जिस फिल्म को नहीं मिल रहे थे खरीदार, वही साबित हुई ब्लॉकबस्टर, 29 साल बाद रीमेक ने भी की बंपर कमाई

फिल्म जगत के इतिहास में कई ऐसी फिल्में हैं जो शुरुआत में ठुकरा दी गई थीं, लेकिन बाद में सिनेमाघरों में रिकॉर्ड तोड़ कमाई की। ऐसी ही एक फिल्म थी 'कोरा कागज', जिसका किशोर कुमार का गाया गाना उसकी सफलता की मुख्य वजह बना और बाद में इसका रीमेक भी सुपरहिट साबित हुआ।

अनिल गांगुली की संघर्षपूर्ण यात्रा

सिनेमा की दुनिया में कई ऐसी फिल्में रही हैं, जो आज के समय में क्लासिक मानी जाती हैं, लेकिन उनके निर्माण के दौरान उन्हें भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। 10 मई 1974 को रिलीज हुई अनिल गांगुली द्वारा निर्देशित फिल्म कोरा कागज का किस्सा भी कुछ ऐसा ही है। यह वह समय था जब फिल्म के लिए कोई भी डिस्ट्रीब्यूटर पैसे लगाने को तैयार नहीं था। फिल्म के मुख्य अभिनेता विजय आनंद थे, लेकिन उस दौर के हिसाब से किसी बड़े सितारे की कमी के कारण डिस्ट्रीब्यूटर्स फिल्म से दूरी बना रहे थे। स्थिति इतनी नाजुक थी कि निर्माता सनत कोठारी बेहद परेशान थे और उन्होंने फिल्म के हीरो विजय आनंद से गुहार लगाई कि वे फिल्म में कुछ बदलाव करें या इसे बेचने का कोई रास्ता निकालें। यहाँ तक कि निर्देशक अनिल गांगुली को फिल्म पूरी करने के लिए फाइनेंसर के घर के बाहर पूरी रात खड़े रहना पड़ा था।

गाने का जादू और फिल्म की सफलता

फिल्म जब बनकर तैयार हुई, तो यह एक नायिका प्रधान फिल्म साबित हुई जिसमें जया बच्चन ने बेहतरीन अभिनय किया था। इस फिल्म के निर्माण में आई बाधाओं का अंत तब हुआ जब फिल्म का संगीत लोगों के बीच पहुंचना शुरू हुआ। फिल्म के संगीतकार कल्याण जी आनंद जी थे और फिल्म का शीर्षक गीत मेरा जीवन कोरा कागज कोरा ही रह गया ने रातोंरात जादू कर दिया। मशहूर गायक किशोर कुमार की आवाज में यह गीत फिल्म की बैकबोन बन गया। दर्शक सिर्फ इस गाने को सुनने और फिल्म का अनुभव लेने के लिए सिनेमाघरों की ओर खींचे चले आए। यह फिल्म 1963 की बंगाली फिल्म सात पक्के बांधा का रीमेक थी, जो आशुतोष मुखोपाध्याय के उपन्यास पर आधारित थी। इस शानदार संगीत के लिए कल्याण जी आनंद जी को बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर का फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला था। फिल्म में अचला सचदेव, देवेन वर्मा और एके हंगल जैसे कलाकारों ने सहायक भूमिकाएं निभाई थीं।

29 साल बाद रीमेक का धमाका

इस फिल्म की कहानी इतनी प्रभावी थी कि 29 साल बाद साल 2003 में इसका रीमेक चलते चलते नाम से बनाया गया। अजीज मिर्जा के निर्देशन में बनी इस फिल्म में शाहरुख खान और रानी मुखर्जी ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं। यह फिल्म शाहरुख खान के अपने प्रोडक्शन हाउस के बैनर तले बनी थी। दिलचस्प बात यह है कि इस रीमेक ने भी बॉक्स ऑफिस पर बंपर कमाई की। इस फिल्म में जतिन ललित का संगीत था और गीतकार जावेद अख्तर थे। तौबा तुम्हारे ये इशारे और सुनो ना सुनो ना सुन लो ना जैसे गाने बेहद लोकप्रिय रहे। फिल्म के निर्माण के दौरान कई बदलाव हुए, जिसमें मुख्य भूमिका के लिए पहले ऐश्वर्या राय को साइन किया गया था, लेकिन सेट पर हुए कुछ विवादों के बाद रानी मुखर्जी को मौका मिला।

बॉक्स ऑफिस और कहानी का प्रभाव

चलते चलते फिल्म का बजट 11 करोड़ रुपये था और इसने दुनिया भर में 43 करोड़ रुपये का कुल कलेक्शन किया। यह फिल्म एक बड़ी व्यावसायिक सफलता रही। दोनों फिल्मों की कहानी में समानता यह थी कि वे शादी के बाद पति-पत्नी के जीवन में आने वाली सामान्य समस्याओं, आपसी मनमुटाव और रोजमर्रा के संघर्षों को बहुत गहराई से दर्शाती हैं। जहां आमतौर पर फिल्में केवल प्रेम कहानी पर केंद्रित होती हैं, वहीं इन दोनों फिल्मों ने विवाह के बाद के यथार्थ को बखूबी पर्दे पर उतारा, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। आज भी फिल्म प्रेमी इन कहानियों के भावनात्मक जुड़ाव को याद करते हैं। यह उदाहरण साबित करता है कि फिल्म की असली ताकत उसकी कहानी और उसके संगीत में होती है, जो विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उसे सफलता की ऊंचाई तक ले जा सकती है।

https://hindi.news18.com/photogallery/entertainment/bollywood-jaya-bachchan-vijay-anand-movie-kora-kagaz-turned-out-massive-hit-due-to-kishore-kumar-timeless-song-its-remake-chalte-chalte-shattered-box-office-records-10622936.html