इंसानी दिमाग के पागलपन से दहला देने वाली 8 साइकोलॉजिकल हॉरर, हर 'ट्विस्ट एंड टर्न' खड़े कर देगा रोंगटे

अगर साइकोलॉजिकल हॉरर थ्रिलर आपकी पसंद हैं, तो मानसिक बीमारी, दुख और पागलपन को डरावने अंदाज में पेश करने वाली इन 8 फिल्मों और सीरीज की लिस्ट आपके लिए है, जिनमें 'शैतान', 'तुम्बाड', 'द बाबाडूक' और 'मिजरी' जैसे नाम शामिल हैं।

साइकोलॉजिकल हॉरर वह शैली है, जो किसी भूत-प्रेत से ज्यादा इंसानी दिमाग के अंधेरों और उसके पागलपन से डराती है। अगर ऐसे ही रोंगटे खड़े कर देने वाले सस्पेंस और चौंका देने वाले 'ट्विस्ट एंड टर्न' आपको पसंद हैं, तो इन 8 फिल्मों और वेब सीरीज को अपनी वॉचलिस्ट में जरूर शामिल कीजिए। ये कहानियां मानसिक बीमारी, गहरे दुख, अकेलेपन और धार्मिक उन्माद को बेहद खौफनाक रूप में पर्दे पर उतारती हैं।

शैतान (2024)

इस फेहरिस्त में बॉलीवुड की 'शैतान' भी अपनी जगह बनाती है, जो हर माता-पिता के सबसे बड़े डर को सामने लाती है। एक खुशहाल परिवार वीकेंड बिताने के लिए बाहर निकलता है, लेकिन जैसे ही एक अजनबी उनकी जवान बेटी को अपने काबू में कर लेता है, उनकी जिंदगी नरक बन जाती है। सम्मोहन में जकड़ी वह लड़की अपने ही मां-बाप पर ऐसे जुल्म ढाने लगती है, जिसे देखकर किसी की भी रूह कांप उठे।

भूतकालम (2022)

मलयालम सिनेमा की यह बेहतरीन साइकोलॉजिकल फिल्म दर्शक को सोचने पर मजबूर कर देती है। घर में एक मौत के बाद डिप्रेशन से जूझ रहे एक मां-बेटे को अपने किराए के मकान में कई डरावनी और अजीबोगरीब घटनाओं का सामना करना पड़ता है। फिल्म की असली खूबी यह है कि अंत तक यह उलझाए रखती है कि जो हो रहा है, वह सचमुच कोई आत्मा है या महज उनके दिमाग का वहम।

तुम्बाड (2018)

भारतीय सिनेमा की सबसे उम्दा हॉरर फिल्मों में गिनी जाने वाली 'तुम्बाड' इंसानी लालच पर बुनी गई एक अनोखी और डरावनी लोककथा है। कहानी ऐसे शख्स की है, जिसकी सोने के खजाने को पाने की हवस उसे एक श्रापित देवता की अंधेरी कोख तक खींच ले जाती है। यह फिल्म महज डराती नहीं, बल्कि यह दिखाती है कि कैसे इंसान का अपना लालच ही उसके लिए सबसे बड़ा और सबसे भयावह राक्षस बन जाता है।

बिहाइंड हर आइज (2021)

मिनीसीरीज देखने के शौकीनों के लिए 'बिहाइंड हर आइज' एक मुकम्मल साइकोलॉजिकल थ्रिलर है। कहानी एक सिंगल मदर के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जो अपने बॉस के साथ अफेयर में पड़ जाती है और साथ ही उसकी रहस्यमयी पत्नी से दोस्ती भी कर बैठती है। तीन किरदारों का यह अजीब लव ट्रायंगल धीरे-धीरे ऐसे काले राज खोलता है, जिसका अंत देखकर पैरों तले से जमीन खिसक जाती है।

मिजरी (1990)

मशहूर लेखक स्टीफन किंग के उपन्यास पर बनी यह क्लासिक फिल्म एक जुनूनी फैन के खौफनाक रूप को सामने लाती है। एक नामी लेखक की कार दुर्घटनाग्रस्त हो जाती है, जिसके बाद उसकी 'नंबर वन फैन' उसकी जान बचाती है। मगर यह सेवा जल्द ही एक भयानक कैद में तब्दील हो जाती है, जब उस फैन का पागलपन खुलकर सामने आता है। शुरू से आखिर तक यह फिल्म दर्शक को सीट से बांधे रखती है।

सेंट मॉड (2020)

धीरे-धीरे गहराते सस्पेंस के दीवानों को 'सेंट मॉड' कतई नहीं चूकनी चाहिए। यह एक अकेली और बेहद धार्मिक हॉस्पिस नर्स की कहानी है, जो अपनी एक नास्तिक मरीज की आत्मा को बचाने के जुनून में इतनी अंधी हो जाती है कि सही और गलत का फर्क ही भूल बैठती है। यह फिल्म मानसिक बीमारी, तन्हाई और धार्मिक उन्माद के खतरनाक मेल को बेहद डरावने अंदाज में पेश करती है।

द बाबाडूक (2014)

यह सिर्फ किसी राक्षस की कहानी नहीं, बल्कि इंसानी मन के गहरे खालीपन की दास्तान है। कहानी एक अकेली मां और उसके बेटे की है, जो बच्चों की एक किताब से निकले अजीब और भयावह राक्षस 'बाबाडूक' के साये से परेशान हैं। यह शानदार ऑस्ट्रेलियाई फिल्म दरअसल किसी भूत-प्रेत से कहीं ज्यादा, एक मां के पुराने दुख, अकेलेपन और डिप्रेशन के खौफनाक चेहरे को बड़ी संजीदगी और डर के साथ पर्दे पर उतारती है।

टॉक टू मी

रोंगटे खड़े कर देने वाला सस्पेंस पसंद है, तो ऑस्ट्रेलियाई हॉरर फिल्म 'टॉक टू मी' आपकी वॉचलिस्ट में जरूर होनी चाहिए। कहानी कुछ ऐसे टीनएजर्स की है, जिनके हाथ एक नकली सिरेमिक हाथ लगता है और इसके सहारे वे आत्माओं को बुलाने का खेल शुरू कर देते हैं। देखते ही देखते यह रोमांच एक खौफनाक और जानलेवा पागलपन में बदल जाता है, जहां दोस्तों का दबाव और पुरानी यादों का दर्द उन्हें एक डरावने जाल में फंसा देता है।

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