कहते हैं कि जब मन में सच्ची श्रद्धा और अटूट विश्वास हो, तो न तो शरीर की ढलती उम्र कोई बाधा बन पाती है और न ही रास्ते की कठिन परिस्थितियां राह रोक सकती हैं। कुछ ऐसा ही अनोखा उदाहरण पेश किया है हरियाणा के अंबाला छावनी के रहने वाले 66 वर्षीय बुजुर्ग हरीश गोयल ने। बाबा बर्फानी के प्रति उनकी दीवानगी और अगाध आस्था इस कदर है कि वह बढ़ती उम्र और शारीरिक चुनौतियों को दरकिनार कर एक बार फिर बाबा अमरनाथ के दर्शनों के लिए निकल पड़े हैं। पिछले 15 सालों से बाबा के दरबार में नियमित रूप से अपनी हाजिरी लगाने वाले हरीश गोयल के लिए यह यात्रा केवल एक धार्मिक औपचारिकता नहीं, बल्कि उनके जीवन की सबसे बड़ी साधना और शिव के प्रति संपूर्ण समर्पण का प्रतीक बन चुकी है। इस बार वह अपनी लगातार 25वीं अमरनाथ यात्रा पर निकले हैं, जिसे वह अपनी प्रिय मोटरसाइकिल से पूरा करेंगे। लगभग 700 किलोमीटर का यह लंबा, घुमावदार और दुर्गम पहाड़ी रास्ता उनकी आस्था के सामने बेहद छोटा नजर आता है।
धूमधाम से शुरू हुई यात्रा: सजी-धजी मोटरसाइकिल बनी आकर्षण का केंद्र
हरीश गोयल अंबाला छावनी के कबीर नगर इलाके के निवासी हैं। अपनी इस पावन और कठिन यात्रा की शुरुआत करने के लिए उन्होंने सबसे पहले हाथी खाना स्थित ऐतिहासिक कैलाश मंदिर का रुख किया। वहां उन्होंने अत्यंत श्रद्धापूर्वक भगवान भोलेनाथ की विशेष पूजा-अर्चनो की और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। जब वह मंदिर में पूजा समाप्त कर अपनी मोटरसाइकिल पर सवार होकर रवाना हुए, तो वहां मौजूद सैकड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ ने "हर-हर महादेव" और "बम-बम भोले" के गगनभेदी जयघोष के साथ उन्हें विदा किया।
इस यात्रा में हरीश गोयल की टीवीएस मोटरसाइकिल हर किसी के लिए भारी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। उन्होंने अपनी इस मोटरसाइकिल को बेहद अनूठे और कलात्मक ढंग से सजाया है। बाइक के आगे के हिस्से पर भगवान शिव का एक छोटा सा सुंदर मंदिर स्थापित किया गया है, जिसमें संपूर्ण शिव परिवार की अत्यंत मनमोहक प्रतिमा विराजमान है। पूरी मोटरसाइकिल को रंग-बिरंगी और टिमटिमाती लाइटों से सजाया गया है। इसके अलावा, बाइक पर एक छोटा साउंड सिस्टम भी लगाया गया है, जिससे निकलने वाले मधुर शिव भजनों की गूंज पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देती है।
अकेले सफर पर निकले हरीश, बोले: 'बाबा की राह पर कोई अकेला नहीं होता'
इस अनोखी शिवभक्ति यात्रा के बारे में विशेष बातचीत करते हुए हरीश गोयल ने बताया कि जब तक उनकी मोटरसाइकिल पर भगवान भोलेनाथ का नाम अंकित रहता है और कानों में शिव भजन गूंजते रहते हैं, तब तक उन्हें रास्ते की थकान का बिल्कुल भी अहसास नहीं होता। बचपन से ही उनके मन में बाबा अमरनाथ के प्रति गहरी आस्था रही है। पिछले करीब 25 वर्षों से वे लगातार कभी स्कूटर तो कभी मोटरसाइकिल के जरिए अमरनाथ की यात्रा करते आ रहे हैं।
उन्होंने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि एक समय था जब उनके साथ 25 से 30 अन्य श्रद्धालुओं का एक बड़ा जत्था भी अपनी-अपनी मोटरसाइकिलों पर सवार होकर इस यात्रा पर जाता था। हालांकि, समय के साथ परिस्थितियां बदलीं और इस बार वह अकेले ही बाबा के दरबार के लिए रवाना हुए हैं। लेकिन हरीश के चेहरे पर अकेलेपन का कोई डर या शिकन नहीं है। उनका दृढ़ विश्वास है कि बाबा बर्फानी की राह पर चलने वाला इंसान कभी भी अकेला नहीं होता। भले ही बाहरी दुनिया को वह अकेले दिखाई दे रहे हों, लेकिन उन्हें हर क्षण यह महसूस होता है कि स्वयं भगवान शिव अदृश्य रूप से उनके साथ चल रहे हैं और पग-पग पर उनकी यात्रा का मार्गदर्शन कर रहे हैं।
महंगाई बढ़ी और उम्र भी, मगर नहीं डिगा हौसला
सफर के खर्चों और बदलते वक्त के बारे में बात करते हुए हरीश गोयल के चेहरे पर एक शांत मुस्कान तैर जाती है। वह बताते हैं कि इस पूरी यात्रा में आने-जाने के दौरान पेट्रोल पर लगभग चार हजार रुपये का खर्च आता है। हालांकि, रहने और खाने-पीने की कोई चिंता नहीं होती क्योंकि पूरे मार्ग में विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं द्वारा श्रद्धालुओं के लिए भोजन और ठहरने के बेहतरीन तथा निःशुल्क प्रबंध किए जाते हैं।
