सोनम रघुवंशी को जमानत पर मेघालय हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी: पुलिस की चूक और कानूनी दांव-पेंच का पूरा ब्योरा

इंदौर के चर्चित हनीमून मर्डर केस की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मेघालय हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है। सुनवाई के दौरान पुलिस की बड़ी लापरवाही और दस्तावेजी गलतियां चर्चा का केंद्र बनी रहीं।

मेघालय हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

इंदौर के बहुचर्चित 'हनीमून मर्डर' मामले में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मेघालय हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने शिलॉन्ग की निचली अदालत द्वारा दी गई जमानत को बरकरार रखा है और राज्य सरकार की याचिका को खारिज कर दिया। जस्टिस डब्ल्यू डिएंगडोह की बेंच ने इस मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए। करीब 10 दिनों तक दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद, अदालत ने 10 जून को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिस पर अब मुहर लग गई है।

पुलिस की चूक बनी जमानत का आधार

सोनम रघुवंशी को शिलॉन्ग के एडिशनल डीसी (ज्यूडिशियल) ने जमानत दी थी। इस जमानत का सबसे बड़ा आधार पुलिस द्वारा बरती गई प्रक्रियात्मक लापरवाही थी। अदालत ने पाया कि गिरफ्तारी के समय पुलिस ने जो चेकलिस्ट और केस डायरी के दस्तावेज तैयार किए थे, उनमें गंभीर त्रुटियां थीं। पुलिस ने हत्या से संबंधित सेक्शन 103(1) BNS के स्थान पर गलती से सेक्शन 403(1) BNS का उल्लेख किया था। इसी तकनीकी चूक को अदालत ने आरोपी के पक्ष में महत्वपूर्ण माना क्योंकि पुलिस गिरफ्तारी के सही और स्पष्ट कारण बताने में विफल रही थी।

जज और एडवोकेट जनरल के बीच तीखी बहस

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल और सीनियर एडवोकेट अमित कुमार उपस्थित हुए। उन्होंने तर्क दिया कि यह केवल एक टाइपिंग की गलती थी, जिसका आरोपी पर कोई वास्तविक प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा। अमित कुमार का कहना था कि सोनम को अपने ऊपर लगे हत्या के आरोपों की पूरी जानकारी थी, जिसके प्रमाण के रूप में गिरफ्तारी मेमो और रिमांड आदेशों पर उनके हस्ताक्षर देखे जा सकते हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि मामूली त्रुटियों के आधार पर जमानत नहीं दी जानी चाहिए।

दस्तावेजों में लापरवाही पर अदालत का रुख

सुनवाई के दौरान जस्टिस डब्ल्यू डिएंगडोह ने पुलिस के रवैये पर कड़ा रुख अपनाया। जज ने मौखिक रूप से पूछा कि आखिर दस्तावेजों में बार-बार एक ही तरह की टाइपिंग गलती कैसे हो सकती है? अदालत ने यह भी गौर किया कि गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेज पूरी तरह से टेम्पलेट पर आधारित थे। सबसे चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब अदालत ने देखा कि आरोपी के फॉर्म में उन्हें सशस्त्र बलों से भगोड़ा करार दिया गया था, जबकि इस केस से उस शब्दावली का कोई लेना-देना ही नहीं था। जज ने टिप्पणी की कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपी को कानूनी जानकारी देने की प्रक्रिया का सही ढंग से पालन नहीं किया गया।

सोनम के भागने की आशंका पर कोर्ट का जवाब

बहस के दौरान राज्य सरकार ने यह आशंका व्यक्त की कि यदि सोनम को जमानत दी जाती है, तो उनके भागने की संभावना अधिक है। इसके जवाब में जस्टिस डिएंगडोह ने स्पष्ट किया कि जमानत की शर्तें अत्यंत स्पष्ट हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि आरोपी कानून का उल्लंघन करती है या भागने की कोशिश करती है, तो कानून अपना काम करने के लिए स्वतंत्र है। सोनम की ओर से वकील एल थापा और सुदीप राणा ने मजबूती से अपना पक्ष रखते हुए जमानत का समर्थन किया।

क्या है पूरा हनीमून मर्डर केस

यह सनसनीखेज मामला 12 मई, 2025 को हुई शादी से जुड़ा है। सोनम और उनके पति राजा रघुवंशी 23 मई को मेघालय में हनीमून के लिए गए थे, जहां से वे अचानक लापता हो गए। उन्हें अंतिम बार नोंग्रियाट के एक होमस्टे में देखा गया था। घटना के 10 दिनों बाद, 2 जून को राजा रघुवंशी का शव पूर्वी खासी हिल्स की एक गहरी खाई से बरामद हुआ। इस दौरान सोनम भी गायब थीं, जो 8 जून को वाराणसी-गाजीपुर मार्ग पर एक ढाबे के पास मिलीं। मेघालय पुलिस का दावा है कि यह हत्या सोनम और उनके कथित प्रेमी राज कुशवाहा की सोची-समझी साजिश का परिणाम थी। पुलिस ने इस मामले में 700 से अधिक पन्नों की एक विस्तृत चार्जशीट दाखिल की है।

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