सावन का महीना और शिव भक्ति का महत्व
सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की विशेष कृपा पाने का सबसे उत्तम समय माना गया है। इस दौरान देश भर के शिव मंदिरों में लाखों श्रद्धालु उमड़ते हैं। भक्त बड़ी श्रद्धा के साथ भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए शिवलिंग पर जल, दूध, गंगाजल, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करते हैं। जलाभिषेक की प्रक्रिया के दौरान कई बार पात्र में कुछ जल शेष रह जाता है। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि पूजा के बाद बचे हुए इस जल का क्या करना चाहिए। ज्यादातर लोग इसे सामान्य जल समझकर कहीं भी फेंक देते हैं, लेकिन धार्मिक और वास्तु शास्त्र की दृष्टि से ऐसा करना उचित नहीं माना जाता है।
क्यों जरूरी है बचे हुए जल का सही निस्तारण
ऋषिकेश के प्रख्यात ज्योतिषी अखिलेश पांडेय के अनुसार, शिवलिंग पर चढ़ाया गया जल अब सामान्य नहीं रहता, वह अभिमंत्रित और पवित्र हो जाता है। बहुत से लोग अनजाने में इस पवित्र जल को नाली, शौचालय या किसी अन्य अशुद्ध स्थान पर बहा देते हैं, जो कि धार्मिक मान्यताओं के विरुद्ध है। ऐसा करने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता और नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ सकता है। पूजा में उपयोग किए गए जल के प्रति सम्मान दिखाना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि यह साक्षात भगवान शिव का आशीर्वाद माना जाता है।
बचा हुआ जल डालने का सही स्थान
ज्योतिषी अखिलेश पांडेय बताते हैं कि पूजा के बाद बचे हुए जल का विसर्जन करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। इसे घर की नाली या गंदगी वाली जगहों पर डालने के बजाय निम्नलिखित स्थानों पर अर्पित करना सबसे उत्तम माना जाता है:
- तुलसी का पौधा: यदि जल में गंगाजल मिला हुआ है, तो इसे तुलसी के पौधे में डालना बहुत शुभ फलदायी होता है।
- साफ-सुथरे पौधे: आप इसे अपने बगीचे के किसी भी ऐसे पौधे की जड़ों में डाल सकते हैं जिसे नियमित रूप से पानी दिया जाता हो।
- वृक्ष की जड़: किसी बड़े पेड़ की जड़ में जल अर्पित करना प्रकृति के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है।
यह ध्यान रखें कि जिस भी पौधे या स्थान पर आप जल डाल रहे हैं, वह स्थान पूर्णतः स्वच्छ होना चाहिए।
अगर नदी या तालाब पास न हो तो क्या करें
यदि जलाभिषेक के लिए गंगाजल का प्रयोग किया गया है और उसे नदी या तालाब में प्रवाहित करना संभव न हो, तो भी चिंता की बात नहीं है। आप इसे घर के किसी पवित्र पौधे में अर्पित कर सकते हैं। इसके अलावा, सावन के महीने में घर की सकारात्मकता बनाए रखने के लिए वास्तु शास्त्र के कुछ नियमों का पालन करना भी आवश्यक है। घर के मंदिर को हमेशा साफ रखें और पूजा के स्थान की पवित्रता को बनाए रखें। वास्तु के अनुसार, पूजा के लिए उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण को सबसे श्रेष्ठ माना गया है। यदि आप शिवलिंग या शिव परिवार की तस्वीर को घर के ईशान कोण में स्थापित करते हैं, तो इससे घर में सुख-समृद्धि का वास होता है और मानसिक शांति बनी रहती है। सावन के इस पावन काल में स्वच्छता और नियमों का पालन करके आप शिव जी की असीम कृपा के पात्र बन सकते हैं।
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