कोटा का 45 साल पुराना बुक मार्केट: 70 प्रतिशत तक सस्ती किताबों का खजाना, खाली हाथ नहीं लौटता कोई छात्र

राजस्थान के कोटा शहर में स्थित एक पुराना बुक मार्केट विद्यार्थियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जहां प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें 30 से 70 प्रतिशत तक की छूट पर उपलब्ध हैं। रामपुरा स्थित इस बाजार में हर साल हजारों छात्र अपनी पढ़ाई का खर्च कम करने के लिए पहुंचते हैं।

कोटा की कोचिंग सिटी वाली पहचान से इतर है यह खास बाजार

राजस्थान का कोटा शहर देशभर में कोचिंग के एक बड़े केंद्र के तौर पर जाना जाता है, लेकिन यहां की एक और पहचान है जो छात्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। वह है रामपुरा स्थित 45 साल पुराना सेकेंड हैंड किताबों का बाजार। यह बाजार केवल किताबों की बिक्री का केंद्र नहीं है, बल्कि उन हजारों छात्रों के लिए एक बड़ा सहारा है जो अपने सीमित बजट में पढ़ाई का सपना पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं। इस मार्केट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां आने वाला कोई भी छात्र कभी खाली हाथ नहीं लौटता है।

ज्ञान के सागर जैसा विशाल संग्रह

रामपुरा में आर्य समाज रोड पर स्थित यह बाजार किताबों का एक ऐसा खजाना है, जहां हर विषय की पुस्तकें मौजूद हैं। यहां जेईई (JEE), नीट (NEET), यूपीएससी (UPSC), आरएएस (RAS), एसएससी (SSC) और बैंकिंग जैसी प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सामग्री प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। इसके अलावा, स्कूल और कॉलेज के पाठ्यक्रम की किताबों के साथ-साथ धार्मिक, साहित्यिक और सामान्य ज्ञान की दुर्लभ पुस्तकें भी यहां आसानी से मिल जाती हैं। कई बार बाजार से गायब हो चुकी पुरानी किताबें भी यहां तलाशने पर प्राप्त हो जाती हैं, जो शोधकर्ताओं और उत्साही पाठकों के लिए किसी आश्चर्य से कम नहीं है।

छात्रों के लिए बचत का बड़ा जरिया

इस बाजार की लोकप्रियता का सबसे मुख्य कारण किताबों की कम कीमत है। यहां नई किताबों के मुकाबले सेकेंड हैंड किताबें 30 से 70 प्रतिशत तक कम दामों पर मिल जाती हैं। अप्रैल से लेकर जुलाई के महीनों में यहां छात्रों की भारी भीड़ रहती है, क्योंकि इसी दौरान नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत होती है और विभिन्न परीक्षाओं के लिए नई सामग्री की आवश्यकता होती है। केवल कोटा के स्थानीय छात्र ही नहीं, बल्कि हाड़ौती क्षेत्र और दूर-दराज के अन्य राज्यों से आए विद्यार्थी भी अपनी पढ़ाई का पूरा इंतजाम करने के लिए इसी बाजार का रुख करते हैं। कम खर्च में पढ़ाई की सभी जरूरी सामग्री मिल जाने से छात्रों को काफी आर्थिक राहत मिलती है।

45 वर्षों का अटूट विश्वास

इस क्षेत्र में कई दशक से कारोबार कर रहे स्टूडेंट बुक डिपो के संचालक जितेंद्र कुमार सैनी बताते हैं कि उनका परिवार पिछले 45 सालों से इस पेशे से जुड़ा है। उन्होंने विरासत में मिली इस जिम्मेदारी को न केवल संभाला है, बल्कि छात्रों के भरोसे को भी बरकरार रखा है। जितेंद्र का कहना है कि उनकी दुकान पर स्कूल से लेकर यूपीएससी तक की हर जरूरी किताब उपलब्ध रहती है। वे गर्व से कहते हैं कि उन्होंने अपने पूरे करियर में किसी भी छात्र को कभी निराश नहीं किया है। यदि कोई विशेष किताब उनके पास उपलब्ध नहीं होती है, तो वे उसे कहीं न कहीं से मंगवाकर छात्र को उपलब्ध कराने के लिए पूरी कोशिश करते हैं। यही समर्पण और भरोसा है जो पिछले चार दशकों से छात्रों को इस बाजार से जोड़कर रखे हुए है।

बाय-बैक और एक्सचेंज की अनूठी सुविधा

इस बाजार की एक और बड़ी विशेषता इसकी बाय-बैक और एक्सचेंज सुविधा है। छात्र अपना कोर्स या सत्र पूरा करने के बाद पुरानी किताबें वापस दुकानदारों को बेच सकते हैं। इसके बदले में वे अपनी जरूरत के अनुसार अगली कक्षाओं की किताबें खरीद लेते हैं। इस प्रक्रिया से छात्रों का खर्च तो कम होता ही है, साथ ही किताबों का पुन: उपयोग भी सुनिश्चित होता है, जो कि पर्यावरण की दृष्टि से भी अच्छा है। दुकानदार किताबों की स्थिति और उनकी उपयोगिता को देखकर उचित मूल्य तय करते हैं, जिससे छात्रों को आर्थिक रूप से लाभ मिलता है।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए हर प्रकाशन उपलब्ध

कोटा में हर साल हजारों की संख्या में विद्यार्थी विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने आते हैं। इस भारी मांग को देखते हुए यहां सभी बड़े प्रकाशनों की किताबें, नोट्स, टेस्ट सीरीज और रेफरेंस बुक्स का व्यापक संग्रह हमेशा उपलब्ध रहता है। जैसे ही किसी परीक्षा के सिलेबस में बदलाव होता है या नया अपडेट आता है, नई किताबें तुरंत इस बाजार में उपलब्ध हो जाती हैं। यह तत्परता और उपलब्धता ही है जो कोटा के इस बुक मार्केट को देशभर के छात्रों के बीच एक खास और भरोसेमंद मुकाम देती है।

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