वर्तमान में पुलिस टीम और अन्य वित्तीय जांच एजेंसियां इस नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय संपर्कों, विदेशी बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट और हवाला लेनदेन के रिकॉर्ड्स को खंगाल रही हैं ताकि इस रैकेट के पीछे काम करने वाले मुख्य सरगनाओं को कानून के दायरे में लाया जा सके।

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