आलिया भट्ट को ट्रोलिंग से क्यों नहीं बचाते पिता महेश भट्ट? फिल्ममेकर ने दिया बेहद व्यावहारिक जवाब

फिल्ममेकर महेश भट्ट ने अपनी बेटी आलिया भट्ट को सोशल मीडिया पर मिलने वाली आलोचना और ट्रोलिंग को लेकर खुलकर बात की है। उनका मानना है कि जरूरत से ज्यादा सुरक्षा बच्चों को कमजोर बना देती है।

बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री आलिया भट्ट इन दिनों अपनी हालिया रिलीज फिल्म 'अल्फा' को लेकर लगातार चर्चा में बनी हुई हैं। इस फिल्म में उनके साथ शरवरी वाघ, बॉबी देओल और अनिल कपूर जैसे शानदार कलाकार मुख्य भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। फिल्म के प्रचार के सिलसिले में आलिया भट्ट हाल ही में मशहूर स्टैंड-अप कॉमेडियन समय रैना के बेहद लोकप्रिय शो 'इंडियाज गॉट लेटेंट 2' में पहुंची थीं। इस शो में शिरकत करने के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर काफी आलोचना और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा। इससे पहले साल 2026 के प्रसिद्ध कान्स फिल्म फेस्टिवल के दौरान भी आलिया भट्ट इंटरनेट यूजर्स के निशाने पर आई थीं। अब इन तमाम विवादों और ट्रोलिंग पर आलिया भट्ट के पिता और हिंदी सिनेमा के दिग्गज फिल्ममेकर महेश भट्ट ने अपनी चुप्पी तोड़ी है और एक बेहद व्यावहारिक नजरिया पेश किया है।

प्रसिद्धि की कीमत और आलोचना का सामना

एक हालिया बातचीत में महेश भट्ट ने अपनी बेटी आलिया भट्ट के स्टारडम और उनके साथ जुड़ी नकारात्मकता पर खुलकर बात की। महेश भट्ट का मानना है कि मनोरंजन जगत में प्रसिद्धि यानी स्टारडम के साथ-साथ आलोचना और नफरत का आना भी बिल्कुल स्वाभाविक है। यही वजह है कि वे अपनी बेटी आलिया को कभी भी इस तरह की ट्रोलिंग या नकारात्मक टिप्पणियों से बचाने का प्रयास नहीं करते हैं। दिग्गज फिल्ममेकर का साफ तौर पर मानना है कि इंसानी जिंदगी ही सबसे बड़ी पाठशाला है और हर व्यक्ति को अपने खुद के अनुभवों से ही आगे बढ़ना और सीखना चाहिए।

महेश भट्ट क्यों नहीं देते अपने बच्चों को कोई सलाह?

हिंदुस्तान टाइम्स को दिए गए अपने एक विशेष इंटरव्यू में महेश भट्ट ने बच्चों के पालन-पोषण और उनके जीवन के फैसलों को लेकर अपनी राय साझा की। उन्होंने कहा:

मैं अपने बच्चों को कभी कोई सलाह नहीं देता। वे आज के इस आधुनिक दौर में मुझसे कहीं अधिक समझदार और जागरूक हैं। वे आज की दुनिया की बारीकियों को और इसके तौर-तरीकों को मुझसे बेहतर तरीके से समझते हैं। वे जिंदगी के अपने अनुभवों से ही सबक सीखेंगे, क्योंकि जीवन से बड़ा कोई दूसरा शिक्षक नहीं होता।

अति-सुरक्षा बच्चों को बना देती है कमजोर

महेश भट्ट का मानना है कि माता-पिता द्वारा बच्चों को हर मुसीबत से बचाकर रखना या अत्यधिक सुरक्षा प्रदान करना उनके व्यक्तिगत विकास में बाधा बन सकता है। उन्होंने कहा कि यदि माता-पिता हर समय अपने बच्चों की ढाल बनकर उनके सामने खड़े रहेंगे, तो बच्चे वास्तविक दुनिया की कठिन चुनौतियों का डटकर सामना करना कभी नहीं सीख पाएंगे।

अपनी इस बात को बेहद खूबसूरती से समझाते हुए महेश भट्ट ने एक व्यावहारिक उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा:

शोहरत की अपनी एक निश्चित कीमत होती है, जिसे हर किसी को चुकाना ही पड़ता है। यदि आप चिलचिलाती धूप में जाकर खड़े होंगे, तो लाजमी है कि वह धूप आपको थोड़ा झुलसाएगी भी। प्रसिद्धि और लोकप्रियता का भी बिल्कुल यही स्वाभाविक परिणाम है। फिल्मी सितारों के जीवन में आलोचना और प्रशंसा दोनों ही उनके पेशे का एक अनिवार्य हिस्सा हैं, जिससे किसी भी सूरत में बचा नहीं जा सकता।

बदलते समय के साथ बदलती पीढ़ी का सफर

जाने-माने फिल्ममेकर ने आगे स्पष्ट किया कि वे अपने निजी जीवन के अनुभवों या सीख को जबरन अपने बच्चों पर थोपना पसंद नहीं करते। उनका कहना है कि हर एक पीढ़ी का अपना एक अलग समय होता है और परिस्थितियां लगातार बदलती रहती हैं। आज की आधुनिक दुनिया उस दौर से काफी अलग हो चुकी है जिसमें उन्होंने काम किया था। इसलिए नई पीढ़ी को अपने जीवन के फैसले खुद ही लेने की पूरी आजादी होनी चाहिए।

महेश भट्ट के अनुसार, माता-पिता की भूमिका केवल सही मार्गदर्शन देने तक ही सीमित होनी चाहिए। वे अपने बच्चों के जीवन को पूरी तरह से नियंत्रित नहीं कर सकते क्योंकि दोनों पीढ़ियों की जिंदगी का सफर बिल्कुल अलग होता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि माता-पिता को कभी भी अपने बच्चों से यह उम्मीद नहीं रखनी चाहिए कि वे उनके अनुभवों को अपनी जिंदगी में उसी रूप में लागू करेंगे। समय चक्र हमेशा घूमता रहता है, इसलिए बच्चों को अपनी गलतियों और अपनी सफलताओं, दोनों से खुद सीखने का पूरा मौका दिया जाना बेहद जरूरी है।

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