स्टार्टअप की दुनिया में बढ़ रहा है युवाओं का रुझान
आजकल का दौर स्टार्टअप और नए प्रयोगों का है। बिहार जैसे राज्यों में भी अब युवा बाहर जाकर नौकरी करने के बजाय अपने ही इलाके में छोटे उद्योग लगाने में ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं। स्टार्टअप शुरू करते समय हर युवा के मन में उत्साह होता है, लेकिन हकीकत यह है कि इनमें से बड़ी संख्या में उपक्रम एक साल पूरा होते-होते दम तोड़ देते हैं। कई बार लोग सोचते हैं कि उन्होंने उद्योग लगाया और देखते ही देखते वह बंद हो गया, लेकिन इसके पीछे की वजहों पर बहुत कम लोग गहराई से गौर करते हैं। आखिर क्या कारण है कि शानदार शुरुआत के बाद भी बिजनस फेल हो जाते हैं?
बिजनस का कड़वा सच
उद्यमी नन्दीकेश, जो खुद इस संघर्ष भरे दौर से गुजर चुके हैं, बताते हैं कि उद्योग चलाना बहुत ही नाजुक काम है। उन्होंने इसकी तुलना कांच से करते हुए कहा कि इसे जितना सहेज कर और योजनाबद्ध तरीके से चलाया जाएगा, वह उतना ही सुरक्षित रहेगा। नन्दीकेश के अनुभव के अनुसार, अक्सर युवा शुरुआत में लोन के पैसे के दम पर बिजनस शुरू तो कर लेते हैं, लेकिन अगले वित्त वर्ष की चुनौतियों के लिए तैयार नहीं होते।
क्यों फेल हो जाते हैं युवा उद्यमी
शुरुआत के साल में उद्यमी के पास पूंजी होती है और लोन चुकाने का तत्काल दबाव भी कम होता है। इस दौर में वे बिना किसी ठोस रणनीति के भारी मात्रा में सामान का उत्पादन शुरू कर देते हैं। समस्या तब खड़ी होती है जब सामान तो तैयार हो जाता है लेकिन उसकी सही मार्केटिंग नहीं हो पाती। बाजार में माल न बिकने के कारण पैसा वापस नहीं आता।
नतीजा यह होता है कि एक तरफ बैंक के लोन का दबाव बढ़ने लगता है, तो दूसरी तरफ बिजली का बिल और वर्करों की मजदूरी का बोझ भी सिर पर आ जाता है। जब पैसे का प्रवाह यानी कैश फ्लो रुक जाता है, तो उद्यमी कर्ज लेकर या दोस्तों से उधार लेकर काम चलाने की कोशिश करते हैं। ऐसी स्थिति में, एक तरफ लोन की किस्तें और दूसरी तरफ बिजली बिल और वर्कर का वेतन चुकाने के दबाव में आकर युवा हार मान लेते हैं और अपना स्टार्टअप बंद करने पर मजबूर हो जाते हैं।
सफलता के लिए इन 4 बातों का रखें खास ख्याल
उद्यमी नन्दीकेश ने उन युवाओं के लिए कुछ महत्वपूर्ण टिप्स दिए हैं जो अपने बिजनस को एक साल से अधिक समय तक सफलतापूर्वक चलाना चाहते हैं:
- बाजार की परख: कोई भी उद्योग लगाने से पहले यह जरूर देखें कि आपके आसपास उसका मार्केट है या नहीं। यदि आपके उत्पाद का बाजार मौजूद है, तो वहां मौजूद प्रतियोगिता का विश्लेषण जरूर करें।
- मांग के अनुसार उत्पादन: कभी भी शुरुआत में ही भारी मात्रा में माल तैयार न करें। बाजार की वास्तविक मांग के अनुसार ही उत्पादन करें, ताकि आपकी पूंजी अनावश्यक रूप से फंसे नहीं और सामान वेस्ट न हो।
- प्रतिस्पर्धा को समझें: अगर आपको लगता है कि आपका माल बाजार में आसानी से बिक सकता है और ग्राहकों की जरूरत को पूरा करता है, तभी उस उद्योग को उस स्थान पर शुरू करें।
- वित्तीय अनुशासन: मार्केटिंग की कमी बिजनस को मार देती है। इसलिए विज्ञापन और बिक्री पर उतना ही ध्यान दें जितना उत्पादन पर। कैश फ्लो का प्रबंधन ही एक छोटे स्टार्टअप को बड़ी कंपनी में बदलने की कुंजी है।
इन छोटी-छोटी बातों को अपनाकर और योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़कर युवा अपने स्टार्टअप को न केवल बंद होने से बचा सकते हैं, बल्कि उसे विकास की नई ऊंचाइयों पर भी ले जा सकते हैं।
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