केतन अग्रवाल हत्याकांड: पुलिस कस्टडी खत्म होने से पहले सिया गोयल के घर पहुंची पुणे पुलिस, करीब डेढ़ घंटे तक चली सघन तलाशी

केतन अग्रवाल मर्डर केस की मुख्य आरोपी सिया गोयल को लेकर पुणे पुलिस उसके घर पहुंची, जहां पुलिस रिमांड खत्म होने से पहले महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाने के लिए करीब डेढ़ घंटे तक तलाशी अभियान चलाया गया।

महाराष्ट्र के पुणे में हुए बेहद चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच अब अपने सबसे संवेदनशील और निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुकी है। इस मामले की मुख्य आरोपी सिया गोयल और सह-आरोपी चेतन चौधरी की पुलिस हिरासत समाप्त होने में अब केवल कुछ ही घंटों का समय शेष रह गया है। इस सीमित समय सीमा के भीतर मामले को अदालत में मजबूती से पेश करने के लिए पुणे पुलिस हर संभव सबूत और कड़ियां जोड़ने में जुटी हुई है। इसी सिलसिले में पुलिस की एक विशेष टीम सोमवार को आरोपी सिया गोयल को उसके घर लेकर पहुंची, जहां करीब सवा से डेढ़ घंटे तक तलाशी और पंचनामा की कानूनी प्रक्रिया को अंजाम दिया गया।

डेढ़ घंटे तक घर के चप्पे-चप्पे की ली गई तलाशी

पुलिस अधिकारी कड़ी सुरक्षा के बीच सिया गोयल को उसके आवास पर लेकर पहुंचे। घर पहुंचने के बाद पुलिस की टीम ने अत्यंत सावधानीपूर्वक घर के कोने-कोने की जांच की। जांच दल ने घर के विभिन्न कमरों, अलमारियों और अन्य संदिग्ध जगहों की सघन तलाशी ली। इस अभियान के दौरान पुलिस ने घर से कुछ अहम सामान और दस्तावेज भी जब्त किए हैं। हालांकि, जांच की संवेदनशीलता और गोपनीयता को बनाए रखने के लिए पुलिस विभाग ने अभी तक आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं किया है कि बरामद किए गए सामान में क्या-क्या शामिल है। लेकिन माना जा रहा है कि यह सामग्री अदालती कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

'मैं अपने कमरे में था...' - सिया के पिता का बयान

पुलिस की इस बड़ी छापेमारी और तलाशी अभियान के बाद मीडियाकर्मियों ने सिया गोयल के पिता से संक्षिप्त बातचीत की। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने पुलिस की इस कानूनी कार्रवाई में किसी भी प्रकार का कोई हस्तक्षेप नहीं किया और न ही कोई बाधा उत्पन्न की। उन्होंने बताया:

"पुलिस टीम अपना काम करने के लिए हमारे घर आई थी और लगभग सवा से डेढ़ घंटे तक घर के अंदर ही छानबीन करती रही। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान पुलिस ने मुझसे किसी भी प्रकार की कोई पूछताछ नहीं की है। चूंकि मेरी तबीयत पिछले कुछ समय से ठीक नहीं है और डॉक्टर ने मुझे पूरी तरह आराम करने की सलाह दी है, इसलिए मैं अपने ही कमरे में था। पुलिस अपनी कार्रवाई पूरी करने के बाद वहां से चली गई।"

इसके साथ ही सिया के पिता ने यह भी साफ कर दिया कि इस पूरी पुलिस कार्रवाई के दौरान उन्होंने न तो अपनी बेटी से कोई बातचीत की और न ही उनसे कोई मुलाकात करवाई गई।

साजिश का मुख्य सूत्रधार कौन? पुलिस के सामने खड़े हैं कई सवाल

पुणे पुलिस का दावा है कि वे ऐतिहासिक लोहागढ़ किले पर ले जाकर दोनों आरोपियों की मौजूदगी में अपराध स्थल का पुनर्निर्माण (क्राइम सीन रीक्रिएशन) करवा चुके हैं। इस रीक्रिएशन के दौरान जांच टीम को घटनाक्रम से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां भी हासिल हुई हैं। इसके बावजूद, अब भी कई ऐसे अनसुलझे सवाल हैं जिनका सटीक और पुख्ता जवाब मिलना बाकी है। पुलिस के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती यह साबित करना है कि इस जघन्य हत्याकांड की साजिश का असली सूत्रधार कौन था?

  • क्या इस पूरी हत्या की योजना का ताना-बाना अकेले सिया गोयल ने बुना था?
  • या फिर सह-आरोपी चेतन चौधरी ने इस पूरी वारदात की रूपरेखा तैयार की थी?
  • अथवा दोनों ने मिलकर आपसी सहमति से इस हत्याकांड के हर पहलू की साजिश रची थी?

जांच अधिकारी इन सभी संभावनाओं को ध्यान में रखकर गहराई से छानबीन कर रहे हैं ताकि मामले की तह तक पहुंचा जा सके।

वैज्ञानिक जांच और लाई डिटेक्टर टेस्ट की तैयारी

इस मर्डर मिस्ट्री की जांच से जुड़े विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों के बयानों में भारी विसंगतियां और विरोधाभास पाए गए हैं। कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सिया और चेतन के बयान एक-दूसरे से बिल्कुल भी मेल नहीं खा रहे हैं। इसके अलावा, मामले से जुड़े डिजिटल साक्ष्य और परिस्थितिजन्य सबूत भी इस घटना की पूरी तस्वीर साफ करने के लिए पर्याप्त साबित नहीं हो रहे हैं। बयानों में इसी अंतर को दूर करने के लिए पुणे पुलिस ने अब न्यायालय से दोनों आरोपियों का लाई डिटेक्टर टेस्ट (झूठ पकड़ने वाला परीक्षण) कराने की अनुमति मांगी है। पुलिस को विश्वास है कि इस वैज्ञानिक परीक्षण के माध्यम से हत्या की साजिश, घटनास्थल पर दोनों की वास्तविक संलिप्तता और अपराध को अंजाम देने के बाद सबूतों को नष्ट करने के प्रयासों से जुड़े तमाम राज सामने आ सकेंगे।

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