पाकिस्तान में दर्दनाक हादसा: सैफुल्ला झील में नाव पलटने से एक ही परिवार के 7 लोगों की मौत, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

पाकिस्तान के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सैफुल्ला झील में नाव पलटने से एक बड़ा हादसा हो गया है, जिसमें एक ही परिवार के सात लोगों की डूबने से मौत हो गई और एक व्यक्ति अब भी लापता है।

पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा से एक बेहद हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहां के मशहूर पर्यटन स्थल सैफुल्ला झील में नौकाविहार के दौरान एक बड़ा हादसा हो गया। सैलानियों से भरी एक नाव अचानक झील के गहरे पानी में पलट गई। इस दर्दनाक हादसे में एक ही परिवार के सात लोगों की असमय मौत हो गई है। यह पूरा परिवार गर्मियों की छुट्टियां मनाने और घूमने के लिहाज से इस खूबसूरत इलाके में आया था, लेकिन उन्हें क्या पता था कि यह सफर उनके जीवन का आखिरी सफर साबित होगा। पुलिस विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, नाव पर कुल आठ लोग सवार थे, जिनमें से सात के शव बरामद कर लिए गए हैं, जबकि एक सदस्य अब भी लापता है। यह पीड़ित परिवार मूल रूप से स्वात जिले के खूबसूरत कलाम इलाके का रहने वाला था।

मौके पर राहत और बचाव कार्य जारी

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया। तुरंत ही पुलिस बल, पेशेवर गोताखोरों की टीम और स्थानीय राहत एवं बचाव कर्मी मौके पर पहुंच गए। स्थानीय ग्रामीणों ने भी राहत कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और डूबे हुए लोगों को बाहर निकालने में मदद की। काफी मशक्कत के बाद बचाव दल ने झील से सात शवों को बाहर निकालने में सफलता हासिल की है। हालांकि, परिवार का एक सदस्य अभी भी लापता बताया जा रहा है, जिसकी तलाश के लिए झील के ठंडे पानी में व्यापक स्तर पर खोज अभियान चलाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि वे लापता व्यक्ति को जल्द से जल्द ढूंढने का हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। पुलिस ने इस पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है कि आखिर नाव पलटने के पीछे मुख्य कारण क्या थे और क्या इसमें सुरक्षा नियमों की अनदेखी की गई थी।

पर्यटकों का पसंदीदा केंद्र है सैफुल्ला झील

सैफुल्ला झील पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बेहद खूबसूरत और लोकप्रिय नारान क्षेत्र में स्थित है। यह एक प्राकृतिक झील है जो अपनी अद्भुत सुंदरता, पहाड़ों से घिरे होने और शांत वातावरण के लिए जानी जाती है। हर साल गर्मियों के मौसम में पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों और विदेशों से भी बड़ी संख्या में पर्यटक यहां बोटिंग करने, प्रकृति का दीदार करने और ठंडी हवाओं का आनंद लेने आते हैं। लेकिन इस प्राकृतिक सौंदर्य के पीछे कई खतरे भी छिपे रहते हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इस पर्वतीय क्षेत्र में मौसम बहुत तेजी से बदलता है। अचानक चलने वाली तेज हवाएं, झील का बेहद ठंडा पानी और पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों जैसे लाइफ जैकेट आदि की कमी के कारण अक्सर यहां ऐसे जानलेवा हादसे होते रहते हैं। इस बार भी प्राथमिक तौर पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी को ही इस हादसे की बड़ी वजह माना जा रहा है।

लाहौर में हुआ था बड़ा हादसा: ढह गई थी ट्यूशन सेंटर की छत

पाकिस्तान में हाल के दिनों में बुनियादी ढांचे की कमजोरी और सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही के कारण कई बड़ी घटनाएं हुई हैं। कुछ समय पहले ही लाहौर के कैना क्षेत्र में एक अत्यंत दुखद हादसा देखने को मिला था। वहां एक निजी ट्यूशन सेंटर की जर्जर छत अचानक भरभराकर गिर गई थी। जब यह हादसा हुआ, उस समय ट्यूशन सेंटर के अंदर बच्चों की कक्षाएं चल रही थीं। अचानक छत गिरने के कारण बच्चों को संभलने या बाहर भागने का जरा भी मौका नहीं मिला। इस भीषण मलबे में दबने से 14 मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

मानवाधिकार आयोग ने जताई गहरी चिंता

लाहौर हादसे के बाद पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) ने देश में जर्जर इमारतों की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की थी। आयोग ने अपने बयान में स्पष्ट रूप से कहा कि इस तरह के हादसों के लिए कमजोर निर्माण सामग्री का उपयोग और जर्जर हो चुकी इमारतों की समय पर जांच न होना मुख्य रूप से जिम्मेदार है। आयोग ने सरकार और स्थानीय प्रशासन से मांग की है कि ऐसे हादसों के लिए जिम्मेदार लोगों और ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में निर्दोष लोगों की जान सुरक्षित रहे।

देश के अन्य हिस्सों में भी मची तबाही

सुरक्षा और जर्जर निर्माण के कारण केवल लाहौर ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान के अन्य राज्यों और शहरों से भी ऐसी ही दुखद खबरें लगातार आ रही हैं। हाल ही में पंजाब प्रांत के मुजफ्फरगढ़ इलाके में एक पुरानी और जर्जर दीवार गिरने से दो सगी बहनों की मलबे में दबकर मौत हो गई। वहीं दूसरी ओर, फैसलाबाद में एक रिहायशी मकान के कमरे की छत अचानक ढह जाने से एक ही परिवार के तीन लोगों की जान चली गई। इन सभी घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि देश में रिहायशी और व्यावसायिक इमारतों की सुरक्षा को लेकर कोई कड़े नियम लागू नहीं किए जा रहे हैं, जिसके कारण आम नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है। सैफुल्ला झील का ताजा हादसा भी इसी प्रशासनिक और व्यक्तिगत लापरवाही की एक और दर्दनाक मिसाल है।

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