उत्तर प्रदेश का सहारनपुर बासमती धान की खेती के लिए खास पहचान रखता है। यहां के कई किसान धान की बुवाई पूरी कर चुके हैं। अगर वे अपने खेत से बेहतर उत्पादन लेना चाहते हैं तो उन्हें 30 से 40 दिन के भीतर कुछ ऐसे उपाय अपनाने होंगे, जिनसे धान का फुटाव तेजी से हो।
धान में फुटाव का समय आमतौर पर 30 से 40 दिन के बीच आता है। इससे पहले अगर फुटाव को बेहतर बनाना है तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। दूसरा विकल्प है सही मात्रा में पोषक तत्व और खाद का इस्तेमाल। कुछ किस्में ऐसी भी होती हैं जिनमें फुटाव का समय अलग-अलग रहता है, इसलिए फुटाव को मजबूत करने के लिए समय और तरीका दोनों का सही उपयोग जरूरी है।
हर फसल के फुटाव का होता है तय समय
सहारनपुर के कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी और प्रोफेसर डॉ. आईके कुशवाहा बताते हैं कि हर फसल के फुटाव का एक निश्चित समय होता है। धान की फसल में 30 से 40 दिन के आसपास फुटाव शुरू हो जाता है। फुटाव से पहले हमें कुछ ऐसे काम करने होते हैं, जिनसे 40 दिन तक फुटाव अच्छा बना रहे।
खाद और पोषक तत्व का संतुलित उपयोग
डॉ. कुशवाहा के अनुसार किसान सबसे पहले एनपीके का समान रूप से प्रयोग करें। इसके साथ सड़ी हुई गोबर की खाद का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए। यह खाद इस समय फसल के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
किस्म के हिसाब से पटेला लगाने का तरीका
धान की कुछ छोटी अवधि वाली प्रजातियां होती हैं, जैसे 1509 धान वैरायटी। इसमें 15 दिन में पटेला लगाया जाता है, जबकि मोटे धान में 20 दिन के आसपास एक पटेला लगाया जाता है।
डॉ. आईके कुशवाहा कहते हैं कि जिस खेत में पटेला लगाना हो, उसमें पानी भरा होना चाहिए, इससे धान को कोई नुकसान नहीं होता। पहला पटेला 15 से 20 दिन और दूसरा पटेला 22 से 25 दिन में लगाने से पौधा झुकता नहीं है और फुटाव अच्छा होता है।
रोपाई की गहराई और सल्फर का इस्तेमाल
एक और जरूरी बात यह है कि किसान धान लगाते समय गहराई ज्यादा न रखें। इसके अलावा किसान जिंक सल्फेट या बेन्टोनाइट सल्फर का प्रयोग भी कर सकते हैं। इससे भी फुटाव बेहतर होता है।
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