सांप्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल: गाजियाबाद में 12 साल की मुस्लिम बहन अनिका पिछले 7 वर्षों से हिंदू भाई दिविक को बांध रही हैं राखी

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में रक्षाबंधन के पावन पर्व पर धर्म की दीवारें ढहती नजर आ रही हैं, जहां 12 साल की अनिका अहमद अपने छोटे हिंदू भाई दिविक चौधरी को राखी बांधकर आपसी भाईचारे की मिसाल पेश कर रही हैं।

रक्षाबंधन का त्योहार मुख्य रूप से भाई और बहन के अटूट स्नेह, विश्वास और सुरक्षा के संकल्प का प्रतीक माना जाता है। भारत की सांस्कृतिक विरासत में इस पर्व का एक विशेष स्थान है। वैसे तो यह सनातन परंपरा का हिस्सा है, लेकिन समय-समय पर इस पावन पर्व पर ऐसी कहानियां सामने आती हैं, जो धर्म और मजहब के बंधनों को पूरी तरह से बौना साबित कर देती हैं। आपसी सौहार्द, प्यार और भाईचारे की एक ऐसी ही दिल छू लेने वाली अनूठी कहानी उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से सामने आई है, जहां रहने वाली एक मुस्लिम बेटी हर साल अपने हिंदू भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर देश के सामने सांप्रदायिक एकता की एक बेमिसाल और खूबसूरत तस्वीर पेश कर रही है।

मजहब की सीमाओं से परे भाई-बहन का पवित्र रिश्ता

गाजियाबाद के शास्त्रीनगर इलाके के जीवन विहार की एक आवासीय सोसायटी में रहने वाली 12 साल की अनिका अहमद इस साल भी अपने छोटे हिंदू भाई दिविक चौधरी को राखी बांधने के लिए बेहद उत्साहित हैं। यह सिलसिला केवल इस साल का नहीं है, बल्कि पिछले सात वर्षों से अनिका लगातार इस परंपरा को निभा रही हैं। जीवन विहार सोसायटी में रहने वाले लोग हर साल इस खूबसूरत नजारे के गवाह बनते हैं, जहां एक मुस्लिम बच्ची पूरे विधि-विधान और पारंपरिक तौर-तरीकों के साथ अपने हिंदू भाई के घर पहुंचती है।

हाथों में पूजा की सजी हुई थाली, माथे पर तिलक लगाने के लिए रोली-अक्षत, मिठाई और रंग-बिरंगी राखियां लेकर जब पारंपरिक कपड़ों में सजी-धजी अनिका अपने भाई दिविक के घर की ओर कदम बढ़ाती हैं, तो रास्ते में मिलने वाला हर व्यक्ति उनके इस प्यार को देखकर दंग रह जाता है। सोसायटी के लोग इस छोटी सी बच्ची के स्नेह और दोनों परिवारों के बीच के इस गहरे जुड़ाव की दिल खोलकर तारीफ करते हैं। अनिका इन तारीफों को सुनकर केवल एक प्यारी सी मुस्कान बिखेर देती हैं। वह शायद इस बात की गहराई से अनजान हैं कि उनकी यह छोटी सी कोशिश समाज में कितनी बड़ी सकारात्मक सोच को जन्म दे रही है।

हिंदू परिवारों में अक्सर रक्षाबंधन पर पहनावे और शुभ मुहूर्त को लेकर काफी सतर्कता बरती जाती है, लेकिन अनिका भी इस पर्व को मनाने में किसी भी हिंदू बहन से पीछे नहीं रहती हैं। वे पूरे विधि-विधान का पालन करती हैं। वे भाई के माथे पर कुमकुम और अक्षत का तिलक लगाती हैं, आरती उतारती हैं और फिर कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनका मुंह मीठा कराती हैं। इस त्योहार को दोनों परिवार पूरी श्रद्धा और उमंग के साथ मिलकर मनाते हैं।

साल 2019 में हुई थी इस खूबसूरत सिलसिले की शुरुआत

जीवन विहार में रहने वाले खुर्शीद अहमद और उनकी पत्नी उज्मा अहमद की बेटी अनिका अहमद वर्तमान में आठवीं कक्षा की छात्रा हैं। अनिका अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं और उनका अपना कोई सगा भाई नहीं है। इस प्यारे से रिश्ते की शुरुआत साल 2019 में हुई थी। अनिका की मां उज्मा अहमद ने उस समय को याद करते हुए बताया कि रक्षाबंधन के त्योहार से ठीक पहले सोसायटी में एक गेट-टुगेदर का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में उज्मा अहमद और निकिता चौधरी अपने बच्चों के साथ शामिल हुई थीं।

