बादलों के आगोश में सिमटा मेवाड़ का गौरव
राजस्थान का नाम सुनते ही अक्सर लोगों के जेहन में तपती रेत और चिलचिलाती धूप का ख्याल आता है, लेकिन अरावली पर्वतमाला की गोद में बसा मेवाड़ मानसून के दौरान अपनी एक अलग ही छटा बिखेरता है। उदयपुर के आसपास के क्षेत्रों में मानसून के आगमन के साथ ही प्रकृति का अद्भुत श्रृंगार देखने को मिलता है। इन दिनों मेवाड़ की ऐतिहासिक धरोहरें चारों तरफ फैली हरियाली और घने बादलों के बीच पर्यटकों को अपनी ओर खींच रही हैं। इस सूची में सबसे प्रमुख नाम कुंभलगढ़ किले का है, जो इन दिनों सोशल मीडिया पर मानसून डेस्टिनेशन के तौर पर छाया हुआ है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा नजारा
बारिश के मौसम में जब कुंभलगढ़ किले के चारों ओर धुंध और बादलों की परत जम जाती है, तो यहां का दृश्य किसी पहाड़ी पर्यटन स्थल से कम नहीं लगता। किले की विशाल प्राचीरों को छूकर निकलते बादल पर्यटकों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र होते हैं। यही वजह है कि इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कुंभलगढ़ की तस्वीरें और वीडियो खूब देखे और साझा किए जा रहे हैं। ट्रैवल ब्लॉगर और कंटेंट क्रिएटर बड़ी तादाद में यहाँ पहुंचकर इस ऐतिहासिक स्थल की प्राकृतिक सुंदरता को दुनिया के सामने पेश कर रहे हैं, जिससे पर्यटकों की रुचि में भारी इजाफा हुआ है।
इतिहास के पन्नों में कुंभलगढ़ का महत्व
ऐतिहासिक दृष्टि से कुंभलगढ़ किला मेवाड़ की सबसे महत्वपूर्ण और भव्य धरोहरों में गिना जाता है। इस किले का निर्माण 15वीं शताब्दी में महाराणा कुंभा द्वारा करवाया गया था। यह किला अपनी अभेद्य और विशाल दीवारों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। इस किले के चारों ओर बनी 36 किलोमीटर लंबी परकोटा दीवार को दुनिया की दूसरी सबसे लंबी सतत दीवार माना गया है। इसके अलावा, महान योद्धा महाराणा प्रताप का जन्म भी इसी ऐतिहासिक दुर्ग के भीतर हुआ था, जो इसे हर भारतीय के लिए गर्व का प्रतीक बनाता है।
यूनेस्को की सूची में दर्ज विरासत
कुंभलगढ़ किला केवल अपनी सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक विरासत के कारण भी विश्व प्रसिद्ध है। यह किला यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में 'हिल फोर्ट्स ऑफ राजस्थान' के अंतर्गत विशेष दर्जा प्राप्त कर चुका है। किले के भीतर स्थित प्राचीन महल, मंदिर, विशाल प्रवेश द्वार और मजबूत प्राचीरें मेवाड़ के गौरवशाली और पराक्रमी इतिहास की गाथा सुनाती हैं।
पर्यटकों के लिए मानसून का अनूठा अनुभव
मानसून के दौरान किले के आसपास स्थित अरावली पर्वत श्रृंखला पूरी तरह से हरियाली की चादर ओढ़ लेती है। हल्की बारिश की फुहारें, ठंडी हवाएं और बादलों की आवाजाही के बीच इस किले को देखना एक अविस्मरणीय अनुभव होता है। यही कारण है कि बारिश के मौसम में यहाँ हर साल देश और विदेश से हजारों की संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। यदि आप इस मानसून में इतिहास और प्रकृति के अद्भुत संगम का आनंद लेना चाहते हैं, तो कुंभलगढ़ किला आपकी यात्रा सूची में सबसे ऊपर होना चाहिए। यहाँ की भव्यता और मानसून का लुभावना मौसम किसी भी पर्यटक को मंत्रमुग्ध करने के लिए काफी है।
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