FIFA वर्ल्ड कप 2026: 40 साल का लंबा इंतजार खत्म, मेक्सिको ने इक्वाडोर को हराकर प्री-क्वार्टर फाइनल में बनाई जगह

मेक्सिको की फुटबॉल टीम ने फीफा वर्ल्ड कप 2026 में इक्वाडोर को 2-0 से हराकर नॉकआउट दौर में प्रवेश कर लिया है, जिससे टीम का 40 साल पुराना सूखा समाप्त हो गया है।

40 साल बाद नॉकआउट जीत का स्वाद

फीफा वर्ल्ड कप 2026 में मेक्सिको की टीम ने फुटबॉल इतिहास के पन्नों में एक नया अध्याय लिख दिया है। टीम ने 40 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद टूर्नामेंट के नॉकआउट चरण में जीत दर्ज करके इतिहास रच दिया है। राउंड ऑफ 32 के महत्वपूर्ण मुकाबले में मेक्सिको ने इक्वाडोर को 2-0 के अंतर से शिकस्त दी और प्री-क्वार्टर फाइनल (राउंड ऑफ 16) में अपनी जगह पक्की कर ली। इस जीत ने न केवल प्रशंसकों का उत्साह दोगुना कर दिया है, बल्कि टीम के क्वार्टर फाइनल तक पहुंचने की उम्मीदों को भी बल दिया है।

मौसम की बाधा और शानदार शुरुआत

मैच से पहले खराब मौसम और बिजली गिरने के खतरे के कारण खेल को 1 घंटे की देरी से शुरू करना पड़ा। हालांकि, जब रेफरी ने सीटी बजाई, तो मैदान पर मेक्सिको का दबदबा देखते ही बनता था। अपनी पारंपरिक हरे रंग की जर्सी पहने हजारों समर्थकों के शोर और उत्साह के बीच, जेवियर अगुइरे के मार्गदर्शन में उतरी मेक्सिको की टीम ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया। इक्वाडोर के खिलाड़ी पूरे मैच के दौरान मेक्सिको की हाई-प्रेसिंग रणनीति का कोई ठोस जवाब नहीं ढूंढ पाए।

गोल की बौछार और हाफ टाइम का रोमांच

मैच के 22वें मिनट में मेक्सिको के निरंतर दबाव का परिणाम आखिरकार गोल के रूप में सामने आया। जूलियन क्वीनीयोनेस ने बाईं ओर से शानदार खेल दिखाते हुए बॉक्स के अंदर प्रवेश किया और एक सटीक लो शॉट लगाकर टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी। इसके ठीक 10 मिनट के भीतर, राउल जिमेनेज ने क्वीनीयोनेस के साथ मिलकर बेहतरीन वन-टू पासिंग का प्रदर्शन किया और गेंद को टॉप कॉर्नर में पहुंचाकर स्कोर 2-0 कर दिया। हाफ टाइम होने तक मेक्सिको ने मैच पर अपनी पकड़ इतनी मजबूत कर ली थी कि इक्वाडोर के लिए वापसी करना लगभग असंभव हो गया था।

रक्षात्मक रणनीति और रिकॉर्ड

दूसरे हाफ में इक्वाडोर ने गेंद पर अपना नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन मेक्सिको का डिफेंस आज अभेद्य साबित हुआ। मेक्सिको ने इस वर्ल्ड कप में लगातार 4 मैच बिना कोई गोल खाए पूरे किए हैं, जो उनकी रक्षात्मक मजबूती का प्रमाण है। मैच के अंत में इक्वाडोर के लिए स्थितियां और खराब हो गईं, जब इंजरी टाइम के दौरान उनके डिफेंडर पिएरो हिनकापिए को रेड कार्ड दिखाकर बाहर कर दिया गया। पिएरो ने एक विरोधी खिलाड़ी से बहस करते समय अपने मुंह को ढक लिया था, जिसे फीफा के नए नियमों के अंतर्गत उल्लंघन माना गया।

एज़्टेका का अजेय किला

यह जीत मेक्सिको के लिए केवल एक नॉकआउट जीत नहीं है, बल्कि यह पुरानी यादों और गौरव को फिर से जीवित करने जैसा है। रोचक बात यह है कि मेक्सिको की पिछली नॉकआउट जीत भी इसी स्टेडियम में 1986 में आई थी, जब उन्होंने बुल्गारिया को 2-0 से हराया था। इसके बाद से 'एल ट्री' (मेक्सिको की टीम) लगातार 7 बार नॉकआउट के पहले ही मैच में हारकर बाहर हो गई थी। इस जीत ने उस दर्दनाक सिलसिले को हमेशा के लिए खत्म कर दिया है। इसके साथ ही एज़्टेका स्टेडियम में मेक्सिको का रिकॉर्ड और भी गौरवशाली हो गया है, क्योंकि टीम 2013 के बाद से इस मैदान पर एक भी प्रतिस्पर्धी मैच नहीं हारी है। मेक्सिको सिटी में आयोजित वर्ल्ड कप मैचों में टीम अभी भी अजेय बनी हुई है।

आगे की राह

इस शानदार जीत के साथ, मेक्सिको 1990 में इटली के बाद पहला ऐसा मेजबान देश बन गया है जिसने वर्ल्ड कप में अपने शुरुआती 4 मैच जीते हैं। अब मेक्सिको की नजरें रविवार को होने वाले राउंड ऑफ 16 के मुकाबले पर टिकी हैं, जहां उनका सामना इंग्लैंड या डीआर कॉन्गो में से किसी एक टीम के साथ होगा। प्रशंसकों को उम्मीद है कि टीम इसी लय को बरकरार रखते हुए क्वार्टर फाइनल का सफर तय करेगी।

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