केतन हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस का बड़ा कदम
पुणे में हुए केतन हत्याकांड की जांच अब एक नए और वैज्ञानिक मोड़ पर पहुंच गई है। इस केस में महाराष्ट्र पुलिस ने एक ऐसी तकनीक का उपयोग करने का फैसला किया है, जिसे दुनिया भर में खुफिया एजेंसियां अपनी सबसे सटीक जांच के लिए जानी जाती हैं। चर्चा है कि जिस प्रकार अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने ओसामा बिन लादेन की पहचान पक्की करने के लिए एक विशेष वैज्ञानिक पद्धति का उपयोग किया था, उसी तरह अब पुणे पुलिस भी चेतन चौधरी नामक आरोपी की शिनाख्त सुनिश्चित करने के लिए 'गेट एनालिसिस' यानी चाल के वैज्ञानिक अध्ययन का सहारा लेगी।
सीआईए वाली तकनीक से पहचान का आधार
मामले की गंभीरता यह है कि केतन हत्याकांड से जुड़े सीसीटीवी फुटेज में मुख्य आरोपी चेतन चौधरी पूरी तरह से हुडी के साये में ढका हुआ नजर आ रहा है। आरोपी ने जिस तरीके से खुद को छिपा रखा है, उसके कारण उसका चेहरा पहचानना पुलिस के लिए अब तक की सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। पुलिस को डर है कि अदालत में चेहरा स्पष्ट न होने के कारण आरोपी बरी हो सकता है। इसी बाधा को पार करने के लिए जांचकर्ताओं ने अब सीआईए की उस प्रसिद्ध ट्रिक का रुख किया है, जिसने सालों पहले एबटाबाद में छिपे ओसामा बिन लादेन की पहचान पर पक्की मुहर लगाई थी। उस समय सीआईए ने ओसामा के चलने के तरीके यानी उसके गेट एनालिसिस के माध्यम से यह सुनिश्चित किया था कि वहां मौजूद व्यक्ति वही है, जिसे वे तलाश रहे हैं।
क्या है गेट एनालिसिस और कैसे काम करती है यह पद्धति
गेट एनालिसिस का अर्थ है किसी व्यक्ति के चलने-फिरने के ढंग का बारीकी से वैज्ञानिक अध्ययन करना। विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया में हर इंसान की चाल उसके फिंगरप्रिंट की तरह ही अद्वितीय होती है। इस प्रक्रिया में पुलिस के फोरेंसिक एक्सपर्ट्स सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण करते हैं। इसमें देखा जाता है कि संबंधित व्यक्ति किस गति से चलता है, उसके कदमों के बीच की दूरी कितनी है, चलते समय उसके शरीर का संतुलन कैसा है और हाथों व पैरों की गति किस दिशा में हो रही है।
इंसान की चाल कई कारकों से प्रभावित होती है, जैसे उसकी शारीरिक बनावट, उम्र, शरीर का वजन, पुरानी चोटें, या फिर फुटवियर का प्रकार। कई बार लंबे समय तक एक ही तरह के जूते पहनने या रोजमर्रा की आदतों के कारण व्यक्ति के चलने का तरीका एक विशिष्ट पैटर्न में बदल जाता है। ये ऐसे बारीक पहलू हैं जिन्हें कोई अपराधी चाहकर भी पूरी तरह से नियंत्रित नहीं कर सकता। चाहे चेहरे को हुडी से ढका गया हो या मुखौटा लगाया गया हो, शरीर का संचालन यानी चाल का पैटर्न अमूमन वैसा ही रहता है जैसा अपराधी का सामान्य जीवन में होता है।
जांच की प्रक्रिया
इस तकनीक के तहत विशेषज्ञों की टीम सीसीटीवी फुटेज को कई बार बारीकी से देखती है। आवश्यकता पड़ने पर वीडियो को स्लो मोशन में चलाया जाता है और फ्रेम-बाय-फ्रेम विश्लेषण किया जाता है। यदि पुलिस के पास संदिग्ध पहले से हिरासत में हो, तो उससे वही कपड़े और जूते पहनकर चलने को कहा जाता है जो सीसीटीवी में दिख रहे हैं। इससे यह मिलान किया जाता है कि सीसीटीवी में दिखने वाला व्यक्ति और संदिग्ध व्यक्ति की शारीरिक क्रियाएं कितनी समान हैं। जब फिंगरप्रिंट या आवाज जैसे साक्ष्य नहीं मिल पाते, तब यह तकनीक अदालत में आरोपी को दोषी साबित करने के लिए एक मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण का काम करती है।
सजा दिलाने में क्यों अहम है यह कदम
केतन हत्याकांड में पुलिस के सामने एकमात्र बाधा यह साबित करना है कि लोहगढ़ किले में सिया के साथ जाने वाला वह संदिग्ध व्यक्ति निश्चित रूप से चेतन चौधरी ही है। पुलिस को उम्मीद है कि गेट एनालिसिस की रिपोर्ट अदालत में यह साबित कर देगी कि सीसीटीवी फुटेज में दिख रहा व्यक्ति कोई और नहीं, बल्कि चेतन चौधरी ही है। यह वैज्ञानिक रिपोर्ट अभियोजन पक्ष के लिए एक पुख्ता सबूत साबित हो सकती है, जिससे आरोपी को उसके किए गए गुनाह की सही सजा दिलाई जा सकेगी। महाराष्ट्र पुलिस की यह पहल आधुनिक फोरेंसिक विज्ञान का उपयोग करके न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
https://hindi.news18.com/news/maharashtra/pune-ketan-murder-case-cia-gait-analysis-chetan-chaudhary-identification-osama-bin-laden-technique-maharashtra-pune-police-10619376.html