हिमाचल प्रदेश में मॉनसून की आक्रामक दस्तक: तीन दिनों में 11 लोगों की मौत, 60 सड़कें बंद और कई जिलों में भारी तबाही

हिमाचल प्रदेश में मॉनसून के प्रवेश करते ही तबाही का दौर शुरू हो गया है, जहां शुरुआती तीन दिनों में अलग-अलग हादसों में 11 लोगों की मौत हो चुकी है और भारी भूस्खलन व बाढ़ के कारण 60 सड़कें बंद हैं।

शुरुआती बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें: 11 लोगों ने गंवाई जान

हिमाचल प्रदेश में मॉनसून ने कदम रख दिया है, लेकिन इसके साथ ही राज्य में हादसों और तबाही का सिलसिला भी शुरू हो गया है। मॉनसून के शुरुआती तीन दिनों के भीतर ही अलग-अलग हादसों में कम से कम 11 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 12 लोग घायल हुए हैं। इसके अतिरिक्त, एक व्यक्ति के लापता होने की भी खबर है। भारी बारिश और भूस्खलन के कारण राज्य के विभिन्न हिस्सों में बुनियादी ढांचे को भारी क्षति पहुंची है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। राज्य आपात अभियान केंद्र (SEOC) की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में प्रदेश भर में कुल 60 मुख्य और संपर्क मार्ग पूरी तरह बंद हैं, जिससे यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

किन्नौर में फ्लैश फ्लड और राष्ट्रीय राजमार्ग-05 पर यातायात बहाल

किन्नौर जिले से राहत की खबर सामने आई है, जहां शुक्रवार को बंद हुए राष्ट्रीय राजमार्ग-05 (NH-05) को कड़ी मशक्कत के बाद यातायात के लिए दोबारा खोल दिया गया है। इससे पहले, चोलिंग क्षेत्र में आई अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) के कारण एक स्कॉर्पियो गाड़ी मलबे में फंस गई थी, जिसे बाद में सुरक्षित निकाल लिया गया। हिंदुस्तान-तिब्बत मार्ग (राष्ट्रीय राजमार्ग-5) पर भूस्खलन और भारी मलबे के कारण वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रुक गई थी।

किन्नौर के उपायुक्त (DC) अमित शर्मा ने समाचार एजेंसी ‘पीटीआई’ को बताया कि शुक्रवार सुबह करीब 6:00 बजे मेरुत नाले के समीप खड़ी पहाड़ियों से अचानक भारी मात्रा में मलबा और चट्टानें खिसककर सड़क पर आ गिरीं। इस हादसे में सड़क किनारे खड़े दो वाहन मलबे की चपेट में आ गए। इसके अलावा, रिब्बा नाले में आई बाढ़ के चलते रिब्बा-कांडा संपर्क मार्ग भी बंद हो गया था। हालांकि, राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है। चोलिंग में सड़क को साफ करने और वाहनों की सुचारू आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए तुरंत एक JCB मशीन तैनात की गई, जिसके बाद सुबह लगभग 10:00 बजे राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात बहाल किया जा सका।

लाहौल-स्पीति में जाहलमा नाले का संकट: 15 दिनों में नए पुल का आश्वासन

लाहौल-स्पीति जिले के जाहलमा नाले में पुल बह जाने के बाद से स्थानीय लोगों, विशेषकर किसानों और बागवानों की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पुल के अभाव में लोग जान जोखिम में डालकर एक अस्थाई पुलिया के सहारे नाला पार करने को मजबूर हैं। सबसे बड़ी चिंता किसानों और बागवानों को सता रही है, जिनकी तैयार फसलें बाजार तक न पहुंच पाने के कारण खेतों में ही सड़ने की कगार पर हैं।

इस संकट के बीच, क्षेत्रीय विधायक अनुराधा राणा ने शुक्रवार को प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया और स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान सीमा सड़क संगठन (BRO) के अधिकारी पारस कोचर सहित लोक निर्माण विभाग और अन्य संबंधित विभागों के आला अधिकारी भी उनके साथ मौजूद रहे। विधायक ने उस स्थान का निरीक्षण किया जहां से वर्तमान में आपातकालीन आवाजाही की जा रही है, और उस जगह का भी चुनाव किया जहां नया फुटब्रिज और मुख्य पुल स्थापित किया जाना है।