वह पुरानी यादों को ताजा करते हुए कहते हैं कि जब उन्होंने पहली बार अमरनाथ की यात्रा शुरू की थी, तब देश में पेट्रोल की कीमत महज 16 रुपये प्रति लीटर हुआ करती थी। आज वक्त पूरी तरह बदल चुका है, महंगाई आसमान छू रही है और पेट्रोल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर से भी अधिक हो चुकी है। सालों बीतने के साथ-साथ उनकी उम्र भी 66 वर्ष हो गई है, लेकिन इन सबके बावजूद बाबा बर्फानी के प्रति उनकी श्रद्धा और भक्ति में तनिक भी कमी नहीं आई है। उनका संकल्प है कि जब तक उनका शरीर साथ देगा, वह इसी तरह हर साल बाबा अमरनाथ के चरणों में अपनी हाजिरी लगाने आते रहेंगे। उनका मानना है कि सच्ची आस्था मनुष्य को हर सांसारिक कठिनाई और शारीरिक दुर्बलता से लड़ने की असीम शक्ति प्रदान करती है।
केवल अमरनाथ नहीं, देश के कई तीर्थों की कर चुके हैं यात्रा
हरीश गोयल की बाइक यात्रा केवल अमरनाथ तक ही सीमित नहीं है। वह अपनी इस वफादार मोटरसाइकिल पर सवार होकर देश के कोने-कोने में स्थित कई विख्यात और पौराणिक तीर्थ स्थलों के दर्शन कर चुके हैं। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- राजस्थान के प्रसिद्ध बाबा खाटू श्याम का दरबार
- असम में स्थित मां कामाख्या देवी का पवित्र मंदिर
- प्रयागराज महाकुंभ के दौरान होने वाला शाही स्नान
उनका मानना है कि तीर्थ यात्राएं केवल भगवान के दर्शन करने का माध्यम नहीं होतीं, बल्कि ये इंसान को मानसिक और आत्मिक शांति प्रदान करती हैं। इसके जरिए जीवन को एक नई सकारात्मक दिशा और ऊर्जा मिलती है, जो रोजमर्रा की जिंदगी की कठिनाइयों से उबरने में मदद करती है।
अमरनाथ यात्रा के दौरान दिखने वाला भाईचारा है असली भारत की पहचान
हरीश गोयल ने अमरनाथ यात्रा के एक बेहद खूबसूरत और मानवीय पहलू को साझा किया। उन्होंने बताया कि इस यात्रा की सबसे बड़ी और अनोखी विशेषता वह आपसी भाईचारा है, जो रास्ते में देखने को मिलता है। यात्रा के दौरान कश्मीर घाटी में स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोग अमरनाथ यात्रियों और श्रद्धालुओं की सेवा में पूरी निष्ठा और आदर के साथ जुटे रहते हैं।
कोई श्रद्धालु को पानी पिलाता है, कोई बड़े आदर से भोजन कराता है, तो कोई कठिन रास्तों पर आगे बढ़ने का मार्ग बताता है। यदि कोई यात्री मुसीबत में हो या किसी की गाड़ी खराब हो जाए, तो स्थानीय लोग बिना किसी संकोच के तुरंत मदद के लिए आगे आते हैं। हरीश कहते हैं कि यही हमारे प्यारे भारत की असली संस्कृति और पहचान है, जहां अलग-अलग धर्मों के लोग मिलकर इंसानियत और आपसी प्रेम का संदेश देते हैं। धर्म वास्तव में लोगों को बांटने का नहीं, बल्कि आपस में जोड़ने का काम करता है।
यात्रा का पूरा मार्ग: बाइक से बालटाल और फिर पैदल चढ़ाई
अपनी इस लगभग 700 किलोमीटर लंबी यात्रा के योजनाबद्ध मार्ग के बारे में जानकारी देते हुए हरीश गोयल ने बताया कि वह सबसे पहले अंबाला से रवाना होकर पंजाब के लुधियाना पहुंचेंगे। लुधियाना में कुछ समय विश्राम करने और अपनी ऊर्जा संचित करने के बाद वह केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की ओर अपनी यात्रा आगे बढ़ाएंगे।
वह अपनी मोटरसाइकिल से बालटाल तक का सफर तय करेंगे। इसके बाद, बालटाल बेस कैंप से वह अपनी बाइक को वहीं छोड़ देंगे और पैदल ही बाबा बर्फानी की पवित्र और रहस्यमयी गुफा की ओर कठिन चढ़ाई शुरू करेंगे। इस मुख्य यात्रा के साथ-साथ वह कश्मीर घाटी में स्थित अन्य अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों जैसे श्री शंकराचार्य मंदिर, खीर भवानी मंदिर, शिवखोड़ी और श्रीनगर के कई अन्य प्रसिद्ध मंदिरों में भी दर्शन-पूजन करेंगे और देश की खुशहाली तथा शांति की प्रार्थना करेंगे।
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