उस समय निकिता चौधरी के बेटे दिविक चौधरी की उम्र केवल एक वर्ष थी। नन्हें दिविक को देखकर अनिका के मन में एक बहन का प्यार उमड़ पड़ा। उसने अपनी मां उज्मा से बेहद मासूमियत के साथ पूछा, "मम्मा, मेरा तो कोई भाई नहीं है, मैं इस रक्षाबंधन पर किसे राखी बांधूंगी?" बेटी की इस मासूम और दिल को छू लेने वाली बात को सुनकर उज्मा ने अपनी सहेली निकिता से बात की। उन्होंने निकिता से पूछा कि क्या अनिका इस बार उनके एक साल के बेटे दिविक को राखी बांध सकती है? निकिता ने इस बात को बेहद खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया।

उस समय दोनों सहेलियों को लगा था कि यह सिर्फ एक सामान्य बातचीत थी, लेकिन जब रक्षाबंधन का दिन आया, तो निकिता खुद अपने एक साल के बेटे को लेकर उज्मा के घर पहुंच गईं ताकि अनिका उसे राखी बांध सके। उस दिन अनिका की खुशी का ठिकाना नहीं रहा और उसने पूरे चाव से अपने छोटे भाई को राखी बांधी। साल 2020 से अनिका ने खुद ही थाली सजाकर दिविक के घर जाकर राखी बांधने की इस परंपरा को आगे बढ़ाया, जो आज भी अटूट रूप से जारी है।

अब छोटे भाई दक्षित को भी बांधती हैं रक्षा सूत्र

समय के साथ यह रिश्ता और भी ज्यादा गहरा होता चला गया। दिविक की मां निकिता चौधरी ने बताया कि दिविक के बाद उनके घर में एक और बेटे का जन्म हुआ, जिसका नाम दक्षित रखा गया। अब अनिका सिर्फ दिविक को ही नहीं, बल्कि उसके छोटे भाई दक्षित को भी उसी प्यार और अधिकार के साथ रक्षा सूत्र बांधती हैं। निकिता कहती हैं कि अनिका सिर्फ नाम के लिए बड़ी बहन नहीं है, बल्कि वह एक बड़ी बहन के अपने सभी कर्तव्यों को बहुत ही जिम्मेदारी के साथ निभाती है।

दोनों बच्चे गाजियाबाद के द गुरुकुल स्कूल में पढ़ाई करते हैं। अनिका जहां आठवीं कक्षा में पढ़ती हैं, वहीं दिविक अभी दूसरी कक्षा का छात्र है। स्कूल जाते समय स्कूल बस में दिविक का ध्यान रखने से लेकर स्कूल परिसर के भीतर भी अनिका उसकी सुरक्षा और सुविधा का पूरा ख्याल रखती है। हालांकि दिविक अभी उम्र में काफी छोटा है, लेकिन वह अपनी बड़ी बहन अनिका से बेहद प्यार करता है। परिवार के सदस्यों का कहना है कि जैसे-जैसे दिविक बड़ा होगा, वह भी अपनी बड़ी बहन के प्रति अपने कर्तव्यों को समझेगा और जीवन भर उसका ख्याल रखेगा।

माताओं का संकल्प: उम्र भर बनी रहेगी यह अटूट डोर

इस खूबसूरत रिश्ते को केवल बच्चों तक ही सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि दोनों परिवारों की माताओं ने भी इस रिश्ते को जीवन भर निभाने का एक बड़ा संकल्प लिया है। अनिका की मां उज्मा और दिविक की मां निकिता ने मिलकर यह तय किया है कि जब तक ये बच्चे पूरी तरह से बड़े और आत्मनिर्भर नहीं हो जाते, तब तक इस राखी की परंपरा को जारी रखने और बच्चों को हर साल आपस में मिलाने की जिम्मेदारी उनकी होगी। उनका मानना है कि जब ये बच्चे बड़े हो जाएंगे, तो वे खुद इस प्रेम, विश्वास और सौहार्द्र की विरासत को आगे बढ़ाएंगे।

जब भी रक्षाबंधन का अवसर आता है, तो न केवल दोनों परिवार बल्कि दिविक के दादा-दादी भी अनिका का अपने घर पर बेहद गर्मजोशी और स्नेह के साथ स्वागत करते हैं। पूरी सोसायटी में इस रिश्ते की चर्चा होती है और हर कोई इस बात की सराहना करता है कि कैसे दो अलग-अलग धर्मों के परिवार अपने बच्चों को प्यार, एकता और आपसी सम्मान की ऐसी बेहतरीन सीख दे रहे हैं। यह कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि इंसानी रिश्ते और त्योहार किसी एक मजहब की बंदिशों में नहीं बंधे होते, बल्कि वे दिलों को जोड़ने का काम करते हैं।

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