सागर की बदलेगी तस्वीर
सागर शहर में आवागमन को सुगम बनाने और भारी वाहनों के कारण होने वाली समस्याओं से निपटने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना पर काम शुरू हो चुका है। सागर में 688 करोड़ रुपये की लागत से पश्चिमी फोरलेन ग्रीनफील्ड बाईपास का निर्माण किया जाएगा। यह प्रोजेक्ट न केवल शहर की यातायात व्यवस्था को नई गति देगा, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में विकास की एक नई लहर भी लेकर आएगा।
प्रोजेक्ट की रूपरेखा और विस्तार
यह प्रस्तावित बाईपास कुल 20 किलोमीटर लंबा होगा। इसकी चौड़ाई 60 मीटर निर्धारित की गई है। सड़क का मार्ग नेशनल हाईवे 146 पर स्थित लेहदरा गांव से शुरू होकर नेशनल हाईवे 44 पर स्थित बेरखेड़ी गुरु तक जाएगा। सागर शहर को चारों तरफ से जोड़ने के लिए जो रिंग रोड का जाल बिछाया जा रहा है, यह बाईपास उसी के पश्चिमी हिस्से को मुख्य रूप से कवर करेगा। यह सड़क लगभग डेढ़ दर्जन गांवों से होकर गुजरेगी, जिससे ये गांव अब सीधे मुख्य शहरों और दो प्रमुख नेशनल हाईवे से जुड़ जाएंगे।
जाम और हादसों से मिलेगी राहत
सागर की भौगोलिक स्थिति मध्य प्रदेश के केंद्र में है, जिसके कारण यह शहर भोपाल, जबलपुर, कानपुर और नरसिंहपुर जैसे बड़े केंद्रों को आपस में जोड़ता है। शहर के बीचों-बीच से आवाजाही होने के कारण भारी वाहनों जैसे ट्रक और कंटेनर का निरंतर दबाव रहता है। इसके परिणामस्वरूप शहर में अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है, सड़कें समय से पहले जर्जर हो जाती हैं और दुर्घटनाओं का खतरा भी हमेशा बना रहता है। वर्तमान में भारी वाहनों के लिए सुबह 7:00 बजे से रात 9:00 बजे तक नो-एंट्री का नियम लागू है, जिससे परिवहन पर असर पड़ता है। इस बाईपास के बनने से भारी वाहन बिना शहर में प्रवेश किए अपनी मंजिल तक सुरक्षित और तेजी से पहुंच सकेंगे।
ग्रामीण इलाकों का कायाकल्प
जिन गांवों से होकर यह नया मार्ग गुजरेगा, वहां विकास के नए द्वार खुलेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना के बाद वहां जमीन के दामों में भारी उछाल आएगा। गांवों की शहरों से कनेक्टिविटी आसान होने के कारण वहां होटल, रिजॉर्ट, रेस्टोरेंट, पार्क और विभिन्न उद्योगों के स्थापित होने की पूरी संभावना है। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और कृषि कार्यों में भी सुगमता आएगी।
लंबे समय से थी मांग
सागर में एक व्यवस्थित बाईपास की मांग करीब 8 साल पहले उठनी शुरू हुई थी। समय बीतने के साथ यह मांग जोर पकड़ती गई और प्रशासनिक अमले ने गंभीरता दिखाते हुए इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर तैयार करवाकर शासन को भेजी। जनप्रतिनिधियों के प्रयासों और प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को मंजूरी दी। पिछले 1 साल से क्षेत्र में भू-अर्जन की प्रक्रिया चल रही है और अधिकारियों का दावा है कि आगामी 2 साल के भीतर यह कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
क्या होता है ग्रीनफील्ड बाईपास?
ग्रीनफील्ड बाईपास का अर्थ एक ऐसी सड़क प्रणाली से है, जिसका निर्माण पूरी तरह से नए सिरे से किया जाता है। इसमें पहले से मौजूद किसी मार्ग का विस्तार नहीं किया जाता, बल्कि शहर के बाहरी हिस्सों में खाली पड़ी जमीन या अविकसित क्षेत्रों से होकर नया रास्ता तैयार किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य शहर की घनी आबादी वाले इलाकों को भारी ट्रैफिक के दबाव से पूरी तरह मुक्त करना होता है, ताकि शहर के एक छोर से दूसरे छोर तक बिना किसी बाधा के पहुंचा जा सके।
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