अयोध्या राम मंदिर दान चोरी: ट्रस्ट के महंत दिनेन्द्र दास महाराज का बड़ा दावा, गोपाल राव पर लगाया गुमराह करने का आरोप

अयोध्या के राम मंदिर दान चोरी मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य महंत दिनेन्द्र दास महाराज ने पूर्व महासचिव चंपत राय का बचाव करते हुए गोपाल राव पर निशाना साधा है। SIT मामले की गहन जांच में जुटी है और जल्द ही ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारियों से भी पूछताछ की जा सकती है।

अयोध्या दान चोरी मामले में नया मोड़

अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान चोरी की घटना ने पूरे देश का ध्यान खींचा है। इस मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, ट्रस्ट के भीतर से ही कई तरह के बयान सामने आ रहे हैं। इस विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य और वरिष्ठ पुजारी महंत दिनेन्द्र दास महाराज ने इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने पहली बार खुलकर इस विषय पर अपनी राय रखी है और कथित विवाद के लिए एक खास व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराया है।

गोपाल राव पर गंभीर आरोप

महंत दिनेन्द्र दास महाराज ने इस पूरे विवाद का सारा ठीकरा गोपाल राव के सिर फोड़ा है। एक गुप्त कैमरे पर हुई बातचीत के दौरान उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि गोपाल राव मंदिर की परंपराओं और मर्यादाओं में तनिक भी विश्वास नहीं रखते हैं। महंत के अनुसार, गोपाल राव ही वे व्यक्ति हैं जो न केवल लोगों को गुमराह कर रहे हैं, बल्कि पूरे मामले में भ्रम की स्थिति पैदा करने के मुख्य सूत्रधार भी हैं। उनके इस बयान ने राम मंदिर ट्रस्ट के आंतरिक कामकाज और चल रहे विवादों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।

चंपत राय का जोरदार बचाव

महंत दिनेन्द्र दास महाराज ने पूर्व महासचिव चंपत राय का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने चंपत राय को पूरी तरह से ईमानदार बताते हुए उनकी कार्यशैली की सराहना की। महंत ने कहा कि वे चंपत राय को 15 साल से भी अधिक समय से जानते हैं और इस लंबी अवधि में उन्होंने चंपत राय को कभी भी कोई गलत काम करते हुए नहीं देखा। महंत ने कहा, चंपत राय तन, मन और धन से भगवान रामलला की सेवा में जुटे हैं। उनके अनुसार, मंदिर में आने वाले एक-एक रुपये का हिसाब पूरी पारदर्शिता के साथ रखा जाता है और चंपत राय उसे हमेशा रामलला को समर्पित करते रहे हैं।

पारदर्शिता पर जोर

महंत ने आगे कहा कि चंपत राय ट्रस्ट की बैठकों में हर छोटी-बड़ी जानकारी साझा करते हैं और वहां होने वाले सामूहिक फैसलों का पालन करते हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यदि चंपत राय के कामकाज में उन्हें रत्ती भर भी कोई कमी दिखाई देती, तो वे उसे उजागर करने में संकोच नहीं करते। महंत के शब्दों में, 15 वर्षों के अपने अनुभव के आधार पर वे यह कह सकते हैं कि उन्हें चंपत राय के कार्य व्यवहार में कोई खराबी नज़र नहीं आती है। यदि कोई गलती होती तो वे स्वयं उसे सार्वजनिक रूप से जरूर कहते।

जांच का दायरा और SIT की सक्रियता

इस बीच, विशेष जांच दल यानी SIT की टीम ने अयोध्या में करीब 8 घंटे तक गहन पड़ताल की है। जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला की पूछताछ से पता चला है कि इस कथित गिरोह ने दान चोरी की घटना को अंजाम देने से पहले मंदिर के पूरे ढांचे का बारीकी से अध्ययन किया था। इसमें सीसीटीवी कैमरों के ब्लाइंड स्पॉट, आने-जाने के रास्तों और सुरक्षा व्यवस्था की खामियों को पहले से ही चिन्हित किया गया था। SIT अब यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस चोरी की रकम का इस्तेमाल कहां किया गया। जांचकर्ता इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि क्या चोरी के पैसे से अयोध्या के बाहर कोई संपत्ति खरीदी गई या उसे कहीं और निवेश किया गया।

आगे की पूछताछ की संभावना

राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। प्राप्त सूचनाओं के अनुसार, SIT आने वाले दिनों में गोपाल राव और डॉ. अनिल मिश्रा को पूछताछ के लिए बुला सकती है। पुलिस अब उन सभी व्यक्तियों के बीच वित्तीय और व्यक्तिगत संपर्कों को खंगाल रही है, जो इस मामले से किसी न किसी तरह जुड़े हो सकते हैं। दान चोरी के मास्टरमाइंड की तलाश अब अंतिम चरण में है, और पकड़े गए कई चंदा चोरों से लगातार पूछताछ जारी है। महंत दिनेन्द्र दास महाराज का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मंदिर ट्रस्ट और जांच एजेंसियों पर इस मामले के जल्द खुलासे का भारी दबाव है। मंदिर की पवित्रता और चंदे की सुरक्षा को लेकर उठे सवालों के बीच अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि SIT की आगामी रिपोर्ट में किन-किन नामों का खुलासा होता है और गोपाल राव व डॉ. अनिल मिश्रा की पूछताछ में क्या नई जानकारियां निकलकर सामने आती हैं।

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