संघर्ष से सफलता तक का सफर
आज के दौर में जब कई युवा और किसान पारंपरिक खेती के सीमित दायरे से बाहर निकलकर कुछ नया करने की तलाश में हैं, तब मधुमक्खी पालन का व्यवसाय एक बेहतरीन अवसर बनकर सामने आया है। लातेहार के रहने वाले अखिलेश यादव की कहानी इसी बदलाव की एक मिसाल है। कभी वे पेट पालने के लिए दूसरे राज्यों में जाकर मधुमक्खी पालन के काम में मजदूर के तौर पर पसीना बहाते थे। आज वे उसी क्षेत्र के सफल उद्यमी हैं और अपनी मेहनत की बदौलत सालाना 12 लाख रुपये तक की कमाई कर रहे हैं।
शुरुआत के दिन और बारीकियां
अखिलेश यादव ने साल 2012 में इस काम की शुरुआत की थी। उन्होंने बताया कि उस समय उनके पास कोई बड़ा संसाधन नहीं था। वे दूसरे राज्यों में जाकर मधुमक्खी पालन के काम में मजदूरी करते थे। इस दौरान उन्होंने खलारी निवासी राजेश यादव के साथ काम करते हुए इस व्यवसाय की बारीकियों को बारीकी से समझा। राजेश यादव उस समय पहले से ही इस व्यवसाय में सक्रिय थे। उनसे मिले प्रशिक्षण और काम के लंबे अनुभव के बाद, अखिलेश ने आत्मविश्वास के साथ खुद का व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया।
1.25 लाख की पूंजी से बड़ा बदलाव
अखिलेश यादव ने अपनी जमा-पूंजी के तौर पर करीब 1 लाख 25 हजार रुपये लगाए। इसी राशि से उन्होंने 100 मधुमक्खी बक्सों को खरीदकर लातेहार में अपने काम की शुरुआत की। उनकी लगन और बेहतर प्रबंधन का ही परिणाम है कि आज उनके पास 600 मधुमक्खी बक्से उपलब्ध हैं। इन बक्सों की कुल कीमत लगभग 12 लाख रुपये है। वे अपने फार्म पर विशेष रूप से इटालियन नस्ल की मधुमक्खियों का पालन करते हैं, जो अधिक शहद उत्पादन के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती हैं।
राज्य दर राज्य भ्रमण और गुणवत्ता
शहद उत्पादन की प्रक्रिया के बारे में बताते हुए अखिलेश ने साझा किया कि वे अपनी टीम के साथ लगातार सक्रिय रहते हैं। मौसम और अलग-अलग स्थानों पर फूलों की उपलब्धता के आधार पर वे अपने मधुमक्खी बक्सों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाते हैं। वे पलामू, गढ़वा और लातेहार के अलावा राजस्थान जैसे राज्यों में भी जाकर शहद का उत्पादन करते हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में मौजूद विभिन्न प्रकार के फूलों के कारण शहद की गुणवत्ता और स्वाद में भी भिन्नता होती है, जिसके चलते बाजार में उनके शहद की काफी अधिक मांग रहती है।
आर्थिक मुनाफा और दूसरों को रोजगार
अखिलेश का यह कारोबार आज पांच लोगों को स्थायी रोजगार दे रहा है। उन्होंने बताया कि एक सीजन के दौरान मधुमक्खी पालन पर लगभग 2 से 2.5 लाख रुपये का खर्च आता है। इसमें परिवहन और रखरखाव जैसे सभी खर्चे शामिल हैं। इन तमाम खर्चों को काटने के बाद उन्हें एक साल में 10 से 12 लाख रुपये तक का मुनाफा हो जाता है। यह आय उनकी मेहनत और धैर्य का परिणाम है।
युवाओं के लिए प्रेरणा
अखिलेश यादव का मानना है कि यदि सही प्रशिक्षण और सच्ची लगन के साथ मधुमक्खी पालन के क्षेत्र में कदम रखा जाए, तो यह किसानों और युवाओं के लिए आत्मनिर्भर बनने का एक सबसे अच्छा माध्यम हो सकता है। उनकी सफलता यह साबित करती है कि यदि इरादे मजबूत हों, तो छोटे स्तर पर शुरू किया गया कोई भी काम एक दिन बड़े और सफल व्यवसाय का रूप ले सकता है। आज अखिलेश यादव उन सभी लोगों के लिए एक मिसाल हैं जो आर्थिक तंगी के कारण हार मान लेते हैं, लेकिन उन्होंने यह सिद्ध कर दिया है कि उचित मार्गदर्शन से अपनी किस्मत खुद लिखी जा सकती है।
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