संघर्ष से सफलता तक का सफर
झारखंड के रांची में रहने वाली सरिता देवी की कहानी उन तमाम महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद कुछ बड़ा करने का जज्बा रखती हैं। सरिता के लिए एक समय वह दौर था जब अपने बच्चों को निजी स्कूल में पढ़ाना केवल एक सपना सा लगता था और उन्हें सरकारी स्कूलों पर ही निर्भर रहना पड़ता था। हालांकि, समय के साथ उनकी मेहनत रंग लाई। आज स्थिति यह है कि वह अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में शिक्षित करने के साथ ही बेंगलुरु से एमबीए की पढ़ाई भी करा रही हैं, और उनके बेटे का जल्द ही प्लेसमेंट भी होने वाला है। सरिता के जीवन में आया यह सकारात्मक बदलाव कटहल प्रोसेसिंग यूनिट के माध्यम से संभव हो पाया है।
कटहल प्रोसेसिंग का अनोखा बिजनेस मॉडल
सरिता ने अपने घर पर ही कटहल प्रोसेसिंग की एक यूनिट स्थापित की है। इस कार्य में उन्हें सरकार की ओर से फूड प्रोसेसिंग स्कीम के तहत न केवल ट्रेनिंग दी गई, बल्कि सब्सिडी के रूप में आर्थिक सहायता भी मिली है। सरिता बताती हैं कि रांची के ग्रामीण इलाकों में कटहल के पेड़ों की भरमार है। अक्सर सीजन के दौरान काफी कटहल खराब हो जाता था और बाजार में सही दाम न मिलने के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ता था। इसी समस्या को अवसर में बदलते हुए उन्होंने कटहल को लंबे समय तक सुरक्षित रखने और उससे विभिन्न उत्पाद बनाने का विचार किया।
दो साल तक सुरक्षित रहता है उत्पाद
उनकी यूनिट में कटहल की ऐसी बेहतरीन पैकेजिंग की जाती है कि वह डिब्बों में पैक होकर 2 साल तक पूरी तरह सुरक्षित रहता है। ग्राहक बिना किसी चिंता के 2 साल तक इन उत्पादों का उपयोग कर सकते हैं। अपने कारोबार के बारे में विस्तार से बताते हुए सरिता कहती हैं कि वे सिर्फ कटहल की पैकेजिंग ही नहीं करतीं, बल्कि इससे कई अन्य स्वादिष्ट चीजें भी बनाती हैं।
उत्पाद और बाजार की पहुंच
सरिता की यूनिट में कटहल के चिप्स, पापड़ और कई तरह के अचार तैयार किए जाते हैं। उनके द्वारा बनाए गए खट्टे, मीठे और मिक्स अचार की मांग न केवल स्थानीय स्तर पर है, बल्कि लोग इन्हें विदेश भी ले जाते हैं। उनके उत्पाद आज मुंबई और दिल्ली के बाजारों के साथ ही अमेज़न जैसे प्रमुख ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी काफी लोकप्रिय हैं। बेहतर क्वालिटी के कारण उनके प्रोडक्ट्स की जबरदस्त डिमांड बनी रहती है। इस वर्ष उनका कुल टर्नओवर 23 लाख रुपये तक पहुंच गया है, जो उनके निरंतर प्रयासों का परिणाम है।
महिला सशक्तिकरण की मिसाल
सरिता ने इस सफर में न केवल खुद को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि अपने साथ 8 अन्य महिलाओं को भी जोड़ा है। ये महिलाएं उनके साथ मिलकर कटहल की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और अन्य कामों में हाथ बटाती हैं। इससे इन 8 महिलाओं को भी रोजगार मिला है और वे अपने परिवारों का भरण-पोषण करने में सक्षम हुई हैं। सरिता का यह छोटा सा कदम आज कई परिवारों के लिए खुशहाली लेकर आया है और ग्रामीण स्तर पर महिला सशक्तिकरण का एक बड़ा उदाहरण पेश कर रहा है।
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