मुफ्त प्रेशर कुकर बांटने के नाम पर बड़ा घोटाला: 138 महिलाओं के फिंगरप्रिंट लेकर निकाल लिया 1.31 करोड़ रुपये का फर्जी लोन

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में एक शातिर गिरोह ने सरकारी योजना का झांसा देकर 138 ग्रामीण महिलाओं के बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट हासिल किए और उनके नाम पर 1.31 करोड़ रुपये से अधिक का फर्जी बैंक लोन उठा लिया।

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले से धोखाधड़ी और जालसाजी का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने सुरक्षा व्यवस्था और बैंकिंग प्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के बसना थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम पिरदा में एक बेहद चालाक अंतरराज्यीय ठग गिरोह ने बड़ी ही चालाकी से ग्रामीण इलाकों की मासूम महिलाओं को अपना निशाना बनाया। इस गिरोह ने सरकारी योजना के अंतर्गत मुफ्त प्रेशर कुकर और अन्य घरेलू सहायता सामग्री वितरित करने का झूठा लालच दिया। इसके बाद उन्होंने गांव की 138 गरीब महिलाओं के फिंगरप्रिंट हासिल कर लिए और देखते ही देखते उनके नाम पर 1 करोड़ 31 लाख 31 हजार 630 रुपये का फर्जी लोन स्वीकृत कराकर बैंक से निकाल लिया। इस बड़े घोटाले के खुलासे के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है।

मुफ्त कुकर का झांसा और फिंगरप्रिंट का जाल

पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में इस ठगी के बेहद शातिर तरीके का खुलासा हुआ है। इस पूरे महाघोटाले का मुख्य सूत्रधार और मास्टरमाइंड सुदर्शन साहू नाम का एक एजेंट है। सुदर्शन ने सीधे तौर पर महिलाओं को ठगने के बजाय पूरे गांव में अपना एक जाल बिछाया। वह सबसे पहले ग्राम पिरदा पहुंचा और वहां की भोली-भाली महिलाओं को इकट्ठा किया। उसने महिलाओं को विश्वास दिलाया कि सरकार की एक विशेष योजना के तहत उन्हें मुफ्त में प्रेशर कुकर और अन्य घरेलू सामान दिए जा रहे हैं।

इस झांसे में आकर महिलाएं उसके पास अपना आधार कार्ड लेकर पहुंचने लगीं। सुदर्शन ने वहां अपनी बायोमेट्रिक मशीन लगाई हुई थी और वह प्रत्येक महिला से उस मशीन पर फिंगरप्रिंट लगाने को कहता था। इस प्रक्रिया के दौरान शातिर एजेंट ने एक विशेष तरकीब अपनाई। जैसे ही कोई महिला मशीन पर अपना अंगूठा लगाती, वह तुरंत चिल्ला उठता कि मशीन में कोई तकनीकी खराबी आ गई है या इंटरनेट काम नहीं कर रहा है। मशीन खराब होने का झूठा बहाना बनाकर वह एक-एक महिला से तीन से चार बार फिंगरप्रिंट स्कैन करवाता था।

बैंकिंग सिस्टम की कमियों का उठाया फायदा

ग्रामीण महिलाओं को इस बात की रत्ती भर भी भनक नहीं थी कि उनके इन फिंगरप्रिंट्स का इस्तेमाल किस खतरनाक काम के लिए किया जा रहा है। दरअसल, सुदर्शन साहू और उसके साथियों ने महिलाओं के फिंगरप्रिंट और उनके मोबाइल फोन पर प्राप्त होने वाले OTP का दुरुपयोग किया। उन्होंने इन जानकारियों की मदद से इंडसइंड बैंक और भारत फाइनेंस के माध्यम से प्रत्येक महिला के नाम पर फर्जी तरीके से लोन स्वीकृत करवा लिए।

इस गिरोह ने प्रत्येक महिला के नाम पर निम्नलिखित दो श्रेणियों में कर्ज लिया:

