बुरहानपुर के मसीहा: पिछले 13 सालों से गरीब बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा उठा रहे फहीम हाशमी

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में एक समाजसेवी ऐसे बच्चों की मदद के लिए आगे आए हैं जो आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई नहीं कर पा रहे थे। फहीम हाशमी बीते 13 वर्षों से जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त में शैक्षणिक सामग्री मुहैया करा रहे हैं।

गरीब बच्चों के लिए उम्मीद की किरण

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में एक समाजसेवी ने शिक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता से समाज के सामने मिसाल पेश की है। लोहार मंडी क्षेत्र के निवासी फहीम हाशमी पिछले 13 वर्षों से गरीब, बेसहारा और मजदूर वर्ग के परिवारों के बच्चों के लिए मसीहा बनकर उभरे हैं। वे इन बच्चों को स्कूल जाने के लिए आवश्यक सभी सामग्री जैसे कि कॉपी, किताबें, बैग, पेन और पेंसिल मुफ्त में उपलब्ध करा रहे हैं। उनकी यह निस्वार्थ सेवा पिछले एक दशक से भी अधिक समय से निरंतर जारी है।

संकल्प की शुरुआत और प्रेरणा

इस सराहनीय कार्य के पीछे की कहानी तब शुरू हुई जब फहीम हाशमी ने अपने आसपास रहने वाले मजदूर परिवारों की बदहाली को करीब से देखा। उन्होंने पाया कि कड़ी मेहनत के बावजूद, इन परिवारों के पास इतने संसाधन नहीं थे कि वे अपने बच्चों को शिक्षा दिला सकें। कॉपी-किताबें खरीदने के लिए भी उनके पास पैसे नहीं होते थे। फहीम ने बताया कि एक समय ऐसा था जब उन्होंने एक दर्जन से अधिक ऐसे परिवारों को देखा, जो आर्थिक तंगी के कारण अपने बच्चों की पढ़ाई बीच में ही छुड़वा रहे थे। इस दर्दनाक स्थिति को देखकर उन्होंने अपने माता-पिता और परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर इन बच्चों की मदद करने का संकल्प लिया।

बढ़ता गया सेवा का दायरा

फहीम हाशमी ने अपने इस मिशन की शुरुआत पहले साल 50,000 रुपये की शैक्षणिक सामग्री खरीदकर की थी। शुरुआती दौर में बहुत कम लोगों को इस पहल की जानकारी थी, लेकिन धीरे-धीरे यह प्रयास बढ़ता चला गया। आज वे हर साल लगभग 1 से 1.5 लाख रुपये की राशि खर्च करके जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। उनका मानना है कि शिक्षा ही एकमात्र साधन है जिससे इन परिवारों का भविष्य सुधर सकता है।

सर्वे और चयन प्रक्रिया

इस पुण्य कार्य को पारदर्शी बनाने के लिए फहीम हाशमी शैक्षणिक सत्र शुरू होने से एक महीने पहले ही अपना सर्वे शुरू कर देते हैं। वे व्यक्तिगत रूप से उन परिवारों की पहचान करते हैं जिन्हें वास्तव में मदद की आवश्यकता है। केवल उन्हीं बच्चों का चयन किया जाता है जो आर्थिक रूप से पिछड़े हैं। फहीम बताते हैं कि इस पूरी प्रक्रिया में उन्हें अपनी पत्नी, माता-पिता और भाई का पूरा सहयोग मिलता है। परिवार का यह समर्थन ही है जो उनका हौसला बनाए रखता है और उन्हें समाज के लिए कुछ बेहतर करने की शक्ति देता है।

आने वाले समय के लिए बड़े लक्ष्य

समाजसेवी फहीम हाशमी का कहना है कि वे हर साल अपने बजट में 10,000 रुपये की बढ़ोतरी करते हैं ताकि अधिक से अधिक बच्चों तक मदद पहुंचाई जा सके। इसी क्रम में, उन्होंने इस साल 1,60,000 रुपये की स्कूल सामग्री की खरीदारी की है। उनका इस वर्ष का लक्ष्य 300 से अधिक बच्चों को स्कूल का सारा सामान वितरित करना है। हालांकि, वे यहीं रुकने वाले नहीं हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि आने वाले वर्षों में वे अपने इस लक्ष्य को और बड़ा करेंगे ताकि क्षेत्र में कोई भी बच्चा पैसों की कमी के कारण शिक्षा से वंचित न रहे।

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