राज्यसभा में 8 नए सदस्यों के शपथ ग्रहण से NDA का पलड़ा हुआ भारी, विधायी कामकाज में मिलेगी बड़ी बढ़त

उच्च सदन में आठ नए सदस्यों के शपथ लेने के साथ ही एनडीए का संख्या बल 141 तक पहुंच गया है। इस मजबूती के साथ अब सरकार के लिए महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराना और विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाना पहले से कहीं अधिक सरल हो गया है।

संसद में एनडीए की बढ़ी ताकत

राज्यसभा के उच्च सदन में सत्ता पक्ष का दबदबा और अधिक बढ़ गया है। सोमवार को आठ नवनिर्वाचित सदस्यों ने शपथ ग्रहण की, जिसके बाद भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए की कुल सदस्य संख्या 141 के जादुई आंकड़े को पार कर गई है। जानकारों का मानना है कि इस बढ़ोतरी के साथ ही सरकार अब अपने विधायी एजेंडे को बिना किसी खास अवरोध के आगे ले जाने की स्थिति में है। संविधान संशोधन जैसे जटिल और महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने की दिशा में भी सरकार की राह अब पहले के मुकाबले काफी आसान नजर आ रही है।

शपथ ग्रहण समारोह और विशिष्ट प्रक्रिया

राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने नवनिर्वाचित आठ सदस्यों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस दौरान एक खास दृश्य भी देखने को मिला जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सभापति के कक्ष में संविधान की प्रति हाथ में लेकर हिंदी भाषा में अपनी शपथ पूरी की। उनके अतिरिक्त अन्य सात नवनिर्वाचित सदस्यों ने सदन के भीतर शपथ ग्रहण की। इन नए सदस्यों में भारतीय जनता पार्टी के तरुण चुघ, गुजरात से जितेंद्र मेघजीभाई कंजारिया और मानसिंह मेरामन परमार, कर्नाटक से एम. नागराजा, महाराष्ट्र से राजेंद्र हीरालाल जैन, मणिपुर से अधिकारीमयुम शारदा देवी तथा राजस्थान से अलका सिंह शामिल हैं। शपथ ग्रहण के इस महत्वपूर्ण अवसर पर सदन के नेता जेपी नड्डा, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू, उपसभापति हरिवंश और कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल भी उपस्थित रहे। सभापति ने सभी सदस्यों का स्वागत करते हुए उनके सफल संसदीय कार्यकाल की मंगलकामना की।

गणित और बहुमत की स्थिति

वर्तमान में 242 सदस्यीय राज्यसभा में एनडीए के सांसदों की संख्या 141 हो गई है। यदि इसमें 10 मनोनीत और निर्दलीय सदस्यों के समर्थन को भी जोड़ दिया जाए, तो सरकार के पक्ष में कुल 151 सदस्यों का बल दिखाई देता है। यह संख्या सदन में साधारण बहुमत के लिए आवश्यक आंकड़े से कहीं अधिक है, जो सरकार को सामान्य विधेयकों को पारित कराने में बड़ी राहत प्रदान करता है। हालांकि, संविधान संशोधन के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत की स्थिति अभी भी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है। इसके बावजूद राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि भविष्य में बीजू जनता दल यानी बीजद और वाईएसआर कांग्रेस जैसे दलों का समर्थन मिलता है, तो सरकार इस कठिन लक्ष्य को भी आसानी से भेद सकेगी। इन दलों का इतिहास रहा है कि उन्होंने पूर्व में भी कई अहम विधेयकों पर सरकार का साथ दिया है। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल की तीन रिक्त सीटों पर होने वाले उपचुनावों के परिणाम भी सत्ता पक्ष के लिए अनुकूल साबित हो सकते हैं।

बड़े सुधारों की तैयारी

बढ़े हुए संख्या बल को देखते हुए माना जा रहा है कि केंद्र सरकार भविष्य में कुछ बड़े कदम उठा सकती है। इनमें विशेष रूप से महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने और लोकसभा सीटों के पुनर्निर्धारण जैसे बड़े विधायी सुधार शामिल हैं। हालांकि, इन बड़े संविधान संशोधन विधेयकों के लिए सरकार को अभी भी दो-तिहाई बहुमत की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है, जिसके लिए उसे अन्य क्षेत्रीय दलों के साथ तालमेल बिठाने की आवश्यकता बनी रहेगी।

विपक्ष की भूमिका और मल्लिकार्जुन खरगे का संकल्प

इस बीच, मल्लिकार्जुन खरगे को फिर से राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद पर मान्यता मिल गई है। कर्नाटक से लगातार दूसरी बार उच्च सदन के लिए चुने गए खरगे ने अपनी शपथ के बाद अपने इरादे स्पष्ट कर दिए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि नेता प्रतिपक्ष के रूप में उनकी प्राथमिक भूमिका जनता की आवाज को मुखर करना और उनकी चिंताओं को मजबूती से संसद के पटल पर रखना होगी। उन्होंने सरकार को जनहित के मुद्दों पर जवाबदेह बनाने का संकल्प दोहराया है। साथ ही उन्होंने सोनिया गांधी, राहुल गांधी, कांग्रेस सांसदों, पार्टी कार्यकर्ताओं और इंडिया गठबंधन के तमाम सहयोगी नेताओं का अपने प्रति विश्वास जताने के लिए आभार व्यक्त किया है।

https://hindi.news18.com/news/nation/nda-strength-increases-in-rajya-sabha-making-constitutional-amendment-path-easier-ws-l-10614419.html