सरगुजा की खास पहचान है करील का अचार
छत्तीसगढ़ का सरगुजा जिला अपनी सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ अपने खानपान के लिए भी जाना जाता है। यहाँ का पारंपरिक सरगुजिया शैली में बना करील का अचार आज भी लोगों की पहली पसंद बना हुआ है। आजकल बाजार में मिलने वाले अधिकांश अचारों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए विभिन्न प्रकार के हानिकारक रसायनों का उपयोग किया जाता है, लेकिन सरगुजा के लोग आज भी अपनी पुरानी परंपरा को जीवित रखे हुए हैं। यहाँ के लोग केमिकल मुक्त और घर के बने मसालों से तैयार अचार को ही प्राथमिकता देते हैं, जिसका स्वाद बरसात के मौसम में दोगुना हो जाता है।
तैयार करने की पारंपरिक विधि
इस अचार को बनाने की प्रक्रिया काफी धैर्य और मेहनत मांगती है। ऋषिका गुप्ता ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि सबसे पहले बाजार से ताजा करील खरीदकर उसे साफ पानी से अच्छी तरह धोया जाता है। सफाई के बाद इन्हें धूप में सुखाया जाता है ताकि अतिरिक्त नमी निकल जाए। इसके बाद करील को उबालकर सरसों के तेल में पकाया जाता है। इस दौरान लगभग 30 मिनट तक करील को तेल में भूनना बेहद जरूरी होता है। जब करील का रंग बदलकर हल्का भूरा हो जाता है और यह पूरी तरह से पक जाता है, तब इसे ठंडा होने के लिए रख दिया जाता है। अंत में इसमें पारंपरिक मसालों और शुद्ध सरसों के तेल का मिश्रण मिलाया जाता है, जिससे यह खाने के लिए तैयार हो जाता है।
देसी रेसिपी का जादू
ऋषिका आगे बताती हैं कि गांवों में करील आसानी से उपलब्ध हो जाता है, लेकिन शहरों में इसकी उपलब्धता थोड़ी कम होती है, जिस वजह से लोगों को इसे बाजार से खरीदना पड़ता है। सरगुजा की यह देसी स्टाइल वाली रेसिपी शहरों में आम नहीं है। शहर में मिलने वाले सामान्य अचार और सरगुजा के इस करील के अचार में बड़ा अंतर होता है। यहाँ करील को पहले अच्छी तरह पकाया जाता है, जिससे उसका स्वाद किसी ताजी सब्जी जैसा प्राकृतिक और स्वादिष्ट हो जाता है। कच्चे तरीके से बनाए गए अचार में वह बात नहीं होती जो इस पारंपरिक विधि में देखने को मिलती है।
केमिकल से दूर, शुद्धता का भरोसा
इस अचार की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें किसी भी प्रकार के कृत्रिम प्रिजर्वेटिव या हानिकारक रसायनों का उपयोग नहीं किया जाता है। केवल शुद्ध सरसों का तेल और घर के पिसे पारंपरिक मसालों के उपयोग से ही यह अचार अपनी लंबी उम्र और स्वाद प्राप्त करता है। यही कारण है कि अपनी शुद्धता और देसीपन के कारण सरगुजा का यह करील अचार न केवल स्थानीय लोगों में, बल्कि बाहर के लोगों में भी अपनी अलग पहचान बना चुका है। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग आज भी ऐसे ही पारंपरिक और रसायनों से मुक्त अचार को खाना पसंद करते हैं।
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