अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल के भीतर कुख्यात दस्यु जगन गुर्जर की हत्या की खबर आते ही धौलपुर और चंबल के दुर्गम डांग इलाके में दहशत का वह पुराना दौर फिर से लोगों की यादों में जिंदा हो गया है। एक समय था जब इस पूरे क्षेत्र में जगन गुर्जर का सिक्का चलता था और उसका नाम सुनते ही गांवों में सन्नाटा पसर जाता था। स्थानीय लोगों के बीच आज भी उसके खौफ की कहानियां सुनी और सुनाई जाती हैं।
कर्मचारियों और ठेकेदारों में था खौफ
डांग क्षेत्र में काम करने वाले सरकारी कर्मचारी हों, ठेकेदार हों या फिर पुलिसकर्मी, सभी जगन गुर्जर के नाम से थर-थर कांपते थे। इलाके में यह बात बेहद आम थी कि डांग क्षेत्र में किसी भी तरह का काम शुरू करने से पहले जगन गुर्जर की रजामंदी लेना जरूरी माना जाता था। कर्मचारियों को अक्सर "लिस्ट लेकर आना... नहीं तो खैर नहीं" जैसी सीधी धमकियां दी जाती थीं, जिसके चलते लोग वहां ड्यूटी करने से भी कतराते थे।
मुखबिरों का शक और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
जगन गुर्जर को हमेशा अपने आस-पास मुखबिरों की मौजूदगी का शक सताता रहता था। वह किसी पर भी आसानी से भरोसा नहीं करता था। वर्ष 2004-05 में एक ग्रामीण को धमकाने और उस पर फायरिंग करने की घटना इतनी गंभीर हो गई थी कि प्रशासन को वहां सुरक्षा के लिए विशेष रूप से एक RAC चौकी स्थापित करनी पड़ी थी। इसके अलावा, जगन गुर्जर की पत्नी और पूर्व दस्यु कोमेश गुर्जर से जुड़े कई किस्से भी इस इलाके में आज भी काफी मशहूर हैं।
सैकड़ों मुकदमों के बावजूद बचता रहा जगन
इस खूंखार दस्यु के खिलाफ राजस्थान और मध्यप्रदेश के अलग-अलग थानों में हत्या, अपहरण, रंगदारी, लूट और अवैध हथियार रखने जैसे संगीन अपराधों के कुल 128 मामले दर्ज थे। इतने मुकदमों के बावजूद वह लंबे समय तक कानून की पहुंच से दूर रहने में कामयाब रहा। इसकी सबसे बड़ी वजह चंबल के दुर्गम बीहड़, ऊंची पहाड़ियां और घने जंगल थे, जो जगन के लिए एक मजबूत सुरक्षा ढाल का काम करते थे। पुलिस की टीमें इन बीहड़ों में चाहकर भी उस तक आसानी से नहीं पहुंच पाती थीं। जेल में हुई उसकी हत्या के बाद अब डांग के बीहड़ों से लेकर अपराध जगत तक में उसके पुराने आतंक की चर्चाएं फिर से तेज हो गई हैं।
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