आस्था और इतिहास का केंद्र उज्जैन
मध्य प्रदेश स्थित उज्जैन को विश्व पटल पर बाबा महाकाल की नगरी के रूप में पहचाना जाता है। लेकिन इस शहर की आभा केवल धार्मिक आस्था तक ही सीमित नहीं है। करीब 4 हजार साल पुरानी ऐतिहासिक विरासत को अपने भीतर समेटे यह शहर आज धर्म, अध्यात्म, ज्ञान और व्यापार का एक वैश्विक केंद्र बन चुका है। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर और सांदीपनि आश्रम जैसी पवित्र धरोहरों के साथ-साथ प्राचीन व्यापारिक मार्गों का गौरवशाली इतिहास हर साल 13 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर खींच लाता है।
विरासत की वैश्विक पहचान
उज्जैन की महत्ता केवल मंदिरों या सिंहस्थ महाकुंभ के आयोजनों तक ही सीमित नहीं है। सेवामुक्त आईएएस अधिकारी रविंद्र पस्तोरे के अनुसार, भारत में कई तीर्थ स्थान मौजूद हैं, लेकिन उज्जैन की विशिष्टता इसकी सनातन संस्कृति और हजारों वर्षों की निरंतरता में निहित है। समय के थपेड़ों के बावजूद यहां की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर अक्षुण्ण बनी हुई है। यही कारण है कि दुनिया भर से प्रतिवर्ष 13 करोड़ से अधिक लोग यहां की माटी को नमन करने और इतिहास को करीब से देखने पहुंचते हैं।
खगोल विज्ञान और समय की गणना
धार्मिक नगरी उज्जैन खगोलीय और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। प्राचीन भारत में समय की सटीक गणना, पंचांग निर्माण और ग्रह-नक्षत्रों की चाल का अध्ययन करने का प्रमुख आधार उज्जैन ही था। आधुनिक युग में दुनिया भले ही ग्रीनविच समय को मानक मानती हो, लेकिन भारतीय परंपरा में उज्जैन को ही समय निर्धारण का मूल केंद्र माना जाता रहा है। महाकाल मंदिर के अलावा मंगलनाथ मंदिर, जीवाजी वेधशाला और डोंगला वेधशाला आज भी इस वैज्ञानिक गौरव के जीवंत साक्षी हैं, जो हमें प्राचीन भारत की उन्नत खगोलीय समझ का अहसास कराते हैं।
व्यापारिक संपन्नता का इतिहास
उज्जैन का अतीत व्यापारिक दृष्टि से भी अत्यंत समृद्ध रहा है। ऐतिहासिक तथ्यों पर गौर करें तो यह शहर प्राचीन काल में भारत का एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र था, जहां से देश-विदेश के लिए व्यापारिक गतिविधियां संचालित होती थीं। क्षिप्रा नदी के तटों और गढ़कालिका क्षेत्र में पुरातात्विक उत्खनन के दौरान मिले प्राचीन सिक्के, रोमन शैली के बर्तन और दैनिक जीवन की सामग्री इस बात के पुख्ता प्रमाण हैं कि यहां के व्यापारिक तार दुनिया के अन्य हिस्सों से जुड़े थे। मौर्य काल से भी पहले, उज्जैन प्राचीन व्यापारिक मार्गों का एक मुख्य जंक्शन हुआ करता था। आगरा से निकलने वाले मार्ग जो राजस्थान और गुजरात की ओर जाते थे, और विदिशा, सांची व महेश्वर होते हुए दक्षिण भारत को जोड़ने वाले मार्ग उज्जैन की समृद्धि का आधार थे। इन व्यापारिक संपर्कों ने न केवल नगर को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाया, बल्कि यहां ज्ञान, कला और संस्कृति का भी अनूठा संगम तैयार किया।
पर्यटन की असीम संभावनाएं
आज अवंतिका नगरी उज्जैन में रोजाना लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। महाकाल की अगाध आस्था, प्राचीन व्यापारिक गौरव, खगोल विज्ञान की समृद्धि और शैक्षणिक परंपरा का मेल इसे दुनिया के चुनिंदा शहरों में विशेष दर्जा दिलाता है। यदि इन चारों स्तंभों को और अधिक प्रभावी ढंग से विश्व के समक्ष प्रस्तुत किया जाए, तो उज्जैन साल के बारह महीने एक वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है। फिलहाल, 13 करोड़ से ज्यादा दर्शनार्थियों का यहां आना इस बात का प्रमाण है कि उज्जैन की विरासत आज भी उतनी ही जीवंत है जितनी हजारों साल पहले थी।
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