गुरुवार के नियम: देवगुरु बृहस्पति को प्रसन्न रखना है तो भूलकर भी न करें ये गलतियां

सनातन धर्म में गुरुवार का दिन देवगुरु बृहस्पति और भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन कुछ विशेष कार्यों और आदतों से परहेज करना आवश्यक है ताकि जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे।

गुरुवार का धार्मिक महत्व

सनातन परंपरा में सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित होता है। इसमें से गुरुवार का दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की आराधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है। ज्योतिष विज्ञान में गुरु ग्रह को ज्ञान, धन, संतान, विवाह, सम्मान और सौभाग्य का प्रतिनिधि माना गया है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत स्थिति में हों, तो उसे जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिलती है। इसके विपरीत, गुरु के कमजोर होने पर जीवन में कई तरह की आर्थिक और पारिवारिक बाधाएं उत्पन्न होने लगती हैं। इसलिए गुरुवार के दिन कुछ खास सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है ताकि देवगुरु की कृपा बनी रहे।

बाल और नाखून काटने से परहेज

धार्मिक मान्यताओं के आधार पर गुरुवार के दिन बाल कटवाना, दाढ़ी बनाना या नाखून काटना वर्जित माना गया है। ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से कुंडली में गुरु ग्रह की शुभता में कमी आती है। इसके चलते व्यक्ति को आर्थिक तंगी और पारिवारिक कलह का सामना करना पड़ सकता है। इतना ही नहीं, जो लोग इस दिन का पालन नहीं करते, उन्हें संतान से संबंधित कष्टों या जीवन में होने वाले मंगल कार्यों में अड़चनों का सामना करना पड़ सकता है।

वस्त्रों की धुलाई और स्वच्छता के नियम

गुरुवार के दिन घर में कपड़े धोने और फर्श पर पोंछा लगाने जैसे कार्यों से भी परहेज करना चाहिए। विशेष रूप से पीले रंग के वस्त्रों का अनादर करना गुरु को नाराज कर सकता है। घर में पोंछा लगाने से गुरु ग्रह की स्थिति कमजोर होती है। साथ ही, इस दिन विवाद करने या किसी का अपमान करने से भी बचना चाहिए, क्योंकि इससे घर की सकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है और क्लेश बढ़ता है।

केले के पेड़ का सम्मान

गुरुवार के दिन केले के पेड़ को काटना या उसे नुकसान पहुंचाना अशुभ माना गया है। केले का पौधा भगवान विष्णु और बृहस्पति देव का स्वरूप माना जाता है। इस दिन केले के पेड़ की विधिवत पूजा करना, उस पर जल अर्पित करना और दीपक जलाना अत्यंत फलदायी होता है। इससे घर में सुख-समृद्धि का वास होता है और दरिद्रता दूर होती है।

यात्रा संबंधी वर्जनाएं

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, गुरुवार को कुछ विशिष्ट दिशाओं में यात्रा करना शुभ नहीं माना जाता। विशेष रूप से दक्षिण, पूर्व और नैऋत्य कोण में यात्रा करने से बचना चाहिए। ऐसा इसलिए है क्योंकि इन दिशाओं में दिशाशूल रहता है। यदि किसी अपरिहार्य स्थिति में यात्रा करना आवश्यक हो, तो घर से निकलते समय दही और जीरे का सेवन करना शुभ माना जाता है, जिससे यात्रा की बाधाएं कम हो जाती हैं।

खान-पान से जुड़े नियम

गुरुवार के दिन आहार को लेकर भी विशेष नियम बताए गए हैं। इस दिन भोजन में ऊपर से नमक डालकर खाना पूरी तरह वर्जित है, क्योंकि यह गुरु को अस्त करने के समान माना गया है। इससे स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है और कार्यों में बाधाएं आती हैं। इसके अतिरिक्त इस दिन केला, दूध और खिचड़ी का सेवन करना भी मना किया गया है, क्योंकि इन्हें बृहस्पति देव से जोड़कर देखा जाता है।

किन वस्तुओं की खरीदारी न करें

गुरुवार के दिन कुछ विशेष चीजों को खरीदना भी वर्जित है। इस दिन धारदार वस्तुएं जैसे चाकू, कैंची या बर्तन नहीं खरीदने चाहिए। साथ ही, पूजा-पाठ से जुड़ी सामग्री या आंखों से संबंधित वस्तुओं की खरीद से भी परहेज करना चाहिए। इसके अलावा, जो लोग पिता, दादा या गुरु का अपमान करते हैं, उन्हें भी भारी परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।

गुरु ग्रह को मजबूत करने के उपाय

यदि आप अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना चाहते हैं, तो गुरुवार के दिन भगवान विष्णु की पूजा करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। 'ॐ बृं बृहस्पतये नमः' मंत्र का जाप करना मन की शांति और गुरु की कृपा प्राप्ति के लिए बेहद प्रभावी है। इसके अलावा, जरूरतमंदों को पीली वस्तुएं जैसे कि चने की दाल, हल्दी, पीले फल या पीले वस्त्रों का दान करना बहुत शुभ माना जाता है। यदि आप इन नियमों का पालन श्रद्धा और नियमपूर्वक करते हैं, तो करियर, शिक्षा, विवाह और आर्थिक जीवन से जुड़ी सभी समस्याएं धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं।

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