हिमाचल में मॉनसून की तबाही
हिमाचल प्रदेश में इस बार मॉनसून ने खासी तबाही मचाई है। राज्य में मॉनसून का आगमन देरी से हुआ था, जिसने 30 जून को प्रदेश में दस्तक दी थी। तभी से लेकर अब तक बारिश, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं ने राज्य के जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। राज्य आपदा संचालन केंद्र की 6 अगस्त की शाम तक की रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि के दौरान 142 लोगों की जान जा चुकी है और प्रदेश को 797.87 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक क्षति हुई है। मौसम विभाग ने अगले एक सप्ताह तक राज्य में और बारिश होने की चेतावनी जारी की है, जिससे लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
मौत और घायलों के आंकड़े
आंकड़ों पर नजर डालें तो 30 जून से 6 अगस्त के बीच प्राकृतिक आपदाओं के कारण 64 लोगों की मृत्यु हुई है, जबकि इसी समय अंतराल में सड़क हादसों में 78 लोगों ने अपनी जान गंवाई है। इस प्रकार मॉनसून सीजन में कुल मृतकों की संख्या 142 तक पहुंच गई है। इसके अलावा 224 लोग इन हादसों में घायल हुए हैं और अभी भी 3 लोग लापता बताए जा रहे हैं। पशुधन को भी भारी नुकसान हुआ है, जिसमें 194 पशुओं की मृत्यु दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, सबसे अधिक मौतें पेड़ या चट्टान गिरने की घटनाओं में हुई हैं। इनके अलावा भूस्खलन, डूबने, करंट लगने, सांप के काटने और आग लगने जैसी घटनाएं भी काल का ग्रास बनी हैं।
विभागीय नुकसान का ब्यौरा
सरकारी विभागों को मॉनसून की बारिश से भारी आर्थिक मार झेलनी पड़ी है। सबसे अधिक नुकसान लोक निर्माण विभाग (PWD) को हुआ है, जिसकी सड़कें, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे के क्षतिग्रस्त होने से 592.31 करोड़ रुपये की चपत लगी है। जल शक्ति विभाग को 186.84 करोड़ रुपये, बिजली विभाग को 5.30 करोड़ रुपये और स्वास्थ्य विभाग को 2.14 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। लगातार हो रही बारिश के कारण राज्य की पेयजल आपूर्ति, विद्युत व्यवस्था और परिवहन सेवा पर भी गहरा असर पड़ा है।
निजी संपत्तियों पर असर
मॉनसून की मार निजी संपत्तियों पर भी स्पष्ट दिखाई दे रही है। आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में 2 मकान पूरी तरह से ढह गए हैं, जबकि 568 मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। निजी ढांचे के नुकसान में 194 गौशालाएं, 90 दुकानें और अन्य निर्माण शामिल हैं। कृषि और बागवानी क्षेत्रों को भी लाखों रुपये की क्षति हुई है, जिससे बागवानों और किसानों की आजीविका प्रभावित हुई है। हाल ही में कांगड़ा में दादी-पोती के मकान गिरने से घायल होने की घटना ने सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं, जबकि किन्नौर के निगुलसरी में लैंडस्लाइड के कारण नेशनल हाईवे 16 घंटे तक बाधित रहा।
जिलों की स्थिति
प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से सबसे अधिक 14 मौतें लाहौल-स्पीति में दर्ज की गई हैं। इसके बाद कांगड़ा में 11, कुल्लू में 8, शिमला में 8, मंडी में 7 और चंबा जिले में 7 लोगों की जान गई है। सड़क दुर्घटनाओं के मामले में भी कांगड़ा, कुल्लू, शिमला और मंडी सबसे अधिक प्रभावित जिलों में गिने जा रहे हैं। मौसम विभाग का अनुमान है कि 12 अगस्त तक राज्य में भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। यद्यपि यह राहत की बात कही जा रही है कि पिछले कुछ वर्षों की तुलना में इस साल मॉनसून ने उतनी भीषण तबाही नहीं मचाई है, लेकिन फिर भी बुनियादी ढांचे और जनहानि का आंकड़ा चिंताजनक बना हुआ है।
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