मुरैना में इंसानियत की बड़ी मिसाल
मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से एक बेहद सुखद और प्रेरणादायक खबर सामने आई है। यहाँ नेशनल हाईवे पर एक महिला शिक्षिका को अचानक दिल का दौरा पड़ा, जिसके कारण वह सड़क पर ही गिर गईं। उस नाजुक मोड़ पर जब मौत शिक्षिका के काफी करीब थी, तब दो अनजान युवकों ने अपनी सूझबूझ और समय पर सीपीआर (CPR) देकर उनकी जान बचा ली। इन युवकों ने यह साबित कर दिया कि यदि सही समय पर सही जानकारी का उपयोग किया जाए, तो किसी भी अनहोनी को टाला जा सकता है और किसी की जिंदगी को सुरक्षित किया जा सकता है।
स्कूल जाते समय हुई घटना
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना मुरैना के कैलारस क्षेत्र की है। तिलोंजरी हायर सेकेंडरी स्कूल में कार्यरत शिक्षिका ललिता धाकड़ रोज की तरह सोमवार की सुबह अपनी स्कूटी से स्कूल के लिए रवाना हुई थीं। सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन नेशनल हाईवे-552 पर पहुंचते ही उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें सीने में काफी तेज दर्द महसूस हुआ और देखते ही देखते वह अपनी स्कूटी समेत सड़क किनारे जा गिरीं। गिरते ही शिक्षिका बेहोश हो गईं और उनकी स्थिति काफी गंभीर बनी हुई थी।
राहगीरों ने दिखाई तत्परता
सड़क के किनारे शिक्षिका को इस तरह अचेत अवस्था में गिरते देखकर आसपास मौजूद लोग घबरा गए और उन्हें समझ नहीं आया कि स्थिति को कैसे संभालें। इसी दौरान सूरज धाकड़ और पवन गुर्जर नाम के दो युवक वहां से गुजर रहे थे। उन्होंने सड़क किनारे महिला को बेसुध हालत में देखा, तो बिना किसी देरी के उन्होंने अपनी गाड़ी रोकी और तुरंत उनकी मदद के लिए दौड़े। दोनों युवकों ने मौके की गंभीरता को भांप लिया था और वे जानते थे कि हर एक सेकंड कीमती है।
CPR ने किया करिश्मा
सूरज धाकड़ और पवन गुर्जर ने तुरंत शिक्षिका को प्राथमिक सहायता देने का निर्णय लिया और उन्हें सीपीआर (CPR) देना शुरू कर दिया। युवकों ने पूरी हिम्मत और धैर्य के साथ प्रयास जारी रखा। उनके निरंतर प्रयासों का सकारात्मक असर कुछ ही देर में दिखने लगा। शिक्षिका की सांसें वापस लौटने लगीं और उनकी स्थिति में थोड़ा सुधार महसूस हुआ। यह एक ऐसी प्रक्रिया थी जिसने शिक्षिका को मौत के मुंह से खींचकर बाहर निकाल लिया।
अस्पताल में हुई सराहना
प्राथमिक सहायता देने के बाद दोनों युवक बिल्कुल भी नहीं रुके। वे तुरंत शिक्षिका को अपनी गाड़ी में बैठाकर कैलारस अस्पताल ले गए। अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों ने शिक्षिका का तत्काल प्राथमिक उपचार किया। हालांकि, उनकी स्थिति गंभीर होने के कारण उन्हें आगे के विशेष इलाज के लिए ग्वालियर रेफर कर दिया गया। जब शिक्षिका के परिजनों को इस घटना की सूचना मिली, तो वे भी तुरंत अस्पताल पहुंच गए। चिकित्सकों का कहना है कि हार्ट अटैक जैसे मामलों में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। अगर सही समय पर सीपीआर नहीं मिलता, तो शिक्षिका की जान बचाना काफी मुश्किल हो सकता था। डॉक्टरों ने भी इन युवकों के इस साहसपूर्ण कदम की भरपूर सराहना की है। सूरज और पवन की इस जागरूकता ने यह सिद्ध कर दिया है कि आपातकालीन स्थितियों में प्राथमिक उपचार का ज्ञान समाज के लिए कितना अनिवार्य है।
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