मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लोकायुक्त पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए नापतौल विभाग के भीतर चल रहे भ्रष्टाचार के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। लोकायुक्त की टीम ने जाल बिछाकर विभाग के एक सेवानिवृत्त निरीक्षक (रिटायर्ड इंस्पेक्टर) को 1 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई भोपाल के एमपी नगर क्षेत्र में की गई। आरोप है कि यह पूरी अवैध वसूली नापतौल विभाग के प्रभारी डिप्टी कंट्रोलर के इशारे पर की जा रही थी। लोकायुक्त पुलिस ने इस मामले में सेवानिवृत्त निरीक्षक के साथ-साथ प्रभारी डिप्टी कंट्रोलर को भी मुख्य आरोपी बनाया है और मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
पेट्रोल पंप के सील नोजल को खोलने के एवज में मांगी थी घूस
यह पूरा मामला भोपाल के एमपी नगर जोन-2 में स्थित प्रगति पेट्रोल पंप से जुड़ा हुआ है। मिली जानकारी के अनुसार, नापतौल विभाग की एक टीम ने कुछ समय पहले इस पेट्रोल पंप का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान विभाग के अधिकारियों ने दावा किया कि पंप की मशीनों से प्रति लीटर 1 से 5 मिलीलीटर तक कम पेट्रोल निकल रहा है। इस आधार पर विभाग ने पेट्रोल पंप के तीन नोजल को सील कर दिया था।
इसके बाद, पेट्रोल पंप के संचालक अमित सिंह बघेल ने पेट्रोल वितरण प्रणाली की जांच करने वाली कंपनी के अधिकृत तकनीकी अधिकारी से इन नोजल की दोबारा जांच करवाई। अधिकृत जांच में पाया गया कि नोजल बिल्कुल सही काम कर रहे थे और उनमें किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं थी। इसके बावजूद, नापतौल विभाग के अधिकारियों ने पेट्रोल पंप पर दर्ज मामले को रफा-दफा करने और सील किए गए नोजल की दोबारा स्टैंपिंग करके उन्हें चालू करने के लिए भारी-भरकम राशि की मांग की। विभाग की ओर से इस काम के लिए 4 लाख रुपये की घूस मांगी गई थी, लेकिन बाद में बातचीत के दौरान सौदा 3.50 लाख रुपये में तय हुआ।
लोकायुक्त की जाल में ऐसे फंसा रिटायर्ड अधिकारी
विभाग की इस मनमानी और अवैध वसूली से परेशान होकर पेट्रोल पंप संचालक अमित सिंह बघेल ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कदम उठाने का फैसला किया। उन्होंने 24 जून को लोकायुक्त SP सुनील पाटीदार से मिलकर मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत की सत्यता की पुष्टि करने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ने के लिए एक सुनियोजित जाल बिछाया।
तय रणनीति के अनुसार, रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 1 लाख रुपये दिए जाने थे। आरोपियों ने फरियादी को पैसे देने के लिए अलग-अलग ठिकानों पर बुलाया। लोकायुक्त टीम लगातार इस पूरी गतिविधि पर नजर रखे हुए थी। इस ट्रैप ऑपरेशन को कुछ इस तरह अंजाम दिया गया:
- फरियादी अमित सिंह बघेल को सबसे पहले भोपाल के प्रसिद्ध मनोहर डेयरी पर बुलाया गया।
- इसके बाद आरोपियों ने अपना ठिकाना बदला और फरियादी को बोर्ड ऑफिस के पास आने का निर्देश दिया।
- अंततः, फरियादी को इंडियन कॉफी हाउस के पास बुलाया गया, जहां कार के भीतर जैसे ही 1 लाख रुपये की पहली किस्त रखी गई, लोकायुक्त टीम हरकत में आ गई।
- लोकायुक्त के DSP अजय मिश्रा और उनकी टीम ने घेराबंदी कर सेवानिवृत्त निरीक्षक हरिप्रसाद पटेल को रिश्वत की रकम के साथ धर दबोचा।
प्रभारी डिप्टी कंट्रोलर के इशारे पर सक्रिय था रिटायर्ड अफसर
लोकायुक्त की प्रारंभिक पूछताछ और जांच में यह बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि इस पूरे वसूली रैकेट का असली सूत्रधार नापतौल विभाग का प्रभारी डिप्टी कंट्रोलर नसीमुद्दीन है। नसीमुद्दीन का मूल पद सीनियर इंस्पेक्टर का है, लेकिन वर्तमान में वह भोपाल जोन के प्रभारी डिप्टी कंट्रोलर के रूप में कार्यरत है।
जांच में सामने आया कि नसीमुद्दीन बेहद शातिर तरीके से इस अवैध खेल को अंजाम दे रहा था। वह कभी भी रिश्वत के पैसे सीधे अपने हाथों में नहीं लेता था। वह फरियादी को अलग-अलग जगहों पर बुलाता था और सौदेबाजी की रकम को हाथ से छूने के बजाय कागज पर लिखकर दिखाता था। बात तय होने के तुरंत बाद वह उस कागज को नष्ट कर देता था ताकि रिश्वत मांगने का कोई लिखित या ऑडियो-वीडियो सबूत न बच सके।
इस अवैध काम को सुरक्षित तरीके से अंजाम देने के लिए उसने साल 2023 में विभाग से सेवानिवृत्त हो चुके निरीक्षक हरिप्रसाद पटेल को अपना मोहरा बनाया था। हरिप्रसाद पटेल सेवानिवृत्त होने के बाद भी नापतौल विभाग के कार्यालय में पूरी तरह सक्रिय रहते थे और नसीमुद्दीन के लिए फील्ड से अवैध वसूली का काम संभालते थे। लोकायुक्त पुलिस ने जाल बिछाकर हरिप्रसाद पटेल को तो दबोच ही लिया है, साथ ही जेके रोड स्थित विभागीय कार्यालय पर दबिश देकर नसीमुद्दीन को भी इस भ्रष्टाचार कांड का मुख्य आरोपी बनाया है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद से पूरे नापतौल विभाग में हड़कंप मचा हुआ है और लोकायुक्त पुलिस अब इनके अन्य कारनामों की भी फाइलें खंगाल रही है।
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