हॉर्मुज संकट में कैसे सुरक्षित रहा भारत का ऊर्जा तंत्र: पेट्रोल-डीजल की किल्लत क्यों नहीं हुई?

हॉर्मुज स्ट्रेट में चार महीने तक शिपिंग बाधित रहने के बावजूद भारत में ईंधन की आपूर्ति पर कोई असर नहीं पड़ा, जबकि दुनिया के कई देशों में सख्त पाबंदियां लागू करनी पड़ी थीं।

ऊर्जा सुरक्षा की मिसाल बना भारत

दुनिया भर में जब ईंधन की कमी का संकट गहराया और कई देशों को आपातकालीन कदम उठाने पड़े, तब भारत ने बड़ी कुशलता के साथ स्थिति को संभाला। करीब चार महीनों तक हॉर्मुज स्ट्रेट में शिपिंग गतिविधियां बाधित रहने के बावजूद भारत में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बनी रही। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि भारत के मजबूत ऊर्जा ढांचे, दूरदर्शी नीतियों और सरकार द्वारा समय रहते उठाए गए सटीक कदमों का परिणाम है। इस पूरे संकट काल के दौरान देश के आम उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव नाममात्र का ही रहा।

विशेषज्ञों की राय में भारत की तैयारी

समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड की पूर्व चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर वर्तिका शुक्ला ने बताया कि हॉर्मुज स्ट्रेट से उपजी चुनौतियों ने वास्तव में भारत के ऊर्जा सेक्टर की मजबूती को साबित कर दिया है। उन्होंने कहा कि इस चुनौतीपूर्ण समय में भारत की आपूर्ति श्रृंखला स्थिर रही और बाजार में खुदरा कीमतों पर पड़ने वाला असर न्यूनतम रहा। इस स्थिरता के पीछे मुख्य कारण सरकार द्वारा कच्चे तेल के स्रोतों का समय पर विविधीकरण करना और ऊर्जा बुनियादी ढांचे में किया गया भारी निवेश है।

क्या आशंकाएं जताई जा रही थीं?

हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के पूर्व चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर एम.के. सुराना ने बताया कि जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा और हॉर्मुज स्ट्रेट में आवाजाही रुक गई, तो तमाम अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को यह चिंता सता रही थी कि भारत को ईंधन की भीषण किल्लत का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए जानकारों को लग रहा था कि देश में ईंधन की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो जाएगी और पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग जाएंगी।

दुनिया में लागू हुईं आपातकालीन पाबंदियां

एम.के. सुराना के अनुसार, स्थिति इतनी गंभीर थी कि एलपीजी सिलेंडर तक मिलना मुश्किल हो सकता था, जिससे बड़े पैमाने पर आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो जातीं। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों में इस संकट से निपटने के लिए पेट्रोल की राशनिंग, अनिवार्य वर्क फ्रॉम होम और शाम 5 बजे तक पेट्रोल पंप बंद करने जैसे सख्त आपातकालीन नियम लागू किए गए थे। इसके विपरीत, भारत के नागरिकों को ऐसी किसी भी प्रकार की कठिन परिस्थिति का सामना नहीं करना पड़ा।

सरकारी तालमेल और भविष्य की रणनीति

इस सफलता का पूरा श्रेय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों और तमाम प्रशासनिक एजेंसियों के आपसी तालमेल को जाता है। एम.के. सुराना ने बताया कि आपूर्ति में रुकावट आने के बावजूद सरकार घरेलू खपत को प्राथमिकता देने में सफल रही। इसके लिए मांग और आपूर्ति दोनों स्तरों पर ठोस उपाय किए गए, जिससे कुकिंग गैस की आपूर्ति बिना किसी बाधा के जारी रही। इसके अतिरिक्त, कच्चे तेल के आयात के लिए 40 से ज्यादा देशों के साथ संपर्क बनाने की सरकारी रणनीति ने हॉर्मुज के संकट को भारत के लिए बड़ा जोखिम नहीं बनने दिया और देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ किया है।

https://hindi.news18.com/news/nation/petrol-pumps-shut-at-5-pm-in-many-countries-how-india-remain-unshaken-in-hormuz-crisis-10613656.html