  • पहले चरण में कई महिलाओं के नाम पर 50,450 रुपये का लोन निकाला गया।
  • दूसरे चरण में अन्य महिलाओं के नाम पर 58,000 रुपये का लोन पास कराया गया।

इस तरह कुल मिलाकर 138 महिलाओं के दस्तावेजों और बायोमेट्रिक डेटा का गलत इस्तेमाल कर कुल 1,31,31,630 रुपये का कर्ज स्वीकृत करा लिया गया और उस राशि को खुद हड़प लिया गया।

जब गांव पहुंचे रिकवरी एजेंट तो खुला राज

इस भारी-भरकम घोटाले का खुलासा तब हुआ जब भारत फाइनेंस के वसूली कर्मचारी अचानक ग्राम पिरदा पहुंचे। उन्होंने बैंक के रिकॉर्ड के अनुसार उन महिलाओं के घरों का पता लगाया जिनके नाम पर लोन लिया गया था। जब इन कर्मचारियों ने महिलाओं से लोन की मासिक किस्त चुकाने के लिए कहा, तो पूरे गांव में सन्नाटा पसर गया। महिलाएं हैरान-परेशान रह गईं क्योंकि उन्होंने अपने जीवन में कभी किसी बैंक से लोन लेने के लिए आवेदन ही नहीं किया था।

इसके बाद गांव की महिलाओं को समझ में आ गया कि उनके साथ कोई बहुत बड़ा धोखा हुआ है। इस स्थिति को देखते हुए गांव की ही एक साहसी महिला रजनी देवांगन ने आगे आने का फैसला किया। रजनी देवांगन ने हिम्मत दिखाते हुए 1 अप्रैल 2025 को बसना थाने में मुख्य एजेंट सुदर्शन साहू के खिलाफ एक लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने जब इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए बैंक के दस्तावेजों और संबंधित वित्तीय खातों के लेनदेन के इतिहास की गहराई से जांच की, तो एक के बाद एक 138 महिलाओं के साथ हुई इस महाठगी की परतें खुलती चली गईं।

पुलिस की कार्रवाई और बैंक कर्मचारियों की गिरफ्तारी

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए महासमुंद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू की थी। पुलिस ने पहले ही मुख्य एजेंट सुदर्शन साहू को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, लेकिन मामले की जांच यहीं नहीं रुकी। पुलिस इस बात की तहकीकात कर रही थी कि बिना बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत के इतना बड़ा लोन घोटाला कैसे संभव हो सकता है।

इसी कड़ी में, 1 जुलाई 2026 को महासमुंद पुलिस को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी। पुलिस ने इस पूरे सिंडिकेट में पीछे रहकर बैंकिंग प्रणाली का दुरुपयोग करने वाले दो मुख्य बैंक बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट्स को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान इस प्रकार है:

  • लक्ष्मीचंद देवांगन, जिसकी उम्र 40 वर्ष है।
  • मनोहर जटवार, जिसकी उम्र 33 वर्ष है।

पुलिस की पूछताछ में यह सामने आया कि ये दोनों आरोपी अपनी अधिकृत बैंक आईडी और क्रेडेंशियल्स का दुरुपयोग कर रहे थे। उन्होंने मुख्य आरोपी सुदर्शन साहू के साथ मिलकर इस पूरी साजिश को अंजाम दिया था। पुलिस ने इन दोनों के कब्जे से ठगी के काम में इस्तेमाल की जाने वाली बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट मशीन और मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए हैं।

महासमुंद की पुलिस अधीक्षक प्रतिभा पांडेय ने इस पूरे मामले की जानकारी देते हुए बताया कि आरोपियों ने ग्रामीण महिलाओं की मासूमियत और उनकी कम साक्षरता का फायदा उठाकर इस गंभीर आर्थिक अपराध को अंजाम दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस इस मामले में बहुत बारीकी से जांच कर रही है और आने वाले दिनों में बैंक के कुछ अन्य बड़े अधिकारियों की संलिप्तता का भी खुलासा हो सकता है।

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