विधायक ने संबंधित अधिकारियों को काम में तेजी लाने और समय सीमा के भीतर निर्माण कार्य पूरा करने के सख्त निर्देश दिए। इस पर BRO के अधिकारी पारस कोचर ने आश्वस्त किया कि अगले 15 दिनों के भीतर पुल का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। विधायक ने स्थानीय लोगों से बातचीत करते हुए कहा कि क्षेत्र के नागरिकों की सुरक्षा, सुगम आवागमन और किसानों के हितों की रक्षा करना हमारी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है और फसलों को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।

राज्य में बारिश के आंकड़े और मौसम विभाग का अलर्ट

गुरुवार शाम से ही हिमाचल प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश दर्ज की जा रही है। मौसम विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, मंडी जिले के बलद्वाड़ा में सबसे अधिक 32 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। इसके अलावा सराहन में 27 मिलीमीटर, बिलासपुर में 25.8 मिलीमीटर, शिमला में 19.5 मिलीमीटर, बरठीं में 18.6 मिलीमीटर, स्लैपर में 18 मिलीमीटर और मुरारी देवी में 16 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। राजधानी शिमला और सुंदरनगर में भी तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ बारिश की बौछारें पड़ी हैं।

मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने चेतावनी जारी करते हुए आगामी चार और पांच जुलाई को राज्य के विभिन्न हिस्सों में भारी से अत्यंत भारी बारिश का 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है। इसके साथ ही, पूरे प्रदेश में आठ जुलाई तक मौसम खराब रहने और बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना जताई गई है, जिसके लिए 'येलो अलर्ट' भी प्रभावी रहेगा।

नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट: ठप पड़ी बुनियादी सुविधाएं

मॉनसून की शुरुआती मार से राज्य के बुनियादी ढांचे को गहरा धक्का लगा है। वर्तमान में प्रदेश भर में 48 बिजली ट्रांसफार्मर ठप पड़े हैं, जिससे कई गांवों में अंधेरा छाया हुआ है। इसके साथ ही, 27 पेयजल योजनाएं भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, जिससे पेयजल संकट गहरा गया है। अब तक सरकारी और निजी संपत्तियों को मिलाकर कुल 69.67 लाख रुपये के नुकसान का आकलन किया गया है।

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, सड़कों के बंद होने के मामले में कुल्लू जिला सबसे अधिक प्रभावित हुआ है:

  • कुल्लू: 30 सड़कें बंद
  • सिरमौर: 14 सड़कें बंद
  • चंबा: 7 सड़कें बंद
  • मंडी: 5 सड़कें बंद
  • लाहौल-स्पीति: 2 सड़कें बंद
  • ऊना: 2 सड़कें बंद
  • किन्नौर: 1 सड़क बंद

बिजली व्यवस्था की स्थिति पर नजर डालें तो सबसे अधिक नुकसान मंडी जिले को हुआ है, जहां 38 ट्रांसफार्मर खराब हैं। इसके अतिरिक्त चंबा में 8, किन्नौर में 1 और लाहौल-स्पीति में 1 ट्रांसफार्मर बंद पड़ा है। पेयजल आपूर्ति की बात करें तो चंबा जिला सबसे बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जहां 27 पेयजल योजनाएं ठप हो चुकी हैं।

घर और संपत्तियों की क्षति तथा प्रशासन की तैयारी

भारी बारिश के कारण राज्य में मकानों को भी क्षति पहुंची है। अब तक प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, एक कच्चा मकान पूरी तरह से ढह गया है, जबकि सात कच्चे मकानों को आंशिक रूप से नुकसान पहुंचा है। इसके अतिरिक्त, मवेशियों को रखने वाली दो गौशालाएं भी नष्ट हो गई हैं। प्रभावित लोगों की मदद के लिए प्रशासन मुस्तैद है और अब तक आपदा प्रबंधन की विभिन्न मदों के तहत कुल 44 लाख रुपये की राहत राशि मंजूर की जा चुकी है।

बिगड़ते मौसम को देखते हुए राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने पर्यटकों और स्थानीय निवासियों के लिए एक सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे बेहद जरूरी होने पर ही यात्रा करें और नदी, नालों तथा भूस्खलन संभावित संवेदनशील क्षेत्रों के पास जाने से बचें। मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लेने और सरकारी निर्देशों का पालन करने की हिदायत दी गई है ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

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