दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे धंसने का मामला, NHAI ने दो अधिकारियों को किया सस्पेंड

दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर पर सड़क धंसने की घटना के बाद NHAI ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो अधिकारियों को निलंबित कर दिया है और ठेकेदार को नोटिस जारी किया है।

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर बड़ा एक्शन

भारत की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शुमार दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर हाल ही में उस समय चर्चा में आ गया, जब पहली ही बारिश की मार के बाद सड़क का एक हिस्सा धंस गया। इस गंभीर लापरवाही और निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवालों के बीच भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए ताबड़तोड़ कार्रवाई की है। एनएचएआई ने मामले की शुरुआती जांच पूरी करने के बाद दो शीर्ष अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। इसके साथ ही, परियोजना से जुड़ी बड़ी कंपनियों और जिम्मेदार अफसरों को ब्लैकलिस्ट करने की चेतावनी देते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। इस घटना को एनएचएआई मुख्यालय ने सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों के साथ एक बड़ा समझौता माना है और इसे गंभीरता से लिया है।

कौन से अधिकारी हुए निलंबित

एनएचएआई ने सुरक्षा मानकों के उल्लंघन को लेकर जवाबदेही तय की है। प्राधिकरण द्वारा की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत मुख्य रूप से दो लोगों पर गाज गिरी है। इस प्रोजेक्ट से जुड़े अथॉरिटी इंजीनियर के टीम लीडर और मुख्य कार्यदायी संस्था यानी EPC ठेकेदार के प्रोजेक्ट मैनेजर को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। इसके अलावा, मामले की जिम्मेदारी तय करने के लिए संबंधित प्रोजेक्ट डायरेक्टर, अथॉरिटी इंजीनियर और ईपीसी ठेकेदार को कड़ी भाषा में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इनसे इस चूक के लिए तत्काल स्पष्टीकरण मांगा गया है कि आखिर निर्माण कार्य में ऐसी कमी क्यों रह गई कि पहली बारिश में ही सड़क का हिस्सा धंस गया।

स्थानीय विरोध बना जलभराव का कारण

एनएचएआई ने घटना के पीछे की तकनीकी और जमीनी वजहों का खुलासा किया है। प्राधिकरण के अनुसार, हाल ही में हुई मूसलाधार बारिश के दौरान एक्सप्रेसवे के एक विशेष हिस्से पर बड़ी मात्रा में पानी जमा हो गया था। पानी के अधिक दबाव के कारण नीचे की मिट्टी खिसक गई, जिसके चलते सड़क धंस गई। एनएचएआई का स्पष्ट कहना है कि इसके लिए स्थायी जल निकासी प्रणाली यानी ड्रेनेज सिस्टम का चालू न होना जिम्मेदार है। स्थानीय ग्रामीणों के कड़े विरोध के चलते निर्माण कार्य के दौरान यह ड्रेनेज सिस्टम समय पर पूरा नहीं किया जा सका था। जांच में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि जिस पुलिया का निर्माण बारिश के पानी को सुरक्षित निकालने के लिए किया गया था, स्थानीय लोग उसका गलत इस्तेमाल कर रहे थे। ग्रामीण उस पुलिया को अपने वाहनों के आने-जाने के लिए एक शॉर्टकट रास्ते के रूप में इस्तेमाल कर रहे थे, जिसके कारण पानी का बहाव अवरुद्ध हो गया और सड़क को भारी नुकसान पहुंचा।

यातायात बहाल, भविष्य के लिए नई योजना

सफर करने वाले यात्रियों के लिए फिलहाल राहत की खबर है। एनएचएआई ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य शुरू करवाया। अब प्रभावित जगह की मरम्मत पूरी कर ली गई है और सड़क को पहले से अधिक मजबूत बना दिया गया है। इस मार्ग पर सामान्य यातायात पूरी तरह से बहाल कर दिया गया है। भविष्य में दोबारा ऐसी जलभराव की स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए एक्सप्रेसवे के किनारे एक अस्थायी समानांतर नाला बनाया जा रहा है ताकि बारिश का पानी बिना किसी अवरोध के निकल सके। एनएचएआई ने सख्त लहजे में कहा है कि देश के राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में सुरक्षा और गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और भविष्य में भी किसी प्रकार की कोताही बरतने वालों पर कड़ा एक्शन जारी रहेगा।

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